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Jitiya Vrat 2026: नहाय-खाय में क्या बनाएं और क्या खाएं? इन चीजों के बिना अधूरी मानी जाती है थाली, जानिये किन चीजों से करना चाहिये परहेज

Jitiya Vrat 2026: 2 अक्टूबर को नहाय-खाय में क्या बनाएं और क्या खाएं? जानें मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग, तोरई, चना दाल समेत पारंपरिक भोजन और किन चीजों से बचना चाहिए।

Jitiya Vrat 2026: जितिया व्रत की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। आज नहाय खाय है। संतान की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाने वाला यह व्रत तीन दिनों तक चलता है। इस दौरान पहले दिन सात्विक भोजन किया जाता है, दूसरे दिन निर्जला उपवास रखा जाता है और तीसरे दिन पारण के साथ व्रत पूरा होता है।

साल 2026 में 2 अक्टूबर को नहाय-खाय और 3 अक्टूबर को मुख्य जितिया व्रत रखा जाएगा। ऐसे में अगर आप भी जितिया व्रत की तैयारी कर रही हैं तो सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि नहाय-खाय के दिन आखिर थाली में क्या बनाया जाए और किन चीजों से परहेज किया जाए।

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नहाय-खाय में क्या बनाएं?

जितिया के नहाय-खाय में कई जगहों पर स्थानीय परंपरा के अनुसार खास व्यंजन बनाए जाते हैं। बिहार, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों में इसकी अलग-अलग परंपराएं देखने को मिलती हैं।

मड़ुआ की रोटी

नहाय-खाय की थाली में मड़ुआ की रोटी कई घरों में खास तौर पर बनाई जाती है। मड़ुआ यानी रागी को पौष्टिक अनाज माना जाता है। इससे बनी रोटी पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद कर सकती है और व्रत से पहले इसे भोजन का हिस्सा बनाया जाता है।

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नोनी का साग

नोनी का साग भी कई इलाकों में जितिया के नहाय-खाय से जुड़ा पारंपरिक भोजन है। हरी सब्जियों को पौष्टिक आहार का हिस्सा माना जाता है और स्थानीय परंपरा के अनुसार इसे नहाय-खाय की थाली में शामिल किया जाता है।

तोरई की सब्जी

अगर आप नहाय-खाय में हल्की सब्जी बनाना चाहती हैं तो तोरई की सब्जी एक विकल्प हो सकती है। इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है और यह अपेक्षाकृत हल्की सब्जी मानी जाती है।

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चना दाल और अरवा चावल

कई परिवारों में चना दाल और अरवा चावल भी नहाय-खाय के भोजन का हिस्सा होते हैं। चना दाल प्रोटीन देती है, जबकि चावल कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है। व्रत से पहले संतुलित भोजन के तौर पर इसे शामिल किया जाता है।

कुछ इलाकों में मछली खाने की भी परंपरा

बिहार और झारखंड के कुछ क्षेत्रों में नहाय-खाय के दिन मछली खाने की परंपरा भी मिलती है। हालांकि यह सभी परिवारों में नहीं होता। कई घरों में इस दिन पूरी तरह शाकाहारी भोजन किया जाता है। इसलिए इस मामले में अपने परिवार और क्षेत्र की परंपरा का पालन करना बेहतर है।

नहाय-खाय में क्या नहीं खाना चाहिए?

नहाय-खाय सिर्फ पसंद का खाना बनाने का दिन नहीं है, बल्कि इसके साथ कई पारंपरिक नियम भी जुड़े हैं।

प्याज-लहसुन से परहेज
कई परिवारों में नहाय-खाय के भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सात्विक भोजन करने की परंपरा है।

साधारण नमक की जगह सेंधा नमक
कुछ परंपराओं में नहाय-खाय के भोजन में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार इसमें अंतर हो सकता है।

बहुत ज्यादा तला-भुना खाना न खाएं
अगले दिन निर्जला व्रत रखा जाना है, इसलिए नहाय-खाय में जरूरत से ज्यादा तला-भुना या बहुत भारी भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है। हल्का और संतुलित भोजन करने से शरीर को अगले दिन के उपवास के लिए तैयार करने में मदद मिल सकती है।

नहाय-खाय की थाली में क्या रखें?
अगर आप पहली बार जितिया व्रत रख रही हैं तो नहाय-खाय की थाली को बहुत ज्यादा भारी बनाने के बजाय अपनी पारंपरिक थाली के अनुसार संतुलित रख सकती हैं। मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग, तोरई की सब्जी, चना दाल और अरवा चावल जैसे व्यंजन कई क्षेत्रों में बनाए जाते हैं।

हालांकि जितिया के खान-पान की परंपरा हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसी नहीं होती। इसलिए पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं अपने घर की बुजुर्ग महिलाओं से स्थानीय परंपरा जरूर जान लें।

ध्यान रखें: अगले दिन निर्जला व्रत रखना कठिन हो सकता है। किसी स्वास्थ्य समस्या, गर्भावस्था, डायबिटीज या अन्य चिकित्सकीय स्थिति में कठोर उपवास रखने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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