रांची: डाक्टर की तलाश पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टर को पत्नी-बच्चों के लिए देने होंगे 90 लाख रुपये, 12 महीने में 4 किस्तों में भुगतान
झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में डॉक्टर को पत्नी के लिए 40 लाख और दोनों बच्चों के लिए 25-25 लाख रुपये देने का आदेश दिया। जानें पूरा फैसला।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने एक तलाक की याचिका पर बड़ा अहम फैसला सुनया है। हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए गढ़वा सदर अस्पताल में संविदा पर कार्यरत चिकित्सक डॉ. राकेश कुमार तरुण को पत्नी और दोनों बच्चों के लिए कुल 90 लाख रुपये की राशि देने का आदेश दिया है। इसमें पत्नी के लिए 40 लाख रुपये स्थायी गुजारा भत्ता और बेटे-बेटी के नाम 25-25 लाख रुपये की एफडी कराने का निर्देश दिया गया है।
जस्टिस एसएन प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने डॉ. राकेश कुमार तरुण की प्रथम अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 19 फरवरी 2025 के फैसले को निरस्त करते हुए विवाह-विच्छेद को मंजूरी दी है। हालांकि तलाक का आदेश तय राशि के भुगतान के अधीन रहेगा।
पहले साथ रहने की जताई थी इच्छा
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पति और पत्नी दोनों ने शुरुआत में साथ रहने की इच्छा जताई थी। इसके बाद अदालत ने मामले को झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के पास मध्यस्थता के लिए भेजा। हालांकि मध्यस्थता के जरिए विवाद का समाधान नहीं हो सका।
इसके बाद 5 मई 2026 को पति की ओर से पत्नी को एकमुश्त 40 लाख रुपये देने के साथ दोनों बच्चों की शिक्षा और बेटी की शादी का खर्च उठाने की पेशकश की गई। पत्नी ने इस प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना।इसके बाद हाईकोर्ट ने स्थायी गुजारा भत्ता तय करने के लिए दोनों पक्षों से उनकी आय, संपत्ति और आर्थिक स्थिति का ब्योरा देने वाले हलफनामे मांगे।
पति की आय 1.61 लाख, हाथ में आते हैं 33 हजार
सुनवाई के दौरान पति की ओर से बताया गया कि वह गढ़वा सदर अस्पताल में संविदा चिकित्सक के रूप में कार्यरत हैं। उनका सकल मासिक वेतन 1,61,260 रुपये है। हालांकि विभिन्न ऋणों की कटौती के बाद उन्हें करीब 33,008 रुपये ही हाथ में मिलने की बात अदालत के सामने रखी गई।वहीं पत्नी की ओर से बताया गया कि उनकी कोई स्वतंत्र आय नहीं है और दोनों बच्चे पूरी तरह पति पर निर्भर हैं।
गुजारा भत्ता तय करने का कोई तय फार्मूला नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि स्थायी गुजारा भत्ता तय करने के लिए कोई निश्चित गणितीय फार्मूला नहीं हो सकता। इसके लिए पति-पत्नी की आय, संपत्ति, जरूरत, आर्थिक क्षमता, बच्चों की जिम्मेदारी और उनके जीवन स्तर सहित कई परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है।अदालत ने पत्नी की स्वतंत्र आय नहीं होने और दोनों बच्चों की शिक्षा एवं भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुल 90 लाख रुपये की राशि तय की।
12 महीने में चार किस्तों में देना होगा पैसा
हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार तय 90 लाख रुपये की राशि का भुगतान 12 महीने के भीतर चार बराबर किस्तों में करना होगा। पहली किस्त अदालत के आदेश की तारीख से एक महीने के भीतर देनी होगी।वहीं दोनों बच्चों के नाम राष्ट्रीयकृत बैंक में 25-25 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट कराने का निर्देश दिया गया है।
इस तरह पत्नी के लिए 40 लाख और दोनों बच्चों के लिए 50 लाख रुपये मिलाकर कुल राशि 90 लाख रुपये होगी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के उत्तराधिकार संबंधी अधिकार इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। यदि तय राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो पत्नी कानून के अनुसार अदालत की शरण ले सकती है।
फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दी थी तलाक की याचिका
डॉ. राकेश कुमार तरुण ने गढ़वा फैमिली कोर्ट के 19 फरवरी 2025 के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वह पत्नी के खिलाफ लगाए गए क्रूरता के आरोप को साबित नहीं कर सके।
अब हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए विवाह-विच्छेद को मंजूरी दे दी है। हालांकि तलाक प्रभावी होने की प्रक्रिया को तय गुजारा भत्ता और बच्चों के लिए निर्धारित राशि के भुगतान से जोड़ दिया गया है।
झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: डॉक्टर को पत्नी-बच्चों के लिए देने होंगे 90 लाख रुपये











