शिक्षकों पर झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: 15 शिक्षकों के तबादले का हाईकोर्ट ने दिया डीसी को पावर, शिक्षक नियुक्ति मामले में नागेंद्र नाथ परिहार को राहत नहीं

Ranchi News: झारखंड हाई कोर्ट में शिक्षकों से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों में सुनवाई हुई। एक मामले में हाई कोर्ट की खंडपीठ ने शिक्षक नियुक्ति से संबंधित नागेंद्र नाथ परिहार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। वहीं, दूसरे मामले में लोहरदगा के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर अदालत ने उपायुक्त को नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
लोहरदगा के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण पर उपायुक्त लेंगे फैसला
दूसरे मामले में झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने लोहरदगा के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। इन शिक्षकों को अतिरिक्त घोषित करते हुए दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया गया था।
सुनवाई के बाद अदालत ने लोहरदगा के उपायुक्त को शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानकर कानून और लागू नियमों के अनुसार उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक अभ्यावेदन पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, बशर्ते वह आदेश अब तक लागू नहीं हुआ हो।
जुलाई 2023 में जारी हुआ था स्थानांतरण आदेश
शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने पक्ष रखते हुए बताया कि जिला शिक्षा अधीक्षक ने 27 जुलाई 2023 को पत्र जारी कर 15 शिक्षकों को अलग-अलग स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक घोषित करते हुए स्थानांतरण का आदेश दिया था।
याचिका में कहा गया कि करीब तीन साल बीतने के बावजूद आदेश लागू नहीं हुआ है। शिक्षकों ने अदालत से इस आदेश को रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही सरकारी शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन की प्रक्रिया में निजी व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए।
शिक्षकों को अभ्यावेदन देने का मिला विकल्प
सुनवाई के दौरान शिक्षकों के अधिवक्ता ने कहा कि स्थानांतरण आदेश अब तक लागू नहीं हुआ है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को उनकी याचिका को अभ्यावेदन मानकर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया जा सकता है।राज्य सरकार की ओर से भी कहा गया कि शिक्षक संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। इसके बाद अदालत ने उपायुक्त को मामले में उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।
इस आदेश से लोहरदगा के 15 शिक्षकों के स्थानांतरण मामले में आगे की कार्रवाई उपायुक्त के निर्णय पर निर्भर करेगी। वहीं, नागेंद्र नाथ परिहार की पुनर्विचार याचिका खारिज होने से उनकी नियुक्ति संबंधी कानूनी चुनौती को राहत नहीं मिली है।
शिक्षक नियुक्ति मामले में पुनर्विचार याचिका खारिज
झारखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ ने शिक्षक नियुक्ति से जुड़े मामले में नागेंद्र नाथ परिहार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि याचिका 14 महीने की देरी से दाखिल की गई थी। इससे पहले भी याचिकाकर्ता को विभिन्न न्यायिक स्तरों पर राहत नहीं मिली थी।
मामले के अनुसार, याचिकाकर्ता ने हाई स्कूलों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए बीसी-2 श्रेणी के तहत आवेदन किया था। हालांकि, राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट में बीसी-1 और बीसी-2 श्रेणियों के अंतिम चयनित अभ्यर्थियों की तुलना में उसके अंक कम थे। इसी आधार पर उसका चयन नहीं हो सका।
एकल पीठ से सुप्रीम कोर्ट तक नहीं मिली राहत
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने एकल पीठ के समक्ष दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट के 2 अगस्त 2022 के आदेश और सत्यजीत कुमार मामले में निर्धारित निर्देशों के अनुसार याचिकाकर्ता की उम्मीदवारी पर राज्यस्तरीय मेरिट लिस्ट के आधार पर विचार किया गया था।आयोग की दलीलों के आधार पर हाई कोर्ट की एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद नागेंद्र नाथ परिहार ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।
खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई के बाद एकल पीठ के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अंततः उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की, जिसे अब खारिज कर दिया गया है।
सवाल 1: झारखंड हाई कोर्ट ने नागेंद्र नाथ परिहार की याचिका क्यों खारिज की?
जवाब: पुनर्विचार याचिका 14 महीने की देरी से दाखिल की गई थी। अदालत ने पहले के आदेश में हस्तक्षेप करने का आधार नहीं पाया।
सवाल 2: लोहरदगा के 15 शिक्षकों के मामले में हाई कोर्ट ने क्या निर्देश दिया?
जवाब: अदालत ने उपायुक्त को शिक्षकों की याचिका को संयुक्त अभ्यावेदन मानकर कानून और लागू नियमों के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया।
सवाल 3: क्या 15 शिक्षकों का स्थानांतरण आदेश अभी लागू होगा?
जवाब: अदालत के निर्देश के अनुसार, अभ्यावेदन पर निर्णय होने तक वर्ष 2023 का स्थानांतरण आदेश लागू नहीं किया जाएगा, यदि वह अब तक लागू नहीं हुआ है।












