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सेटिंगबाज अभय ने गजब कर डाला! साली, साला, भैया-भाभी समेत 10 रिश्तेदारों को बना डाला अफसर, CID कर रही खानदानी अफसरों की जांच

रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा धांधली की जांच के बीच गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज तिवारी के अजब गजब कारनामे सामने आ रहे हैं। छात्रों की ओर से जारी किए गए एक पोस्टर में अभय तिवारी के कई रिश्तेदारों के नाम सामने आए हैं, जिनके बारे में दावा किया गया है कि वे अलग-अलग सरकारी पदों पर चयनित हुए हैं। अब CID इन दावों का सत्यापन कर रही है कि इन सभी अभ्यर्थियों का चयन सामान्य प्रक्रिया के तहत हुआ या इसके पीछे किसी तरह की सेटिंग थी।

अभय तिवारी को जेपीएससी मेधा घोटाले में अहम कड़ी माना जा रहा है। वह जेपीएससी की परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत था और वर्तमान में CID की कार्रवाई के दायरे में है।

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साला-साली से लेकर भाई-भाभी तक के नाम

छात्रों के पोस्टर में अभय तिवारी के रिश्तेदारों की लंबी सूची दिखाई गई है। दावा किया गया है कि इनमें उसके साला, साली, भाई, भाभी और अन्य रिश्तेदार शामिल हैं, जिनका चयन सरकारी सेवाओं में हुआ है।
पोस्टर के मुताबिक, अभय तिवारी और उसके करीब आधा दर्जन रिश्तेदार JSSC CGL परीक्षा में सफल हुए और वर्तमान में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) के पद पर कार्यरत हैं। अभय तिवारी के बारे में यह भी दावा किया गया है कि उसने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा पास की थी।वहीं, उसकी भाई की पत्नी सुषमा कुमारी के चयन का भी उल्लेख किया गया है, जो वर्तमान में निगरानी विभाग में कार्यरत बताई गई हैं।

रिश्तेदारों की सफलता पर उठे सवाल

छात्रों की ओर से जारी पोस्टर में जिन नामों का उल्लेख किया गया है, उनमें अभय तिवारी का साला, भाई, भाभी और साली के अलावा ममेरा भाई उपेंद्र मिश्रा, चाचा के साढ़ू का बेटा तेजनारायण पंडित, मौसा के भाई का बेटा बापी कुमार मिश्रा, साला का मौसेरा भाई विक्रम पांडेय और बहनोई का भतीजा सुमित कुमार तिवारी शामिल हैं।पोस्टर में इन लोगों के BSO पद पर चयन और कुछ के रैंक का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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CID कर रही दावों का सत्यापन

मामले की जांच कर रही CID अब यह पता लगाने में जुटी है कि पोस्टर में किए गए दावे कितने सही हैं। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि संबंधित अभ्यर्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाएं अपनी योग्यता और मेरिट के आधार पर पास की थीं या परीक्षा में किसी तरह की अनियमितता या सेटिंग का फायदा मिला था।

इसके लिए CID संबंधित परीक्षाओं के रिकॉर्ड, चयन प्रक्रिया और अभ्यर्थियों के आपसी संबंधों से जुड़े तथ्यों की जांच कर सकती है। फिलहाल किसी भी रिश्तेदार के खिलाफ केवल पोस्टर में लगाए गए आरोपों के आधार पर दोष साबित नहीं हुआ है।

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सरकारी नौकरी की ‘सेटिंग’ और होटल कनेक्शन भी जांच के घेरे में

जांच में यह भी सामने आया है कि अभय तिवारी पर सरकारी नौकरियों में कथित सेटिंग के जरिए आर्थिक लाभ अर्जित करने के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। उसके ठिकानों से CID को कुछ दस्तावेज और अन्य सामग्री मिलने की बात सामने आई है।

यह भी बताया गया है कि अभय तिवारी ने सरकारी नौकरियों में कथित सेटिंग से जुड़ी गतिविधियों के जरिए एक होटल को लीज पर लिया था। CID इस पूरे आर्थिक नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

अब असली सवाल—मेरिट या सेटिंग?

अभय तिवारी के मामले में छात्रों की ओर से सामने आया पोस्टर जांच एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। एक ही परिवार और विस्तृत रिश्तेदारी से कई लोगों के सरकारी सेवाओं में चयन का दावा सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि यह महज संयोग था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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