ED Action in Ranchi: जिस्मफरोशी मामले में ईडी का बड़ा एक्शन, युवतियों की तस्करी और देह व्यापार के आरोपों में हुई कार्रवाई, माइकल-मोना तिर्की की 3.60 करोड़ की संपत्ति जब्त
ED Action in Ranchi: Major move by the ED in a prostitution case; action taken over allegations of trafficking young women and sex work—assets worth ₹3.60 crore belonging to Michael and Mona Tirkey have been seized.

रांची । ईडी ने जिस्मफरोशी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। बांग्लादेशी युवतियों की कथित मानव तस्करी और जबरन देह व्यापार से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रांची में बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे माइकल जोसेफ तिर्की और उसकी पत्नी मोना तिर्की की 3.60 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की है। ईडी के मुताबिक, जब्त संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य करीब 5 करोड़ रुपये है। एजेंसी को संदेह है कि यह संपत्ति कथित अवैध कारोबार से अर्जित अपराध की कमाई से बनाई गई थी।
जून 2024 में रिसॉर्ट से सामने आया था मामला
आपको बता दें कि यह पूरा मामला जून 2024 में रांची के बरियातू थाना क्षेत्र स्थित एक रिसॉर्ट में सामने आए कथित सेक्स रैकेट से जुड़ा है। स्थानीय पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच शुरू की थी। जांच के दौरान झारखंड और पश्चिम बंगाल में कथित नेटवर्क से जुड़े कई लोगों और एजेंटों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई।
जांच एजेंसी को आशंका है कि इस गिरोह का नेटवर्क सीमा पार तक फैला हुआ था। आरोप है कि गरीब बांग्लादेशी युवतियों को भारत में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर सीमा पार कराया जाता था और बाद में उन्हें कथित तौर पर देह व्यापार में धकेल दिया जाता था।
पीड़िता के भागने के बाद खुला कथित नेटवर्क
मामले का खुलासा 3 जून 2024 को हुआ था। जानकारी के मुताबिक, रिसॉर्ट में कथित तौर पर बंधक बनाई गई बांग्लादेशी युवती निपाह अख्तर उर्फ खुशी वहां से निकलकर पुलिस के पास पहुंची थी। उसने अपनी आपबीती पुलिस को बताई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में आरोप सामने आए कि युवतियों को नौकरी का लालच देकर भारत लाया जाता था। इसके बाद कथित तौर पर उनके फर्जी भारतीय पहचान पत्र, जैसे आधार और पैन कार्ड, बनवाने की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
पश्चिम बंगाल से रांची तक फैला था नेटवर्क
जांच के अनुसार, पीड़िता 31 मई 2024 की रात कथित तौर पर अवैध रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर पश्चिम बंगाल पहुंची थी। आरोप है कि मनीषा और झूमा नाम की महिलाओं ने इसमें उसकी मदद की थी। इसके बाद उसे नौकरी दिलाने का झांसा देकर रांची लाया गया और कथित तौर पर एक रिसॉर्ट तथा फ्लैट में रखा गया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, वहां परवीन और झूमा नाम की अन्य युवतियां भी मौजूद थीं। इस मामले में एजेंसियां कथित मानव तस्करी के नेटवर्क, युवतियों को लाने-ले जाने में शामिल लोगों और अवैध कमाई के स्रोतों की जांच कर रही हैं।
माइकल और मोना तिर्की पर क्या हैं आरोप?
ईडी की जांच में माइकल जोसेफ तिर्की और उसकी पत्नी मोना तिर्की पर कथित तौर पर युवतियों को ठहराने और उनसे जबरन देह व्यापार कराने वाले नेटवर्क में प्रमुख भूमिका निभाने के आरोप हैं। एजेंसी का दावा है कि इस अवैध गतिविधि से हुई कमाई का इस्तेमाल संपत्ति अर्जित करने में किया गया।
इसी आधार पर दंपति की 3.60 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई की गई है। एजेंसी के अनुसार, इन संपत्तियों का बाजार मूल्य लगभग 5 करोड़ रुपये आंका गया है। संपत्ति जब्ती की कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच का हिस्सा है।
मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच जारी
इस कार्रवाई के बाद रांची में सामने आए कथित मानव तस्करी नेटवर्क और उससे जुड़ी अवैध कमाई की जांच एक बार फिर चर्चा में है। मामले में पुलिस की प्राथमिकी और ईडी की जांच के आधार पर आरोपियों की भूमिका, संपत्ति के स्रोत तथा नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, संपत्ति जब्त किए जाने की कार्रवाई अपने आप में आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के समान नहीं है। मामले में आरोपों की पुष्टि और अंतिम फैसला संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।












