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Jharkhand High Court: पारा शिक्षकों के पेंशन पर हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, 10 साल पूर्ण नहीं करने वालों को भी मिलेगा हक, कहा, पेंशन कोई एहसान नहीं, कर्मचारी का कानूनी अधिकार

झारखंड हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि नियमित नियुक्ति से पहले पारा शिक्षक के रूप में की गई संविदा सेवा भी पेंशन योग्य मानी जाएगी। राज्य सरकार को 8 सप्ताह में सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश।

रांची। झारखंड हाई कोर्ट ने पारा शिक्षकों के पेंशन को लेकर अहम फैसला दिया है। वैसे पारा शिक्षक जो 10 साल की सेवा अवधि पूरा किये बगैर ही रिटायर हो गये हैं, उन्हें भी पेंशन का लाभ देना होगा।  हाईकोर्ट ने पारा शिक्षकों के पूर्व सेवाकाल को जोड़कर सेवानिवृत्त शिक्षकों के हित में ये महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि नियमित शिक्षक बनने से पहले पारा शिक्षक (संविदा) के रूप में की गई निर्बाध सेवा अवधि को भी पेंशन के लिए अर्हक सेवा माना जाएगा। इस फैसले से राज्य के हजारों शिक्षकों को भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद है।

43 सेवानिवृत्त शिक्षकों की याचिका पर आया फैसला

जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शंभू राम सहित 43 सेवानिवृत्त शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को आठ सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति लाभों की पुनर्गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया है।अदालत ने कहा कि शिक्षकों को संशोधित पेंशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ, जीआईएस, अवकाश नकदीकरण समेत अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं। साथ ही सेवानिवृत्ति की तिथि से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देने का आदेश दिया गया है।

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क्या था पूरा मामला?

हाईकोर्ट में दायर याचिका के मुताबिक याचिकाकर्ता वर्ष 2002 से 2007 के बीच पारा शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे। उन्होंने सात से 16 वर्षों तक संविदा के आधार पर सेवा दी। इसके बाद राज्य सरकार द्वारा पारा शिक्षकों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत कोटे के तहत आयोजित प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर वर्ष 2014 से 2016 के बीच नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की।60 वर्ष की आयु पूरी होने पर जब वे सेवानिवृत्त हुए, तब उनकी नियमित सेवा अवधि केवल चार से नौ वर्ष की थी। राज्य सरकार ने यह कहते हुए पेंशन देने से इनकार कर दिया कि पेंशन के लिए कम से कम 10 वर्ष की नियमित सेवा आवश्यक है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पेंशन किसी कर्मचारी को दिया जाने वाला अनुग्रह नहीं, बल्कि उसका वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी कर्मचारी ने नियमित नियुक्ति से पहले लगातार संविदा पर सेवा दी है, तो उस अवधि को भी पेंशन योग्य सेवा में शामिल किया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट के प्रेम सिंह, शीला देवी और एस.डी. जयप्रकाश मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमित नियुक्ति से पूर्व की गई संविदा सेवा को भी अर्हक सेवा में जोड़ा जाएगा। इसी आधार पर अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए राज्य

सरकार को निर्धारित समय सीमा में सभी सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान करने का निर्देश दिया।

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हजारों शिक्षकों को मिलेगा लाभ

हाई कोर्ट के इस फैसले को झारखंड के पारा शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे ऐसे शिक्षकों को लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है, जिन्होंने वर्षों तक संविदा पर सेवा देने के बाद नियमित नियुक्ति प्राप्त की, लेकिन नियमित सेवा अवधि 10 वर्ष से कम होने के कारण पेंशन से वंचित रह गए थे।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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