झारखंड के स्कूलों में 1 लाख की सैलरी पर नियुक्त होंगे स्पेशलिस्ट, जानें क्या होगी जिम्मेदारी, 21 अक्टूबर तक तक करना होगा आवेदन
झारखंड के CM School of Excellence में 1 लाख रुपये मासिक वेतन पर दो विशेषज्ञ नियुक्त होंगे। जानें डिजिटल एजुकेशन, निगरानी और मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभालने वाले इन पदों की पूरी जानकारी।

रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ी कवायद शुरू होने वाली है। राज्य सरकार ने इसे लेकर नये प्रयोग शुरू किये हैं। इस कड़ी में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के संचालन को और बेहतर बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसके लिए राज्य स्तर पर दो ऐसे विशेषज्ञों की नियुक्ति की जा रही है, जिन्हें हर महीने 1-1 लाख रुपये का वेतन दिया जाएगा।
खास बात यह है कि इन विशेषज्ञों की भूमिका सिर्फ किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं होगी, बल्कि राज्य में आदर्श विद्यालय योजना के तहत संचालित स्कूलों के कामकाज को बेहतर बनाने में भी इनकी अहम भूमिका रहेगी।लेकिन सवाल यह है कि आखिर ये दो विशेषज्ञ होंगे कौन और स्कूलों में ऐसा क्या काम करेंगे, जिसके लिए उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है?
दो विशेषज्ञ, दो अलग जिम्मेदारियां
झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दोनों पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें से एक विशेषज्ञ की जिम्मेदारी डिजिटल एजुकेशन से जुड़ी होगी, जबकि दूसरे विशेषज्ञ को निगरानी, मूल्यांकन और ज्ञान प्रबंधन का काम सौंपा जाएगा।दोनों विशेषज्ञ अनुबंध के आधार पर नियुक्त होंगे। नियुक्ति की अवधि तीन वर्ष होगी। हालांकि, आवश्यकता और प्रदर्शन के आधार पर इस अवधि को आगे बढ़ाया भी जा सकता है।परिषद ने दोनों पदों के लिए 21 अक्टूबर तक आवेदन मांगे हैं।
स्कूलों की तस्वीर बदलने में होगी भूमिका
इन विशेषज्ञों को केवल सलाह देने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनका काम सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस और आदर्श विद्यालय योजना के तहत संचालित स्कूलों के बेहतर संचालन के लिए योजनाएं तैयार करने और उनके समय पर क्रियान्वयन में सहयोग करना होगा।इन स्कूलों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए विशेषज्ञ प्रोफेशनल स्तर पर काम करेंगे। स्कूलों में तैयार की गई योजनाओं का धरातल पर कितना असर हो रहा है, इसकी निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी का हिस्सा होगी।
शिक्षक और स्कूल के प्रदर्शन पर भी रहेगी नजर
इन विशेषज्ञों की एक अहम जिम्मेदारी स्कूल और शिक्षकों के प्रदर्शन की निगरानी के लिए प्रभावी सिस्टम तैयार करना होगी। योजना के निर्धारित लक्ष्यों और परिणामों के मुकाबले स्कूल और शिक्षक किस तरह प्रदर्शन कर रहे हैं, इसे मापने के लिए व्यवस्था विकसित की जाएगी।इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी विशेषज्ञों के कार्यक्षेत्र में होगा कि तैयार किए गए सिस्टम का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं।
बनाए जाएंगे खास मॉनिटरिंग टूल्स
आदर्श विद्यालय योजना और स्कूल ऑफ एक्सीलेंस मैनेजमेंट के लिए विशेष मॉनिटरिंग टूल्स तैयार किए जाएंगे। इनके जरिए स्कूलों की प्रगति, उपलब्धियों और कमियों का आकलन करने में मदद मिलेगी।योजना से जुड़े अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स की क्षमता बढ़ाने के लिए भी विशेषज्ञ प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से जुड़ी योजनाएं तैयार करेंगे।
पहले से काम कर रहे स्कूल मैनेजर
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के बेहतर संचालन के लिए राज्य में स्कूल मैनेजरों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। अब विशेषज्ञों की नियुक्ति के जरिए इन स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता और प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल झारखंड में 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस संचालित हैं। वहीं राज्य सरकार के कैबिनेट ने हाल ही में 100 और स्कूलों को सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी है।
100 नए स्कूलों को लेकर भी तैयारी
नए मंजूर किए गए 100 स्कूलों को लेकर भी आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इन स्कूलों को CBSE से संबद्धता दिलाने के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।ऐसे में आने वाले समय में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का दायरा और बढ़ने वाला है। इसी के साथ स्कूलों की गुणवत्ता, निगरानी और डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
फिलहाल राज्य शिक्षा परियोजना परिषद ने दोनों विशेषज्ञ पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। अब देखना होगा कि इन पदों पर नियुक्त होने वाले विशेषज्ञ झारखंड के स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता को किस तरह नई दिशा देते हैं।












