स्वास्थ्यकर्मी होंगे नियमित: नियमितिकरण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश, सरकार को 12 सप्ताह की मोहलत
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश दिया। सरकार को 12 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

रांची। झारखंड में स्वास्थ्य विभाग के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्षों पर संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों के नियमितिकरण का आदेश दिया है। मलेरिया टेक्निकल सुपरवाइजर (MTS) और कालाजार टेक्निकल सुपरवाइजर (KTS) के पदों पर वर्षों से काम कर रहे 11 कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश राज्य सरकार को दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए अतिरिक्त पद भी सृजित किए जाएं। सरकार को इस संबंध में 12 सप्ताह के भीतर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर आदेश जारी करने होंगे।
15 अक्टूबर 2026 को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह फैसला सुनाया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें 28 अप्रैल 2025 को कर्मचारियों के नियमितीकरण और समायोजन की मांग खारिज कर दी गई थी।
14 से 18 साल तक संविदा पर कराया काम, अब नियमित करने का आदेश
मामले के अनुसार, संबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अलग-अलग विज्ञापनों के माध्यम से हुई थी। इन कर्मचारियों को मलेरिया और कालाजार की रोकथाम से जुड़े कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।कर्मचारी वर्ष 2008 से 2012 के बीच नियुक्त हुए थे और लगातार 14 से 18 वर्षों तक संविदा पर काम करते रहे।
उनके अनुबंध हर साल बढ़ाए जाते रहे, लेकिन नियमितीकरण नहीं किया गया।हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान लंबे समय तक लगातार सेवा लिए जाने को काम की स्थायी आवश्यकता से जुड़ा महत्वपूर्ण तथ्य माना। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि संबंधित कर्मचारियों की सेवा नियमित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।
नियमित पद नहीं हैं तो बनाने होंगे अतिरिक्त पद
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि MTS और KTS के नियमित पद सृजित कर कर्मचारियों को नियमित किया जाए। यदि इसके लिए पर्याप्त पद उपलब्ध नहीं हैं, तो सरकार को अतिरिक्त यानी सुपरन्यूमेरेरी पद सृजित करने होंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नियमित MTS और KTS पद नहीं बनाए जाते हैं, तो संबंधित कर्मचारियों को मलेरिया इंस्पेक्टर के स्वीकृत और रिक्त पदों पर नियमित किया जाएगा।सरकार को अदालत के आदेश की प्रति प्राप्त होने के 12 सप्ताह के भीतर सभी संबंधित कर्मचारियों के संबंध में आवश्यक आदेश जारी करने होंगे।
MPW कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, सुपरवाइजरों को नहीं मिला लाभ
इस मामले में कर्मचारियों की ओर से यह मुद्दा उठाया गया था कि इसी कार्यक्रम के तहत काम करने वाले मल्टीपर्पज वर्कर (पुरुष), यानी MPW(M), के लिए राज्य सरकार ने 2,150 पद सृजित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
इन कर्मचारियों को नियमित वेतनमान देने का निर्णय भी लिया गया, लेकिन उनके काम की निगरानी करने वाले MTS और KTS कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए ऐसा कदम नहीं उठाया गया।
हाईकोर्ट ने इस अंतर को अनुचित माना। अदालत के अनुसार, समान कार्यक्रम के तहत काम करने वाले कर्मचारियों के साथ बिना उचित कारण अलग व्यवहार करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
पुराने आदेश और आश्वासन का भी दिया हवाला
नियमितीकरण की मांग को लेकर कर्मचारियों ने पहले भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 10 सितंबर 2018 को अदालत ने राज्य सरकार को कानून के अनुसार उनके नियमितीकरण पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।इसके बाद सरकार की अपील देरी के कारण खारिज हो गई।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने 21 फरवरी 2025 को राज्य सरकार को मामले पर गुण-दोष के आधार पर विचार करने को कहा था। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की मांग खारिज कर दी थी।हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर विचार करते हुए कहा कि सरकार के लिए पहले अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासन से पीछे हटना उचित नहीं है।
नियुक्ति की तारीख से मिलेगा वरिष्ठता और पेंशन संबंधी लाभ
अदालत ने नियमितीकरण के लाभों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। इसके तहत कर्मचारियों को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित माना जाएगा। वरिष्ठता और पेंशन संबंधी लाभों के लिए उनकी सेवा की निरंतरता बरकरार रखी जाएगी। वेतन का काल्पनिक निर्धारण भी नियुक्ति की प्रारंभिक तारीख से किया जाएगा, हालांकि वास्तविक आर्थिक लाभ फैसले की तारीख से देय होंगे।
याचिका की सुनवाई के दौरान मृत हुए कर्मचारी बिरेंद्र प्रसाद को भी उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित माना जाएगा। उनके कानूनी उत्तराधिकारी को नियमानुसार अंतिम भुगतान और अन्य पात्र लाभ दिए जाएंगे।
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।इस फैसले से वर्षों से संविदा पर काम कर रहे 11 स्वास्थ्य कर्मचारियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ हुआ है। अब राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों के अनुरूप 12 सप्ताह के भीतर आगे की कार्रवाई करनी होगी।












