डाईपर ने बचा ली मासूम की जान: 20 दिन की मासूम को मां की गोद छिनकर बंदर भागा, फिर फेंक दिया 200 फीट गहरे कुएं में, डाइपर ने बचा ली जान, जानिये कैसे हुए चमत्कार, देखें VIDEO
A diaper saved the innocent child's life: A monkey snatched a 20-day-old child from her mother's lap and ran away, then threw her into a 200-foot-deep well. The diaper saved her life. Learn how the miracle happened.

Regional News/25.1.26: 20 दिन की मासूम को मां की गोद से बंदर छिनकर भाग गया और 200 फीट गहरे कुंए में फेंक दिया। लेकिन बच्ची की डाइपर ने उसकी जान बचा ली। चमत्कार कर देने वाली ये खबर जिस किसी ने भी सुनी, वो हैरान रह गया। ये घटनाक्रम छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के सिवनी गांव की है। जहां मां की गोद से 20 दिन की नवजात बच्ची को बंदर उठा ले गया और कुएं में गिरा दिया। चमत्कारिक रूप से डायपर लाइफ जैकेट बना, ग्रामीणों और एक नर्स की सूझबूझ से बच्ची की जान बच गई।
शायद इसी वजह से एक लोकक्ति बनी है, “जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”— एक बंदर मां की गोद से महज 20 दिन की दूधमुंही बच्ची को छीनकर ले गया और कुछ देर बाद उसे गांव के पास स्थित कुएं में गिरा दिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—डायपर बच्ची के लिए लाइफ जैकेट साबित हुआ और समय रहते मिली मदद से उसकी जान बच गई।
घटना उस समय हुई जब गांव निवासी अरविंद राठौर की पत्नी अपनी नवजात बेटी को गोद में लेकर खाना खिला रही थीं। इसी दौरान अचानक एक बंदर वहां आ पहुंचा और पल भर में बच्ची को छीनकर भाग गया। मां की चीख-पुकार सुनते ही परिजन और आसपास के ग्रामीण बंदर के पीछे दौड़ पड़े। करीब 10 से 15 मिनट तक बंदर बच्ची को लेकर इधर-उधर भागता रहा, जिससे पूरे गांव में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कुछ समय बाद जब बच्ची दिखाई नहीं दी तो आशंका और गहराने लगी। खोजबीन के दौरान ग्रामीणों की नजर पास ही स्थित एक कुएं पर पड़ी, जहां सभी के होश उड़ गए। कुएं में बच्ची पानी के ऊपर तैरती हुई दिखाई दी। बताया जा रहा है कि बच्ची करीब 10 मिनट तक कुएं के पानी में रही और उसने पानी भी निगल लिया था, लेकिन उसने जो डायपर पहन रखा था, वही उसकी जान बचाने का सबसे बड़ा सहारा बन गया। डायपर के कारण बच्ची पूरी तरह पानी में नहीं डूबी।
ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए रस्सी और बाल्टी की मदद से बच्ची को कुएं से बाहर निकाला। उस वक्त बच्ची की हालत बेहद नाजुक थी और सांसें लगभग थम चुकी थीं। इसी बीच गांव में भागवत कथा सुनने आईं सारंगढ़ की रहने वाली महिला नर्स राजेश्वरी राठौर मौके पर मौजूद थीं। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तत्काल बच्ची को सीपीआर देना शुरू किया। कुछ ही पलों में बच्ची की सांसें लौट आईं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
प्राथमिक उपचार के बाद बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने राहत की खबर दी। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची की हालत अब स्थिर है और उसे किसी प्रकार की गंभीर आंतरिक चोट नहीं आई है।बच्ची के पिता अरविंद राठौर, जो मड़वा पावर प्लांट में कार्यरत हैं, घटना के समय ड्यूटी पर थे। उन्होंने बताया कि गांव में बंदरों की मौजूदगी आम है, लेकिन इस तरह की घटना पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने भगवान, गांववालों और नर्स राजेश्वरी राठौर का आभार जताया और कहा कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो बड़ा हादसा हो सकता था।








