एक गैस सिलेंडर से सरकार को कितनी होती है कमाई, जानिए एक सिलेंडर से केंद्र और राज्य सरकार को होने वाली कमाई, GST और रेवेन्यू का पूरा गणित
19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर सरकार कितना टैक्स वसूलती है? जानिए एक सिलेंडर से केंद्र और राज्य सरकार को होने वाली कमाई, GST और रेवेन्यू का पूरा गणित।

LPG Cylinder News । LPG सिलेंडर के रेट बढ़ते और घटते जाते हैं। कई बार सरकार गैस के दामों को लेकर घाटे का भी हवाला देती है। ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि गैस सिलेंडर के सप्लाई में सरकार को कितनी कमाई होती है, डिलरको एक गैस की आपूर्ति में कितना पैसा बचता है।
इससे पहले केंद्र सरकार ने दो महीने से लागू पाबंदियों को हटाते हुए 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सामान्य आपूर्ति बहाल कर दी है। इस फैसले से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, फैक्ट्रियां और अन्य व्यावसायिक उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सरकार को हर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की बिक्री से कितना राजस्व मिलता है? आंकड़े बताते हैं कि कमर्शियल सिलेंडर सरकार के लिए अप्रत्यक्ष कर (Indirect Tax) का एक बड़ा स्रोत हैं।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर पर अलग-अलग टैक्स
अगर घरेलू गैस की बात करें तो घरेलू उपयोग के लिए मिलने वाले 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर पर सरकार केवल 5 प्रतिशत जीएसटी वसूलती है। इसमें 2.5 प्रतिशत केंद्रीय जीएसटी (CGST) और 2.5 प्रतिशत राज्य जीएसटी (SGST) शामिल होता है।
वहीं, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। इसमें 9 प्रतिशत CGST और 9 प्रतिशत SGST शामिल है। यही कारण है कि कमर्शियल सिलेंडर सरकार के लिए अधिक राजस्व जुटाने का माध्यम बनते हैं।
एक सिलेंडर पर करीब 474 रुपये टैक्स
वहीं, यदि 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 3,113.50 रुपये मानी जाए, तो उस पर करीब 474 रुपये जीएसटी के रूप में वसूले जाते हैं। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बराबर-बराबर बांटी जाती है।यानी एक सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 237 रुपये केंद्र सरकार और लगभग 237 रुपये संबंधित राज्य सरकार को प्राप्त होते हैं।
सिर्फ जीएसटी ही नहीं, अन्य स्रोतों से भी कमाई
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर से सरकार की कमाई केवल जीएसटी तक सीमित नहीं है। एलपीजी के उत्पादन, आयात और विपणन से जुड़े विभिन्न चरणों में भी सरकारी राजस्व बढ़ता है।सरकारी तेल विपणन कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—एलपीजी सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से लाभ अर्जित करती हैं। इन कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड भी सरकार की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
डीलरों को मिलता है अलग मार्जिन
एलपीजी वितरकों को प्रत्येक कमर्शियल सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 80 से 100 रुपये तक का डीलर मार्जिन मिलता है। यह घरेलू सिलेंडर की तुलना में अधिक माना जाता है।इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट और औद्योगिक इकाइयों तक सिलेंडर पहुंचाने के लिए कई क्षेत्रों में लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन शुल्क भी लिया जाता है, जिससे डिस्ट्रीब्यूटर की अतिरिक्त आय होती है।
कमर्शियल सेक्टर के लिए राहत
कमर्शियल सिलेंडरों की सामान्य सप्लाई बहाल होने से होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग व्यवसाय, फैक्ट्रियों और छोटे कारोबारियों को राहत मिलेगी। पिछले कुछ समय से सप्लाई संबंधी प्रतिबंधों के कारण व्यावसायिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित आपूर्ति से बाजार में स्थिरता आएगी और व्यवसायों की परिचालन लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।देशभर में लाखों होटल, रेस्टोरेंट, फूड यूनिट, बेकरी, कैंटीन और छोटे उद्योग कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर हैं। ऐसे में इस श्रेणी के सिलेंडरों की बिक्री न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति देती है, बल्कि सरकार के लिए भी कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनी रहती है।









