शराब की एक बूंद नहीं, फिर भी लिवर में जमा हो रहा फैट! कहीं आप तो नहीं कर रहे ये गलती? आपकी ये 5 आदतें भी बढ़ा रही हैं खतरा
शराब न पीने वालों को भी हो सकता है फैटी लिवर। जानें गलत खान-पान, मीठे पेय, कम एक्सरसाइज और खराब लाइफस्टाइल से कैसे बढ़ सकता है लिवर में फैट जमा होने का खतरा।

Fatty Liver : आज के दौर में फैटी लीवर की समस्या आम है। हालांकि सामान्यत: जब भी लिवर की बीमारी की बात होती है, तो अक्सर शराब को इसकी सबसे बड़ी वजह मान लिया जाता है। लेकिन हकीकत यह है कि बिना शराब का सेवन किए भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। बदलती जीवनशैली, खान-पान की गलत आदतें, बढ़ता वजन और शारीरिक मेहनत की कमी इसके जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
फैटी लिवर की शुरुआत अक्सर बिना किसी खास लक्षण के होती है। यही वजह है कि कई लोगों को इसके बारे में तब पता चलता है, जब जांच के दौरान लिवर में फैट जमा होने की बात सामने आती है। ऐसे में रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।
क्या है फैटी लिवर की समस्या?
जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है, तो इस स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। इसके कई कारण हो सकते हैं और शराब इसका एकमात्र कारण नहीं है।खासकर ज्यादा वजन, डायबिटीज, मेटाबॉलिक समस्याएं और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी स्थितियां भी फैटी लिवर के जोखिम से जुड़ी हो सकती हैं। शुरुआती अवस्था में यह समस्या कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के रहती है।
फास्ट फूड और तला-भुना खाना बढ़ा सकता है जोखिम
आज की व्यस्त दिनचर्या में घर के खाने की जगह बाहर का खाना और फास्ट फूड तेजी से बढ़ा है। पिज्जा, बर्गर, फ्राइड फूड और दूसरी ज्यादा कैलोरी वाली चीजों का लगातार सेवन वजन बढ़ाने के साथ शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने की वजह बन सकता है।अगर डाइट में लगातार ज्यादा कैलोरी, चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट शामिल रहें और शारीरिक गतिविधि कम हो, तो फैटी लिवर का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए भोजन में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को जगह देना जरूरी है।
सिर्फ कोल्ड ड्रिंक ही नहीं, मीठे पैक्ड ड्रिंक से भी सावधान
कई लोग खाना कम करने के बावजूद दिनभर में कई तरह के मीठे पेय लेते रहते हैं। कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक और ज्यादा चीनी वाले पैक्ड जूस के जरिए शरीर में अतिरिक्त शुगर और कैलोरी पहुंच सकती है।इनका नियमित सेवन वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है। इसलिए प्यास बुझाने के लिए पानी को प्राथमिकता देना और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर माना जाता है।
घंटों कुर्सी पर बैठे रहना भी बन सकता है वजह
वर्क फ्रॉम होम और लंबे समय तक डेस्क पर काम करने के कारण लोगों की शारीरिक गतिविधि पहले की तुलना में कम हुई है। दिनभर बैठे रहना और एक्सरसाइज के लिए समय न निकालना वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य बिगड़ने का कारण बन सकता है।लिवर को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना चलना, एक्सरसाइज करना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि दिनचर्या में शामिल की जा सकती है।
नींद पूरी न होना और तनाव भी डाल सकता है असर
लिवर की सेहत को सिर्फ खान-पान से जोड़कर देखना सही नहीं है। नींद की कमी और लगातार तनाव भी शरीर के मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।इसलिए पर्याप्त नींद लेना, नियमित दिनचर्या बनाए रखना और तनाव कम करने के लिए स्वस्थ गतिविधियों को अपनाना भी जरूरी है।
खुद से दवा लेना पड़ सकता है भारी
लिवर शरीर में दवाओं और कई दूसरे पदार्थों को प्रोसेस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में बिना जरूरत या डॉक्टर की सलाह के दवाओं और सप्लीमेंट्स का सेवन करना सही नहीं है।
खासकर लंबे समय तक किसी दवा या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में खुद से इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ की राय लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
• रोज के खाने में पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।
• फास्ट फूड और ज्यादा तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।
• ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थों से दूरी बनाएं।
• रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार शारीरिक गतिविधि करें।
• लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें।
• पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें।
• तनाव कम करने के लिए स्वस्थ दिनचर्या अपनाएं।
• बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या सप्लीमेंट न लें।
• अगर वजन अधिक है या डायबिटीज जैसी समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
फैटी लिवर की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। शुरुआत में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं हो सकते हैं, इसलिए जोखिम वाले लोगों के लिए समय-समय पर स्वास्थ्य जांच उपयोगी हो सकती है। किसी भी असामान्य रिपोर्ट या लक्षण की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।












