दुर्गापूजा में एक और हादसा : शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, 13 श्रद्धालुओं की मौत, 40 से ज्यादा घायल
शीतला माता मंदिर मार्ग पर नवरात्रि के दौरान भीषण सड़क हादसा हुआ। बेकाबू ट्रक की चपेट में आने से 13 लोगों की मौत और करीब 40 श्रद्धालुओं के घायल होने की खबर है।

बेकाबू ट्रक श्रद्धालुओं की भीड़ में घुसा, मंदिर का प्रवेश द्वार और दीवार क्षतिग्रस्त; भारी वाहनों की एंट्री को लेकर प्रशासन पर उठे सवाल
BIG Accident। कोलकाता में हुए भीषण हादसे के बाद दुर्गापूजा में एक और दर्दनाक हादसे की खबर ने सभी को दुख में डूबो दिया। मंदिर के पास हुए एक सड़क हादसे में 2 पुलिसकर्मी सहित 14 लोगों की जान चली गयी। घटना मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के रास्ते पर रविवार तड़के हुई है। नवरात्रि के दौरान मां के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं को एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया। इस भीषण दुर्घटना में 13 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 40 लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई। पुलिस और राहत दल ने मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
ढलान पर बेकाबू हुआ ट्रक, भीड़ को रौंदते हुए मंदिर के गेट से टकराया
जानकारी के मुताबिक, हादसा रात करीब 1:00 बजे शीतला माता मंदिर मार्ग पर हुआ। नवरात्रि के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान धान से भरा एक ट्रक ढलान पर अनियंत्रित हो गया। ट्रक श्रद्धालुओं को अपनी चपेट में लेते हुए आगे बढ़ा और सड़क किनारे लगी दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद वह मंदिर के प्रवेश द्वार से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मंदिर की दीवार का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। कई लोग ट्रक और मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय लोगों और बचाव दल ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की। इसके बाद घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
13 लोगों की मौत, कई घायलों का इलाज जारी
इस दुर्घटना में अब तक 14 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। करीब 40 लोग घायल बताए जा रहे हैं। कुछ घायलों की स्थिति गंभीर होने के कारण उनका अस्पताल में इलाज जारी है। हादसे में पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “यह घटना रात करीब 1 बजे हुई… मैंने कुछ लोगों को मौके पर ही दम तोड़ते देखा… ट्रक में क्षमता से अधिक सामान लदा था; वह अचानक आया और कुछ दुकानों और लोगों को कुचल दिया… मेरे भाई को भी चोटें आई हैं… घटना स्थल पर अभी भी अफरा-तफरी मची हुई है…”
मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। इस दौरान अस्पताल और पोस्टमार्टम केंद्र के बाहर परिजनों की भीड़ जुट गई। अपने प्रियजनों को खोने के बाद परिवारों में मातम पसरा है। हादसे को लेकर परिजनों में आक्रोश भी देखने को मिला।
#WATCH | Madhya Pradesh | Early morning visuals from the spot where a truck ran over several people near Sheetla Mata Mandir in Gwalior, claiming the lives of 11 people and leaving 29 people injured https://t.co/zyoabIhQ8a
— ANI (@ANI) October 18, 2026
नो-एंट्री के बावजूद मंदिर मार्ग पर कैसे पहुंचा ट्रक?
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक होने के बावजूद ट्रक वहां तक कैसे पहुंच गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच ट्रक के प्रवेश ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों का कहना है कि नवरात्रि के दौरान मंदिर मार्ग पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। ऐसे में भारी वाहनों के प्रवेश पर सख्ती और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था जरूरी है। अब यह जांच का विषय है कि ट्रक प्रतिबंधित मार्ग तक कैसे पहुंचा और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक हुई थी।
परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
हादसे के बाद एक महिला ने आरोप लगाया कि उनका 19 वर्षीय बेटा गौरव दुर्घटना के बाद जीवित था और उसकी सांसें चल रही थीं। महिला किरण के मुताबिक, वह अपने बेटे को निजी अस्पताल ले जाना चाहती थीं, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर एंबुलेंस को आगे जाने से रोक दिया। महिला ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उनके बेटे की मौत हो गई।
ये आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। इस संबंध में प्रशासन या पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
हादसे के बाद इलाके में तनाव, जांच में जुटा प्रशासन
घटना के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। आक्रोश को देखते हुए पोस्टमार्टम केंद्र के आसपास पुलिस बल तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस अधीक्षक धर्मवीर सिंह भी मौके पर पहुंचे। हालांकि, हादसे की परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में हादसे की वजह क्या सामने आती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।












