झूठे 23 सिपाही सस्पेंड: दारोगा भर्ती परीक्षा देने गये 23 पुलिसकर्मी सस्पेंड, झूठ बोलकर ली थी छुट्टी, अब SSP ने किया निलंबित…
23 Dishonest Constables Suspended: 23 Police Personnel Suspended for Appearing in Sub-Inspector Recruitment Exam; Took Leave Under False Pretexts, Now Suspended by the SSP.

दरोगा भर्ती परीक्षा देने के लिए झूठी छुट्टी लेने वाले 23 सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच में अनुशासनहीनता सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
________________________________________
Police Suspend। पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां दरोगा भर्ती परीक्षा देने के लिए कथित रूप से झूठी बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी लेने वाले 23 सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। सिपाही पर हुए इस कार्रवाई ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है और अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी एक सख्त संदेश दिया है। पूरा मामला उत्तर प्रदेश के झांसी जिले का है।
ये सभी सिपाही हाल ही में आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा 2026 में शामिल होने के लिए छुट्टी पर गए थे। आरोप है कि उन्होंने बीमारी का बहाना बनाकर अवकाश लिया और परीक्षा देने पहुंच गए। परीक्षा के बाद कुछ सिपाही वापस लौटकर ड्यूटी जॉइन भी कर लिए, लेकिन विभागीय जांच में पूरा मामला उजागर हो गया।
एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने ये कार्रवाई 19 मार्च को थी, हालांकि मामला सोमवार को सार्वजनिक रूप से सामने आया। SSP ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई दरोगा भर्ती परीक्षा में सिपाही के शामिल होने के कारण नहीं, बल्कि बिना अनुमति झूठे आधार पर छुट्टी लेने और लंबे समय तक गैरहाजिर रहने के कारण की गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि कई सिपाही बिना किसी पूर्व सूचना के 30 दिनों से अधिक समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहे। यह पुलिस विभाग के नियमों का गंभीर उल्लंघन है, जिसे अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखा गया है। SSP ने इस मामले में विस्तृत विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
आपको बता दें कि 14 और 15 मार्च को उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPBPB) द्वारा दरोगा के 4,543 पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा प्रदेश के सभी 75 जिलों में बनाए गए 1090 केंद्रों पर संपन्न हुई थी। इस परीक्षा के लिए कुल 15.75 लाख अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें 11.66 लाख पुरुष और 4.09 लाख महिला उम्मीदवार शामिल थे।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई सिपाहियों ने परीक्षा देने के लिए पहले से ही छुट्टी की योजना बनाई थी। कुछ ने 2 से 4 दिन की छुट्टी ली, जबकि कुछ ने लंबी छुट्टी ली और निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटे। जब विभाग को इस पर संदेह हुआ तो गोपनीय जांच कराई गई, जिसमें 23 सिपाहियों के नाम सामने आए।
इस मामले पर पूर्व DGP सुलखान सिंह ने बताया कि परीक्षा फॉर्म भरने के लिए अनुमति जरूरी नहीं होती, लेकिन परीक्षा में शामिल होने के लिए विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। यदि कोई पुलिसकर्मी झूठ बोलकर छुट्टी लेता है, तो यह गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाती है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।









