झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: संविदा महिला कर्मचारियों की सेवा होगी नियमित, 6 सप्ताह में आदेश जारी करने का निर्देश, 10 साल से संविदा पर काम कर रही…
झारखंड हाईकोर्ट ने संविदा महिला कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया। 6 सप्ताह में नियमितीकरण और बकाया मानदेय भुगतान के निर्देश।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने लंबे समय से संविदा पर काम कर रहीं महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने महिला कर्मचारी के नियमितिकरण का आदेश दिया है। 10 साल से ये महिला कर्मचारी संविदा पर काम कर रही थी। रांची यूनिवर्सिटी और डोरंडा कॉलेज को निर्देश दिया है कि प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी की सेवाएं नियमित की जाएं।
प्रियंका कुमारी को सहायक लाइब्रेरियन और अनुराधा कुमारी को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नियमित करने का आदेश दिया गया है।इसके लिए विश्वविद्यालय को छह सप्ताह का समय दिया गया है। इसके अलावा, प्रियंका कुमारी को जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक का बकाया मानदेय भी भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को सुनाए गए फैसले में कहा कि स्थायी प्रकृति के जरूरी कार्य लंबे समय तक संविदा कर्मचारियों से कराना और फिर उनकी सेवा नियमित करने से इनकार करना शोषणकारी रवैया है।
10 साल से अधिक समय से कर रही थीं काम
मामले के अनुसार, प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी डोरंडा कॉलेज में एक दशक से अधिक समय से कार्यरत थीं। प्रियंका कुमारी को जुलाई 2015 में ग्रेड-III के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें सहायक लाइब्रेरियन के रूप में काम करने की जिम्मेदारी दी गई।
वहीं, अनुराधा कुमारी ने अप्रैल 2013 में कॉलेज में योगदान दिया था। बाद में उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य सौंपा गया। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद नियमितीकरण नहीं होने पर दोनों कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
नियमितीकरण की सूची में नाम होने के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि रांची यूनिवर्सिटी ने संविदा कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने के लिए कॉलेजों से सूची मांगी थी। डोरंडा कॉलेज ने नवंबर 2020 और जनवरी 2021 में विश्वविद्यालय को कर्मचारियों की सूची भेजी थी। इनमें दोनों याचिकाकर्ताओं के नाम शामिल थे।
अदालत ने यह भी पाया कि विश्वविद्यालय ने 21 सितंबर 2021 को ग्रेड-III और ग्रेड-IV के अन्य कर्मचारियों की सेवाएं नियमित की थीं। इसके बावजूद प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी के मामलों में कार्रवाई नहीं की गई। इसी आधार पर नियमितीकरण से जुड़े विवाद पर अदालत ने विचार किया।
नियुक्ति पत्र को फर्जी बताने पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य ने प्रियंका कुमारी के शुरुआती नियुक्ति पत्र को फर्जी बताते हुए कहा कि कॉलेज के रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं था।
हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से दाखिल जवाब में कॉलेज द्वारा भेजे गए दस्तावेज शामिल थे। इन दस्तावेजों में दोनों कर्मचारियों के नाम और उनके योगदान की तारीख दर्ज थी। इस विरोधाभास को देखते हुए अदालत ने प्राचार्य को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।
प्राचार्य ने अदालत को बताया कि संबंधित नियुक्ति पत्र कार्यालय में नहीं मिल पाया था। इस पर हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड की जांच किए बिना महत्वपूर्ण दस्तावेज के संबंध में ऐसा दावा करने पर नाराजगी जताई।
15 हजार विद्यार्थियों वाले कॉलेज में काम को बताया जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि लाइब्रेरियन और कंप्यूटर ऑपरेटर का काम कॉलेज के नियमित संचालन के लिए जरूरी और स्थायी प्रकृति का है। डोरंडा कॉलेज में 15 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। ऐसे संस्थान में पुस्तकालय और कंप्यूटर से संबंधित कार्यों को गैरजरूरी नहीं माना जा सकता।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक जरूरी कार्य करने वाले संविदा कर्मचारियों के साथ उचित व्यवहार किया जाना चाहिए। केवल संविदा पर नियुक्त होने के आधार पर उन्हें नियमितीकरण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
6 सप्ताह में नियमितीकरण, 4 सप्ताह में देना होगा बकाया मानदेय
हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी, कुलपति, रजिस्ट्रार और डोरंडा कॉलेज को निर्देश दिया है कि प्रियंका कुमारी को सहायक लाइब्रेरियन और अनुराधा कुमारी को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर छह सप्ताह के भीतर नियमित किया जाए। नियमितीकरण के अनुरूप मिलने वाले अन्य लाभ भी दोनों कर्मचारियों को देने होंगे।
इसके अलावा, प्रियंका कुमारी को जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक का बकाया मानदेय चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया गया है। पहले किए गए भुगतान की राशि को समायोजित करने के बाद शेष बकाया जारी करना होगा।
हाईकोर्ट ने दोनों कर्मचारियों की याचिका स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि लंबे समय तक स्थायी प्रकृति का काम लेने के बाद संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे पर उचित विचार किया जाना जरूरी है। इस फैसले से दोनों महिला कर्मचारियों की सेवा नियमित होने का रास्ता साफ हो गया है।












