JSSC CGL पेपर लीक: ससुर के खाते में 14 लाख, साले को मिले 5 लाख; CID ने कोर्ट में खोली लेन-देन की परत
JSSC CGL पेपर लीक मामले में CID ने कोर्ट में 19 लाख रुपये के कथित लेन-देन का खुलासा किया। आरोपी के ससुर के खाते में 14 लाख और साले के खाते में 5 लाख ट्रांसफर का दावा।

रांची। झारखंड JSSC CGL-2023 पेपर लीक मामले की जांच में पैसों के लेन-देन को लेकर CID ने अदालत के सामने अहम जानकारी रखी है। मुख्य आरोपियों में शामिल धनबाद निवासी दीपक कुमार की जमानत याचिका का विरोध करते हुए जांच एजेंसी ने दावा किया कि परीक्षा में कथित सेटिंग के बाद उसके पारिवारिक सदस्यों के बैंक खातों में कुल 19 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
CID के मुताबिक, इस रकम में 14 लाख रुपये आरोपी दीपक के ससुर सुरेश राय के खाते में, जबकि 5 लाख रुपये उसके साले उमेश कुमार राय के खाते में ट्रांसफर हुए। जांच एजेंसी ने इस लेन-देन को परीक्षा में कथित धांधली से जोड़ते हुए अदालत में इसका उल्लेख किया है।
ससुर के खाते में 14 लाख, साले के खाते में 5 लाख
CID की जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा में चयन के बाद 22 जनवरी 2026 को दीपक के ससुर सुरेश राय के बैंक खाते में 14 लाख रुपये और उसके साले उमेश राय के खाते में 5 लाख रुपये भेजे गए।जांच एजेंसी का दावा है कि यह रकम परीक्षा में कथित सेटिंग कराने वाले सिंडिकेट से मिली राशि का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, इन लेन-देन का अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत में मामले की आगे की सुनवाई और जांच के आधार पर तय होगा।
साला भी गिरफ्तार, बोकारो के दुग्धा से जुड़ा कनेक्शन
CID ने इस मामले में दीपक कुमार के अलावा उसके साले उमेश कुमार राय और दो अन्य सफल अभ्यर्थियों आनंद कुमार सिंह एवं विजय कुमार तिवारी को भी 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था।जांच के अनुसार उमेश कुमार राय मूल रूप से भोजपुर, बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में बोकारो के दुग्धा स्थित BCCL कॉलोनी में रहता था। CID का आरोप है कि इसी ठिकाने पर परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को जुटाया गया और कथित तौर पर प्रश्न-उत्तर याद करवाए गए।
मोबाइल CDR से भी कई अभ्यर्थियों से संपर्क का दावा
CID ने कोर्ट को बताया कि दीपक कुमार के मोबाइल CDR के विश्लेषण में उसके कई अभ्यर्थियों के संपर्क में रहने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी के अनुसार, वह परीक्षा केंद्र तक अभ्यर्थियों को पहुंचाने वाले वाहनों की व्यवस्था से भी जुड़ा था।CID का दावा है कि इससे परीक्षा में कथित संगठित तरीके से सेटिंग किए जाने की तस्वीर सामने आती है।
परीक्षा एजेंसी से भी जुड़ा जांच का तार
मामले की जांच में परीक्षा संचालन एजेंसी ICN के संचालक मिथिलेश सिंह का नाम भी सामने आया है। CID के अनुसार, प्रश्नपत्र लीक कराने में उसके कर्मचारियों और रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।केस डायरी में शिकायतकर्ता और कोचिंग संचालक राजेश प्रसाद के बयान का भी उल्लेख किया गया है। उनके अनुसार, धनबाद के बलियापुर स्थित परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से पहले ही मोबाइल के जरिए प्रश्नपत्र उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई थी।
जमानत का CID ने किया विरोध
मुख्य आरोपी दीपक कुमार की जमानत याचिका का CID ने कड़ा विरोध किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट में वित्तीय लेन-देन, मोबाइल CDR और कथित परीक्षा सेटिंग से जुड़े अन्य साक्ष्यों का हवाला दिया।
फिलहाल जांच एजेंसी पेपर लीक से जुड़े पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही के बाद आरोपों और जांच की दिशा को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।












