रांची: बुलेट प्रूफ गाड़ी को लेकर बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, 12 बुलेट प्रूफ गाड़ियों को लेकर दर्ज करायी आपत्ति, कहा…
Ranchi: Babulal Marandi wrote a letter to the Chief Minister regarding bullet proof vehicles, lodged objection regarding 12 bullet proof vehicles, said...

झारखंड में बुलेट प्रूफ गाड़ी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर बुलेटप्रूफ गाड़ियों की खरीद और उपयोग पर सवाल उठाते हुए इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताया है।
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रांची/21.3.26। झारखंड में सरकारी खर्च को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में बुलेटप्रूफ वाहनों के उपयोग और उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस को जन्म दे दिया है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि गृह विभाग द्वारा वर्ष 2024 के अंत में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य वीआईपी मूवमेंट के लिए कुल 17 बुलेटप्रूफ फॉर्च्यूनर गाड़ियों की खरीद की गई थी। इनमें से 3 गाड़ियां मुख्यमंत्री के उपयोग के लिए, 2 राजभवन के लिए और शेष 12 गाड़ियां HQRT (हेडक्वार्टर क्विक रिस्पांस टीम) में रखी गई हैं।
मरांडी का आरोप है कि HQRT में रखी गई इन गाड़ियों का समुचित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन 12 गाड़ियों में से केवल 3-4 का ही नियमित उपयोग किया जा रहा है, जबकि बाकी वाहन लंबे समय से खड़े हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार गाड़ियों के निष्क्रिय पड़े रहने से उनकी स्थिति खराब हो सकती है, जिससे अंततः सरकारी धन का नुकसान होगा।
पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवंटित गाड़ियों की स्थिति पर भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई बुलेटप्रूफ गाड़ियां 10-12 साल पुरानी हैं और करीब 2 लाख किलोमीटर तक चल चुकी हैं। ऐसी गाड़ियां बार-बार खराब हो रही हैं, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों प्रभावित हो रहे हैं। मरांडी ने यह भी कहा कि उनकी खुद की गाड़ी भी कई बार खराब हो चुकी है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

इस मुद्दे के समाधान के लिए उन्होंने सुझाव दिया है कि जो नई बुलेटप्रूफ गाड़ियां फिलहाल उपयोग में नहीं हैं, उन्हें राज्य के शीर्ष अधिकारियों जैसे मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP), गृह सचिव और कैबिनेट सचिव को आवंटित कर दिया जाए। इससे इन वाहनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग भी नहीं होगा।









