10 साल पहले घर के सामने कल्लू घोष को गोलियों से भून डाला था: झारखंड हाई कोर्ट ने चार सगे भाइयों की उम्रकैद की सजा रखी बरकरार, 2018 में सुनायी गयी थी सजा
झारखंड हाई कोर्ट ने कल्लु घोष हत्याकांड में चार सगे भाइयों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। अदालत ने दोषियों की अपील खारिज कर दी।

High Court News: 10 साल पहले घर के सामने हुए कल्लू घोष मर्डर केस में हाईकोर्ट से भी दोषी भाईयों को राहत नहीं मिली है। झारखंड हाई कोर्ट ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के चर्चित कल्लु घोष हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए चार सगे भाइयों की उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी है। अदालत ने मामले में पेश गवाहों के बयानों और चिकित्सकीय साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए दोषसिद्धि में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने की।
साल 2016: योग करने के दौरान कल्लु घोष पर हुआ था हमला
मामला 18 मई 2016 का है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उस दिन सुबह कल्लु घोष अपने घर के पास पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर बैठकर योग कर रहे थे। इसी दौरान वहां गोलीबारी शुरू हो गई।गोली की आवाज सुनकर उनके भाई मुन्ना घोष और उनकी पत्नी जूली घोष बाहर निकले।
उन्होंने देखा कि कल्लु घोष जान बचाकर भाग रहे थे और होलिया मुखी उन पर गोलियां चला रहा था। आरोप था कि होलिया के साथ उसके भाई ज्योति मुखी, खून मुखी और टीका मुखी भी हथियार लेकर उनका पीछा कर रहे थे। खुजली गणेश उर्फ गणेश घोष की संलिप्तता का आरोप भी लगाया गया था।
अभियोजन के मुताबिक, हमलावरों ने कल्लु घोष को प्रेमवती देवी के घर के पास गिरा दिया और उनके साथ मारपीट की। आरोपियों ने पिस्तौल के पिछले हिस्से से भी उन पर हमला किया। इसके बाद हवा में गोलियां चलाते हुए और लोगों को धमकाते हुए वे मौके से फरार हो गए।
अस्पताल पहुंचने से पहले बताई थी हमले की बात
घटना के बाद परिजन और उनके भतीजे अनिमेश घोष तथा अंजन घोष घायल कल्लु घोष को इलाज के लिए टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) ले गए। अभियोजन के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले कल्लु घोष ने अपने भतीजों और पारस मुखी को बताया था कि होलिया मुखी ने उन्हें पीछे से गोली मारी है और अन्य आरोपियों ने भी उनके साथ मारपीट की है।इलाज के दौरान उसी दिन दोपहर करीब 2:30 बजे उनकी मौत हो गई।
पुरानी रंजिश को माना गया हत्या की वजह
मामले की जांच में कल्लु घोष और आरोपियों के बीच पुरानी दुश्मनी की बात सामने आई थी। बताया गया कि 26 सितंबर 2015 को भी कल्लु घोष पर तलवार से हमला किया गया था। इस संबंध में उनकी पत्नी ने बिष्टुपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। अभियोजन पक्ष ने इसी पुराने विवाद को हत्या की वजह बताया।
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से तीन खाली कारतूस और एक अन्य स्थान से एक खाली कारतूस बरामद किया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर गोली लगने के कई निशान पाए गए थे। इसके अलावा, मृतक के शरीर से दो गोलियां भी बरामद हुई थीं।
बचाव पक्ष की दलीलें हाई कोर्ट ने नहीं मानीं
हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि घटना का कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और आरोपियों के पास से हथियार भी बरामद नहीं हुए थे। हालांकि, अदालत ने गवाहों के बयानों और डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट को विश्वसनीय माना।
अदालत ने मामले में आरोपियों की सामूहिक भूमिका और हमले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए अभियोजन के साक्ष्यों को पर्याप्त पाया। अदालत के निष्कर्ष के अनुसार, जब आरोपियों ने साझा योजना के तहत हमला किया था, तब केवल इस आधार पर दोषसिद्धि को खारिज नहीं किया जा सकता कि यह निश्चित रूप से साबित नहीं हुआ कि किस आरोपी की गोली से कल्लु घोष की मौत हुई।
वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद
इस मामले में निचली अदालत ने वर्ष 2018 में चारों सगे भाइयों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोषियों ने इस फैसले को चुनौती देते हुए झारखंड हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।अब हाई कोर्ट ने अपील खारिज कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। इस फैसले के साथ कल्लु घोष हत्याकांड में चारों भाइयों की उम्रकैद की सजा कायम रही है।












