सालों बाद सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे 4 शुभ संयोग, जानिए पूजा से क्या होगा विशेष लाभ, ये काम जरूर करें
24 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार है। जानिए प्रीति, आयुष्मान, बुधादित्य और हंसराज योग का महत्व, पूजा मुहूर्त, दान और भगवान शिव के विशेष मंत्र।

Sawan Last Somwar 2026: सावन का आखिरी सोमवार आज यानि 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। भगवान शिव की आराधना के लिए इस दिन को बेहद खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग, बुधादित्य योग और हंसराज योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं। ऐसे दुर्लभ संयोग के बीच सावन के अंतिम सोमवार पर की गई शिव पूजा, अभिषेक, मंत्र जाप और दान का विशेष महत्व बन गया है।
मान्यता है कि सावन सोमवार को श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का जलाभिषेक करने और जरूरतमंदों को दान देने से जीवन में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि आती है। इस दिन भगवान शिव का वास कैलाश पर माना गया है, इसलिए रुद्राभिषेक के लिए भी यह दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है।
सावन के आखिरी सोमवार पर बन रहे 4 शुभ संयोग
1. प्रीति योग
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सावन के अंतिम सोमवार की सुबह प्रीति योग रहेगा। इसे शुभ और सकारात्मक योग माना जाता है। इस योग में किए गए शुभ कार्यों से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है। भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और धार्मिक कार्यों के लिए इसे अनुकूल माना जाता है।
2. आयुष्मान योग
सुबह करीब 7:04 बजे के बाद आयुष्मान योग शुरू होने की बात कही गई है, जो पूरे दिन रहने वाला है। ज्योतिष में आयुष्मान योग को स्वास्थ्य, दीर्घायु और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।
3. बुधादित्य योग
सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनने की ज्योतिषीय मान्यता है। इसे बुद्धि, निर्णय क्षमता, ज्ञान और कार्यक्षेत्र में प्रगति से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन शिव पूजा के साथ भगवान गणेश और सूर्य देव की आराधना करना भी शुभ माना जाता है।
4. हंसराज योग
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार गुरु के कर्क राशि में स्थित होने से हंसराज योग बन रहा है। इसे उन्नति और शुभ परिणाम देने वाला योग माना जाता है। सावन सोमवार पर इस योग का बनना धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जा रहा है।
शिव पूजा के समय ये काम जरूर करें
सावन के आखिरी सोमवार को सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें। शिवलिंग पर पहले स्वच्छ जल और गंगाजल चढ़ाएं। इसके बाद श्रद्धानुसार दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत अभिषेक किया जा सकता है।
इसके बाद दोबारा स्वच्छ जल से अभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और अक्षत अर्पित करें। दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।पूजा के अंत में शिव आरती करें और अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या अन्य उपयोगी सामग्री का दान करें।
सावन सोमवार पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं?
भगवान शिव को सावन सोमवार पर ये चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है:
• जल और गंगाजल
• कच्चा दूध
• दही
• शहद
• घी
• शक्कर
• बेलपत्र
• धतूरा
• भांग
• आक के सफेद फूल
• चंदन
• अक्षत
• मौसमी फल
सावन सोमवार पर क्या दान करें?
दूध और दही
धार्मिक मान्यता के अनुसार दूध और दही का दान सुख-शांति और समृद्धि से जुड़ा माना जाता है।
चावल, चीनी और सफेद वस्त्र
सफेद वस्तुओं का दान चंद्रमा से जुड़े दोषों की शांति के लिए किया जाता है।
काले तिल
काले तिल का दान नकारात्मकता से मुक्ति और शनि संबंधी बाधाओं को कम करने की धार्मिक मान्यता से जुड़ा है।
रुद्राक्ष
भगवान शिव को प्रिय माने जाने वाले रुद्राक्ष का दान भी शुभ माना जाता है।
छाता और चप्पल
बारिश के मौसम में जरूरतमंदों को छाता, चप्पल या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान करना सेवा और पुण्य का कार्य माना जाता है।
सावन के आखिरी सोमवार के पूजा मुहूर्त
बताए गए चौघड़िया के अनुसार पूजा के लिए ये समय शुभ माने गए हैं:
• अमृत चौघड़िया: सुबह 5:55 से 7:32 बजे तक
• शुभ चौघड़िया: सुबह 9:09 से 10:46 बजे तक
• लाभ चौघड़िया: दोपहर 3:38 से 5:15 बजे तक
• अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:59 से दोपहर 12:47 बजे तक
स्थानीय सूर्योदय और पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय पढ़ें यह मंत्र
मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम्।
तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि।
इसके बाद भगवान शिव का मूल मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ॐ सद्योजाताय नमः।
ॐ वामदेवाय नमः।
ॐ अघोराय नमः।
ॐ तत्पुरुषाय नमः।
ॐ ईशानाय नमः।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
कैलाश पर भगवान शिव का वास, रुद्राभिषेक का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार सावन के अंतिम सोमवार को भगवान शिव का वास कैलाश पर माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से रुद्राभिषेक और शिव आराधना करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसमें बताए गए शुभ योग, पूजा और दान के फल को आस्था एवं परंपरा के अनुसार समझना चाहिए।












