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झारखंड के पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, राज्य सरकार की ACP/MACP लाभ पर अपील हुई खारिज

Jharkhand police personnel get major relief from the High Court; state government's appeal regarding ACP/MACP benefits dismissed.

रांची/16.6.26। झारखंड पुलिस के सिपाही संवर्ग के लिए अच्छी खबर है। पुलिसकर्मियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राज्य में लंबे समय से चल रहे एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (ACP) और मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACP) लाभ के विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार की लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) को खारिज कर दिया है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब पुलिस कर्मियों को 10, 20 और 30 वर्ष की सेवा पूरी होने पर मिलने वाले ACP/MACP लाभ के लिए प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पूरा करने की अनिवार्यता का सामना नहीं करना पड़ेगा। हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए गए आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की आपत्तियों को अस्वीकार कर दिया।

हजारों पुलिस कर्मियों को मिलेगा सीधा लाभ

हाईकोर्ट के इस फैसले का लाभ झारखंड पुलिस के करीब 60 से 70 हजार कर्मचारियों को मिलने की संभावना है। इनमें सिपाही, हवलदार और अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत कर्मी शामिल हैं।पुलिस कर्मियों का लंबे समय से कहना था कि ACP/MACP जैसी वित्तीय उन्नयन योजनाओं को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने के कारण हजारों कर्मचारी समय पर लाभ से वंचित हो रहे थे। इससे उनकी वेतन वृद्धि और सेवा संबंधी वित्तीय लाभ प्रभावित हो रहे थे।

सरकार की अपील को अदालत ने किया खारिज

गौरतलब है कि 16 अगस्त 2024 को झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पुलिस कर्मियों के संगठन के पक्ष में फैसला सुनाया था। अदालत ने माना था कि ACP/MACP लाभ देने के लिए प्रशिक्षण को अनिवार्य शर्त बनाना उचित नहीं है। इस आदेश से असहमत राज्य सरकार ने खंडपीठ के समक्ष लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की थी। हालांकि यह अपील निर्धारित समय सीमा के काफी बाद दाखिल की गई थी।

जानकारी के अनुसार सरकार ने लगभग 450 दिनों की देरी से अपील दाखिल की।सुनवाई के दौरान पुलिस कर्मियों के संगठन की ओर से इस देरी का कड़ा विरोध किया गया। अदालत ने भी अपील दाखिल करने में हुई असामान्य देरी को गंभीरता से लिया और इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनाया फैसला

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही एकल पीठ द्वारा दिए गए आदेश को प्रभावी बनाए रखा गया।अदालत के इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि ACP और MACP जैसे वित्तीय लाभ कर्मचारियों की सेवा अवधि के आधार पर दिए जाएंगे और इन्हें प्रशिक्षण पूरा करने जैसी अतिरिक्त शर्तों से नहीं जोड़ा जा सकेगा।

पुलिस कर्मियों में खुशी का माहौल

हाईकोर्ट के फैसले के बाद झारखंड पुलिस कर्मियों और उनके संगठनों में खुशी का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला उनके लंबे संघर्ष की जीत है। इससे हजारों कर्मियों को वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ होगा और सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले अधिकार सुनिश्चित होंगे।पुलिस संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने वाला है और भविष्य में भी इसी तरह सेवा संबंधी मामलों में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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