JSLPS के कंप्यूटर ऑपरेटरों का बड़ा ऐलान, मांगें पूरी होने तक जारी रहेगी हड़ताल, 31 अगस्त को जेएसएलपीएस मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन
Major announcement by JSLPS computer operators: strike to continue until demands are met; massive protest planned at JSLPS headquarters on August 31.

रांची/डेस्क: झारखंड राज्य आजीविका कंप्यूटर ऑपरेटर संघ की हड़ताल जारी रहेगी। बैठक में संघ ने ये फैसला लिया है कि हड़ताल को समाप्त नहीं किया जायेगा। संघ की राज्य कमिटी की आपात बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक कर्मचारियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। संघ ने 31 अगस्त को जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी कार्यालय, मुख्यालय धुर्वा, रांची के समक्ष जोरदार धरना-प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का ऐलान किया है।
20 अगस्त को कमिटी के समक्ष रखे गए दस्तावेज और साक्ष्य
संघ के अनुसार, झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार द्वारा गठित कमिटी ने 20 अगस्त को संघ के प्रतिनिधियों को मांगों के संबंध में चर्चा के लिए बुलाया था। बैठक के दौरान संघ के महासचिव पंकज कुमार ने मांगों से संबंधित सभी आवश्यक कागजात और साक्ष्य कमिटी के समक्ष प्रस्तुत किए।
संघ का आरोप है कि न्यू मॉडल एनआरएलएम पॉलिसी के तहत कई संवर्गों के कर्मचारियों के वेतन में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई, लेकिन पॉलिसी में पद दर्ज होने के बावजूद बड़ी संख्या में डाटा एंट्री ऑपरेटरों को इसका लाभ नहीं दिया गया। संघ के मुताबिक, केवल FTE कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी की गई, जबकि शेष कर्मचारियों को समान लाभ से वंचित रखा गया।
कुछ डाटा एंट्री ऑपरेटरों को L7 का लाभ, बाकी अभी भी वंचित
संघ ने कहा कि कुछ डाटा एंट्री ऑपरेटरों को पहले ही मानव संसाधन नियमावली के L7 लेवल में शामिल किया गया है और उन्हें 37,712 रुपये तक वेतन दिया जा रहा है। वहीं बड़ी संख्या में कार्यरत अन्य डाटा एंट्री ऑपरेटरों को अब तक L7 लेवल में शामिल नहीं किया गया है।
संघ का कहना है कि यही स्थिति अन्य कई संवर्गों में भी है, जहां कुछ कर्मचारियों को FTE घोषित किया गया है, जबकि समान कार्य कर रहे शेष कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिला।
वार्ता में सहमति बनी, लेकिन पत्र में कई अहम बिंदु गायब
संघ के अनुसार, 21 अगस्त को झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह ने जेएसएलपीएस के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी से मांगों को लेकर वार्ता की। इस दौरान महासंघ के अनुसार कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। बैठक में कमिटी सदस्य दीपक उपाध्याय भी मौजूद थे।
संघ ने आरोप लगाया कि मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी ने पत्र जारी करने और हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया, लेकिन जारी पत्र में कई महत्वपूर्ण बातों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। इनमें हड़ताल अवधि का वेतन दिए जाने, किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने और मांगों को पूरा करने की स्पष्ट समय-सीमा तय करने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
संघ का कहना है कि वार्ता के दौरान जिन बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें जारी पत्र में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा वेतन बढ़ोतरी के लिए गठित कमिटी से भी संघ ने न्याय मिलने को लेकर आशंका जताई है।
31 अगस्त को धुर्वा में जोरदार प्रदर्शन
राज्य कमिटी की आपात बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रखी जाएगी। संघ ने 31 अगस्त को मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के कार्यालय, जेएसएलपीएस मुख्यालय धुर्वा, रांची के समक्ष जोरदार प्रदर्शन, धरना और अनिश्चितकालीन हड़ताल करने की घोषणा की है।
बैठक में करन कुमार गुप्ता, पंकज कुमार, पवन कुमार, रिजवान आलम, अंजली कुमारी, ऋचा दुबे, नीतीश कुमार, मनोज मांडल, मो. राशिद, मुकेश कुमार और पूजा कुमारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
महासंघ ने मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
आंदोलन को झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह, सम्मानित अध्यक्ष मुक्तेश्वर लाल, मुख्य संरक्षक गणेश प्रसाद सिंह, घरभन राम, डॉ. गणेश राम, कमलेश कुमार, रामाशीष पासवान, बी. अगस्त क्रांति कुमार, सुरेश कुमार, सुरेश हाजरा, सनातन कुमार और रीना कुमारी सहित कई नेताओं ने समर्थन दिया है।
इसके अलावा झारखंड के विभिन्न जिलों के कंप्यूटर डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने भी आंदोलन के समर्थन का ऐलान किया है। समर्थन देने वालों में रिजवान आलम, राजदीप कुमार, अमरजीत कुमार, चैतन्य राज वर्मा, धर्मवीर कुमार, विवेक कुमार, मधु कुमारी, सेजल शर्मा, रितिक राजन, ओमप्रकाश ठाकुर, सुनीता कुमारी, उपेंद्र कुमार, अनिल कुमार और सूरज कुमार समेत अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
महासंघ के महामंत्री सुनील कुमार साह ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जेएसएलपीएस ग्रामीण विकास विभाग में कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर संवर्ग की जायज मांगों को अविलंब पूरा किया जाए, ताकि लंबे समय से जारी आंदोलन समाप्त हो सके।










