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झारखंड: छात्र की परीक्षा छूटी, पुलिस पर कोर्ट का शिकंजा – 10 दिन हिरासत पर रिपोर्ट तलब, एसपी हुए कोर्ट में हाजिर

Jharkhand: Student misses exam, court cracks down on police – report summoned on 10-day detention, SP appears in court

झारखंड के चतरा जिले में मैट्रिक छात्र को कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखने के मामले में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। चतरा SP सुमित अग्रवाल कोर्ट में हाजिर हुए और केस डायरी प्रस्तुत की। अदालत ने कई गंभीर सवाल उठाते हुए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी।
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चतरा। मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कर रहे 19 वर्षीय छात्र को कथित तौर पर 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखने के आरोपों पर अदालत ने जिला पुलिस प्रशासन से जवाब तलब किया है।सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चतरा SP सुमित अग्रवाल स्वयं हाई कोर्ट में उपस्थित हुए। उनकी ओर से अदालत में केस डायरी प्रस्तुत की गई।

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सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद एवं न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ में हुई।अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए SP से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि संबंधित थाना पुलिस ने छात्र को कथित रूप से 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा? हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया?

मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई? साथ ही, छात्र की मेट्रिक परीक्षा छूट जाने के लिए कौन जिम्मेदार है?अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 27 फरवरी निर्धारित करते हुए चतरा SP को उस दिन भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

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यह मामला छात्र की मां द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार उपस्थित हुए।

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पुलिस प्रशासन को आम जनता के बीच बेहतर छवि बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने कहा कि पुलिस का कार्य नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उन्हें अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करना। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि छात्र को पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता, तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता।

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केस डायरी के अवलोकन में अदालत ने पाया कि 31 जनवरी को छात्र के संबंध में उल्लेख किया गया था, लेकिन उसके पहले या बाद में हिरासत से जुड़ी स्पष्ट जानकारी दर्ज नहीं थी। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई।

याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि रंगदारी के एक मामले में मोबाइल को संदिग्ध बताते हुए लावालोंग थाना पुलिस ने 26 जनवरी की रात छात्र को उठाया था। आरोप है कि पूछताछ के बाद भी उसे रिहा नहीं किया गया और बाद में टंडवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया।

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि हाई कोर्ट में याचिका दाखिल होने के बाद छात्र को घर भेज दिया गया, लेकिन पुलिसकर्मी घर के आसपास तैनात हैं और केस वापस लेने का दबाव बना रहे हैं।

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