Jharkhand High Court: बहाली पर वेतन पर हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं, अवमानना पर कोर्ट ने लगायी राज्य सरकार को फटकार, शिक्षा सचिव को किया तलब
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा सेवा की अधिकारी फरहाना खातून से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने आदेशों का पालन नहीं होने पर स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह को 14 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

रांची। हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में राज्य सरकार पर नाराजगी जतायी है। हाईकोर्ट ने राज्य शिक्षा सेवा की अधिकारी फरहाना खातून से जुड़े अवमानना मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए शिक्षा सचिव को तलब किया है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह को 14 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
बहाली और वेतन पर नहीं हुआ आदेश का पालन
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए आदेश के बावजूद फरहाना खातून को न तो विधिवत सेवा में बहाल किया गया और न ही उन्हें वेतन का भुगतान किया गया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह न्यायालय के आदेश की अवहेलना का गंभीर मामला है।
एक ही आदेश में बहाली और निलंबन पर सवाल
इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि एक ही आदेश में किसी अधिकारी की पुनर्बहाली और निलंबन दोनों कैसे किए जा सकते हैं। कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण मानते हुए सरकार को आदेश की समीक्षा कर शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था।
हालांकि अगली सुनवाई में सरकार की ओर से न तो कोई शपथपत्र दाखिल किया गया और न ही कोई लिखित जवाब प्रस्तुत किया गया। सरकार ने केवल मौखिक रूप से कहा कि संबंधित आदेश कैबिनेट की मंजूरी से पारित हुआ है, इसलिए उसमें संशोधन संभव नहीं है।
18 नवंबर 2025 से वेतन नहीं मिलने का दावा
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट पहले ही बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर बहाली का निर्देश दे चुका है। इसके बावजूद फरहाना खातून को सेवा में नहीं लिया गया और 18 नवंबर 2025 से अब तक का वेतन भी नहीं दिया गया, जबकि वे उस तारीख से वेतन पाने की हकदार हैं।
विभागीय जांच भी समय पर पूरी नहीं हुई
अदालत को यह भी बताया गया कि विभागीय जांच छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया था, जिसकी समयसीमा अप्रैल 2026 में समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद न तो चार्जशीट जारी की गई, न जांच पूरी हुई और न ही समय बढ़ाने के लिए कोई आवेदन दाखिल किया गया।
सब्सिस्टेंस अलाउंस भी नहीं दिया गया
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि यदि सरकार फरहाना खातून को निलंबित मान रही है, तो उन्हें नियमानुसार मिलने वाला जीवन-निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) भी नहीं दिया जा रहा है। कोर्ट ने इसे भी गंभीर अनियमितता माना।
14 अगस्त को सचिव देंगे जवाब
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह को 14 अगस्त को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पूछा है कि आदेश के बावजूद बहाली क्यों नहीं हुई, वेतन या भत्ता का भुगतान क्यों नहीं किया गया और समान परिस्थितियों वाले अन्य अधिकारियों की तुलना में फरहाना खातून के साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया।









