close
LIVE UPDATE

झारखंड: जैक पर क्यों नाराज हुआ हाईकोर्ट, 25000 रुपये का लगाया जुर्माना, जानिये क्या है पूरा मामला

Jharkhand: Why Did the High Court Reprimand JAC? ₹25,000 Fine Imposed—Find Out the Full Story

झारखंड हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट लाभ मामले में जैक की अपील खारिज करते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने जैक पर तथ्य छुपाने और कोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया।
________________________________________
Jharkhand Highcourt News। झारखंड हाईकोर्ट ने रिटायरमेंट लाभ से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सख्त रुख अपनाते हुए Jharkhand Academic Council (जैक) की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने न केवल अपील खारिज की, बल्कि तथ्य छुपाने और अदालत को गुमराह करने के प्रयास के लिए जैक पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश M.S. Sonak और न्यायमूर्ति Rajesh Shankar की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जैक ने अपने ही पहले दिए गए बयान से पलटते हुए न्यायालय के आदेश को कमजोर करने की कोशिश की, जो न्यायिक ईमानदारी के सिद्धांत के खिलाफ है।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अदालत के निर्देशानुसार, यह 25 हजार रुपये की जुर्माना राशि चार सप्ताह के भीतर जमा करनी होगी और यह राशि याचिकाकर्ता राम प्रकाश साव को दी जाएगी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह के आचरण से न केवल न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि प्रार्थी को भी अनावश्यक नुकसान उठाना पड़ता है।

पूरा मामला जैक के सेवानिवृत्त कर्मचारी राम प्रकाश साव को सेवानिवृत्ति लाभ के भुगतान से जुड़ा हुआ है। याचिका की सुनवाई के दौरान जैक की ओर से पहले यह स्वीकार किया गया था कि प्रार्थी का मामला पहले के हाईकोर्ट के एक फैसले से पूरी तरह आच्छादित है। इसके बावजूद बाद में जैक ने अपने ही रुख से पलटते हुए लाभ देने से इनकार कर दिया।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जैक ने न केवल अपने पूर्व बयान से यू-टर्न लिया, बल्कि अदालत से कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को भी छिपाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, पहले इसी तरह के मामलों में खारिज हो चुके अपील आदेशों की जानकारी भी कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेश को दरकिनार करने का प्रयास माना।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायालय के समक्ष पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ तथ्य प्रस्तुत करें। इस तरह की लापरवाही या जानबूझकर तथ्य छिपाना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करता है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

ये खबर भी पढ़ें…
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *