JPSC OMR विवाद पर हाईकोर्ट सख्त: गलत बबलिंग की गलती अभ्यर्थी की, नहीं मिलेगी कोई राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 के OMR विवाद में बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि गलत बबलिंग और रोल नंबर की त्रुटि अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है, ऐसे मामलों में कोई राहत नहीं दी जा सकती।

रांची। गलत बबलिंग मामल में हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों को कोई राहत नहीं दी है। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 (JPSC Civil Services Preliminary Exam 2026) से जुड़े OMR शीट विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि गलत बबलिंग (Wrong Bubbling) या OMR शीट में त्रुटि करने वाले अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने कहा कि परीक्षा से पहले आयोग द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों के बावजूद यदि अभ्यर्थी गलती करता है, तो उसकी जिम्मेदारी स्वयं अभ्यर्थी की होगी, न कि आयोग की।यह मामला अभ्यर्थी राजन कुमार सिंह से जुड़ा था, जिनकी OMR शीट में गलत बबलिंग और रोल नंबर भरने में त्रुटि पाए जाने के बाद झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने उनकी उत्तरपुस्तिका निरस्त कर दी थी। इसके चलते उनका अभ्यर्थी के रूप में चयन भी रद्द कर दिया गया था।
2 जुलाई को जारी हुआ था प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम
झारखंड लोक सेवा आयोग ने 2 जुलाई 2026 को संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया था। यह परीक्षा सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-1 और पेपर-2 की OMR आधारित परीक्षा थी। परिणाम जारी होने के बाद OMR शीट निरस्त किए जाने के मामले को लेकर राजन कुमार सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
आयोग ने कोर्ट में रखा स्पष्ट पक्ष
JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने अदालत को बताया कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र और निर्देश पुस्तिका में साफ लिखा गया था कि यदि कोई अभ्यर्थी रोल नंबर गलत भरता है, गलत बबलिंग करता है या OMR शीट में कटिंग, ओवरराइटिंग अथवा अन्य त्रुटि करता है, तो उसकी OMR शीट स्वतः अमान्य मानी जाएगी।आयोग ने कोर्ट को यह भी बताया कि याचिकाकर्ता की OMR शीट इन्हीं कारणों से निरस्त की गई थी और यह पूरी तरह परीक्षा नियमों के अनुरूप कार्रवाई थी।
पहले सिंगल बेंच, फिर डिवीजन बेंच में हुई सुनवाई
मामले की प्रारंभिक सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि OMR विवादों को लेकर पहले से कई न्यायिक फैसले मौजूद हैं। बाद में मामला डिवीजन बेंच को स्थानांतरित किया गया, जहां मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने विस्तृत सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी दिया गया हवाला
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से “अजीत कुमार प्रकरण” सहित कई न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट भी बरकरार रख चुका है। आयोग ने दलील दी कि गलत बबलिंग जैसी त्रुटियों के लिए आयोग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।याचिकाकर्ता द्वारा दिल्ली और हैदराबाद हाईकोर्ट के जिन फैसलों का हवाला दिया गया था, उन्हें इस मामले में लागू नहीं माना गया क्योंकि उन मामलों के तथ्य अलग थे।
हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि OMR शीट में हुई गलती अभ्यर्थी की स्वयं की त्रुटि है। ऐसी स्थिति में न्यायालय परीक्षा नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि परीक्षा के निर्देशों का पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है।इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राजन कुमार सिंह की याचिका खारिज करते हुए JPSC की कार्रवाई को वैध ठहराया।








