Para Teacher News: बर्खास्त पारा शिक्षिका को हाईकोर्ट से मिल गयी बड़ी राहत, सेवा समाप्ति का आदेश किया रद्द, 3 साल बाद फिर मिली नौकरी

रांची। बर्खास्त पारा शिक्षिका को हाईकोर्ट से राहत मिल गई है। हाइकोर्ट ने शिक्षा विभाग की कार्रवाई को अवैध करार दिया है। हाईकोर्ट ने शिक्षिका पर कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ माना है। झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने हजारीबाग जिले की बरकट्ठा की एक पारा शिक्षिका को सेवा हटाए जाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में शिक्षा विभाग की कार्रवाई को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी शासकीय कर्मचारी को बिना कारण बताओ नोटिस जारी किये और पक्ष रखे बिना हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। हाई कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने से पहले उन्हें पक्ष रखने का पर्याप्त मौका दिया जाना चाहिए।
अदालत ने विभागीय आदेश को निरस्त करते हुए शिक्षिका गीता पांडे की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उनकी सेवा को तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया है। आपको बता दें कि गीता पांडेय 20 वर्षों से अधिक समय से बरकट्ठा प्रखंड में पारा शिक्षिका के रूप में कार्यरत थी। हजारीबाग के DSE ने 2 फरवरी 2023 को एक पत्र जारी कर उनकी शैक्षणिक मार्कशीट पर सवाल उठाए थे।
मार्कशीट में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए उन्हें तत्काल से सेवा मुक्त (बर्खास्त) भी कर दिया गया। यही नहीं नौकरी के दौरान प्राप्त मानदेय की वसूली का आदेश भी दिया गया। इस कार्रवाई को गीता पांडे ने झारखंड हाई कोर्ट में चुनौती दी। अदालत को बताया कि विभाग ने कार्रवाई से पूर्व ना तो उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया और ना हीं शिक्षिका को अपना पक्ष रखने का कोई मौका दिया।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से ऐसा कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया जा सका, जिसमें यह साबित हो सके की शिक्षिका को स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया था। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद हाईकोर्ट में DSE द्वारा जारी 2 फरवरी 2023 के आदेश को निरस्त कर दिया।








