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झारखंड: पूर्व मंत्री योगेंद्र साव फिर विवादों में, निष्कासन, ध्वस्तीकरण और जमीन विवाद से गरमाई सियासत, जानिये क्या है मामला….

Jharkhand: Former minister Yogendra Sao again in controversy, politics heated up due to expulsion, demolition and land dispute, know what is the matter....

झारखंड के पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। कांग्रेस से तीन साल के लिए बाहर किये जा चुके योगेंद्र साव के जमीन विवाद और फैक्ट्री-आवास ध्वस्तीकरण के मुद्दे ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है।
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हजारीबाग/23.3.26। पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव एक बार फिर विवादों में हैं। उनकी फैक्ट्री और आवास के ध्वस्तीकरण से जुड़ा मामला दोबारा सुर्खियों में है, जिससे राजनीति गरमाई हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आपको बता दें कि कांग्रेस ने योगेंद्र साव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है।

बताया जा रहा है कि उन्होंने बार-बार पार्टी और राज्य सरकार के खिलाफ बयानबाजी की, जिसके चलते पार्टी की अनुशासन समिति ने यह कड़ा फैसला लिया। इस कार्रवाई की पुष्टि प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान की। आपको बता दें कि यह पहला मौका नहीं है जब योगेंद्र साव विवादों में घिरे हैं।

वर्ष 2014 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन पर नक्सली संगठन संचालित करने और लेवी वसूली जैसे गंभीर आरोप लगे थे। उस समय Hemant Soren की सरकार में मंत्री रहते हुए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में पुलिस ने उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार भी किया था और उन्हें जेल जाना पड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर उनकी पत्नी को उम्मीदवार बनाया था।

अभी मौजूदा विवाद का केंद्र केरेडारी क्षेत्र में स्थित उनकी फैक्ट्री और आवास है। NTPC Limited के अधिकारियों के अनुसार, जिस जमीन पर योगेंद्र साव की चिमनी और आवास बना हुआ था, वह वन भूमि है, जिसे वर्ष 2008 में ही वन विभाग द्वारा अधिसूचित किया जा चुका था। इसके बावजूद वर्ष 2010 में उन्होंने “लक्ष्मी सेरेमिक्स एंड मिनरल्स” के नाम से फैक्ट्री स्थापित कर ली, जबकि आवास का निर्माण वर्ष 2024 में किया गया।

बताया जा रहा है कि अब इस अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई की जा रही है और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, एनटीपीसी द्वारा नियमानुसार वन भूमि के मुआवजे के तहत राज्य सरकार को भुगतान किया जा रहा है, वहीं योगेंद्र साव को भी निर्माण के एवज में करीब 1.97 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रस्तावित किया गया है।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर जहां कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है, वहीं दूसरी ओर जमीन विवाद और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने उनके खिलाफ माहौल को और भी तीखा बना दिया है। फिलहाल, योगेंद्र साव से जुड़े इन घटनाक्रमों पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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