यहां सांप का जोड़ा आता है हर दिन शिव आरती करने : मंदिर पहुंचते हैं तीन सांप, आरती के बाद पेड़ और पोखर में जाते हैं गायब; 7 साल से सावन माह का रहस्य
बालाघाट के गुडरू गांव स्थित सती माता मंदिर में सावन के दौरान तीन सांपों के पहुंचने का ग्रामीण दावा है। जानिए आरती, पेड़-पोखर और सात साल से जुड़े इस रहस्य की पूरी कहानी। Tags:

धर्म डेस्क। सावन का ये महीना शिव भक्ति का है। कहा जाता है सावन के इस माह में इंसान तो इंसान भगवान भी जमीन पर उतरकर महादेव की अराधना करते हैं। इस दौरान कई जगहों पर चमत्कार नजर आते हैं। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक ऐसा ही चमत्कार सालों से होता आ रहा है। यहां की आस्था और रहस्य से जुड़ी एक अनोखी घटना इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
जिले से करीब 65 किलोमीटर दूर लामता क्षेत्र के गुडरू गांव स्थित सती माता मंदिर में सावन शुरू होते ही श्रद्धालुओं के साथ तीन सांपों की मौजूदगी भी देखने को मिलती है। स्थानीय ग्रामीणों और मंदिर के पुजारी का दावा है कि पिछले करीब सात वर्षों से सावन के दौरान ये सांप नियमित रूप से मंदिर परिसर में दिखाई देते हैं।
बताया जाता है कि मंदिर में आने वाले सांपों में दो काले और चितकबरे रंग के हैं, जबकि तीसरा सांप सफेद रंग का बताया जाता है। सावन के दौरान इन सांपों को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी लोग मंदिर पहुंच रहे हैं। हालांकि, इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में धार्मिक आस्था है, लेकिन इसके पीछे का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है।
आरती के समय मंदिर पहुंचते हैं सांप
मंदिर के पुजारी और ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह की आरती के समय इन सांपों की मौजूदगी अक्सर देखने को मिलती है। बताया जाता है कि सांप पास के तालाब की ओर से मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं और आरती के दौरान वहीं शांत रहते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरती समाप्त होने के बाद दो सांप मंदिर परिसर में मौजूद एक पेड़ पर चढ़ जाते हैं और दिनभर वहीं रहते हैं। वहीं तीसरा सांप पेड़ के नीचे बने छोटे पोखर की ओर चला जाता है।इस पूरे दृश्य को देखने वाले श्रद्धालु इसे बेहद कौतूहल के साथ देखते हैं। ग्रामीणों का दावा है कि मंदिर में मौजूद रहने के दौरान सांपों ने किसी श्रद्धालु को नुकसान नहीं पहुंचाया है।
पहले साल दिखा था सिर्फ एक सांप
मंदिर के पुजारी के अनुसार, जब यह सिलसिला शुरू हुआ था तब पहले साल केवल एक सांप दिखाई दिया था। इसके बाद अगले वर्षों में दो सांपों का जोड़ा और एक अन्य सांप नजर आने लगा।ग्रामीणों का दावा है कि इसके बाद से लगातार हर सावन में तीन सांप मंदिर परिसर में पहुंचते हैं। खास बात यह है कि सावन समाप्त होने के बाद ये सांप अचानक नजर आना बंद हो जाते हैं।
सावन खत्म होते ही कहां चले जाते हैं?
इस घटना से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यही है कि सावन के पूरे महीने मंदिर के आसपास नजर आने वाले ये सांप बाकी महीनों में कहां चले जाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सावन बीतने के बाद ये सांप मंदिर परिसर, गांव और आसपास के इलाकों में दिखाई नहीं देते।अगले साल सावन आते ही इनके फिर से मंदिर परिसर में दिखाई देने का दावा किया जाता है। यही वजह है कि ग्रामीण इसे रहस्यमयी घटना मानते हैं।
हालांकि, सांपों के व्यवहार और उनके मंदिर परिसर में आने के पीछे प्राकृतिक कारण भी हो सकते हैं। आसपास तालाब, पोखर और पेड़ों की मौजूदगी सांपों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा सकती है। इस संबंध में किसी विशेषज्ञ या वन विभाग की वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
श्रद्धालुओं के लिए बना आकर्षण का केंद्र
सती माता मंदिर पहले से ही स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है। लेकिन सावन के दौरान सांपों की मौजूदगी की चर्चा के बाद मंदिर को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई है।स्थानीय श्रद्धालु सती माता के दर्शन के साथ इन सांपों को देखने के लिए भी मंदिर पहुंच रहे हैं।
कई लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखते हैं और सांपों को भगवान शिव से जोड़कर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।ग्रामीणों के बीच यह मान्यता भी है कि सावन में मंदिर परिसर में सांपों का इस तरह आना सती माता और भगवान शिव की कृपा का संकेत है। हालांकि, यह स्थानीय धार्मिक विश्वास है और इसकी कोई वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।
आस्था और रहस्य के बीच सात साल से जारी सिलसिला
गुडरू गांव का सती माता मंदिर इन दिनों आस्था और कौतूहल दोनों का केंद्र बना हुआ है। सात वर्षों से सावन में सांपों के दिखाई देने का स्थानीय दावा, आरती के समय उनकी मौजूदगी और सावन खत्म होते ही उनके गायब हो जाने की बात लोगों को हैरान करती है।जहां ग्रामीण इसे धार्मिक चमत्कार के रूप में देखते हैं, वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सांपों के व्यवहार को उनके प्राकृतिक आवास, मौसम, तापमान और भोजन की उपलब्धता से जोड़कर देखा जा सकता है। इस रहस्य की वास्तविक वजह जानने के लिए विशेषज्ञ अध्ययन की जरूरत होगी।












