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रिटायरमेंट की उम्र में मिली नौकरी: 59 साल 8 महीने की उम्र में मिली सरकारी नौकरी, 27 साल तक नहीं मानी हार; 8 इंटरव्यू में मिली नाकामी, आखिरकार मुख्यमंत्री ने सौंपा नियुक्ति पत्र

UP के बागपत के विजय कुमार शर्मा ने 27 साल की मेहनत के बाद 59 साल 8 महीने की उम्र में सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा किया। CM योगी ने नियुक्ति-पत्र सौंपा।

Sarkari Naukari News: कहते हैं कि अगर हौसला मजबूत हो तो उम्र मंजिल की राह में दीवार नहीं बन सकती। इरादे बुलंद हो, तो कामयाबी मिलती ही है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है विजय शर्मा ने। नाम के अनुरूप विजय शर्मा ने अपने करियर में विजय हासिल की। मामला उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत क्षेत्र का है, जहां बड़ावद गांव निवासी विजय कुमार शर्मा ने इस बात को सच साबित कर दिया है।

करीब 27 साल तक सरकारी नौकरी के लिए लगातार प्रयास करने के बाद आखिरकार 59 साल 8 महीने की उम्र में उनका सरकारी शिक्षक बनने का सपना पूरा हो गया।विजय कुमार शर्मा को 22 सितंबर 2026 को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियुक्ति-पत्र सौंपा। उनका चयन TGT संस्कृत शिक्षक के पद पर शामली जिले के एलम गांव स्थित इंटर कॉलेज के लिए हुआ है।

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27 साल तक जारी रखा सरकारी नौकरी का संघर्ष

विजय कुमार शर्मा ने सरकारी नौकरी पाने के लिए वर्ष 1999 से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की थी। इस दौरान उन्होंने कई परीक्षाएं दीं। कई बार लिखित परीक्षा में सफलता भी मिली, लेकिन अंतिम चयन की सीढ़ी पर इंटरव्यू आड़े आता रहा।

बताया जाता है कि शर्मा ने छह बार TGT की लिखित परीक्षा और चार बार PGT की परीक्षा पास की। इसके अलावा वह करीब आठ बार इंटरव्यू में शामिल हुए, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना सके।हर असफलता के बाद उन्होंने दोबारा किताबें उठाईं और तैयारी शुरू कर दी। उम्र बढ़ती गई, लेकिन सरकारी शिक्षक बनने का सपना उन्होंने नहीं छोड़ा।

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दिन में बच्चों को पढ़ाया, रात में सरकारी नौकरी की तैयारी

सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ विजय कुमार शर्मा ने निजी स्कूलों में शिक्षक के रूप में भी काम किया। उन्होंने विवेकानंद विद्यापीठ और दून पब्लिक स्कूल में हिंदी और संस्कृत पढ़ाई।करीब 26 वर्षों तक निजी स्कूलों में पढ़ाने के साथ-साथ उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जारी रखी। यानी एक तरफ वह बच्चों को पढ़ाते रहे और दूसरी तरफ खुद अपनी अगली परीक्षा की तैयारी करते रहे।दून पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर प्रशांत जैन के मुताबिक, शर्मा स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते रहे।

इस बार इंटरव्यू नहीं था, बदल गई किस्मत

विजय कुमार शर्मा की लंबी कोशिशों में एक बड़ा बदलाव इस भर्ती प्रक्रिया में आया। इस बार चयन प्रक्रिया में इंटरव्यू शामिल नहीं था।लिखित परीक्षा के बाद चयन होने की व्यवस्था ने शर्मा के लिए वह रास्ता खोल दिया, जो पिछले कई प्रयासों में अंतिम चरण पर बंद हो जाता था। इस बार उनका चयन हुआ और करीब तीन दशक से चला आ रहा इंतजार खत्म हो गया।

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CM योगी के हाथों मिला नियुक्ति-पत्र

22 सितंबर को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम विजय कुमार शर्मा के लिए जिंदगी का यादगार दिन बन गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें सरकारी शिक्षक के पद का नियुक्ति-पत्र सौंपा।उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र वितरित किए गए।

सरकारी नौकरी मिली, लेकिन सेवा के लिए समय कम

विजय कुमार शर्मा की वर्तमान उम्र करीब 59 साल 8 महीने है। शिक्षक की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष होने के कारण उन्हें सरकारी शिक्षक के रूप में करीब दो साल चार महीने सेवा करने का मौका मिलेगा।समय भले ही कम हो, लेकिन शर्मा के लिए यह नौकरी सिर्फ नौकरी नहीं है। करीब 27 साल तक जिस लक्ष्य के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की, वह आखिरकार उनकी उम्र के 60वें पड़ाव के करीब पूरा हुआ।

दून पब्लिक स्कूल ने भी किया सम्मान

सरकारी शिक्षक बनने की खबर मिलने के बाद दून पब्लिक स्कूल परिवार ने भी विजय कुमार शर्मा का सम्मान किया। स्कूल परिवार ने उनके लंबे संघर्ष और सफलता पर खुशी जताई और उन्हें शुभकामनाएं दीं।

27 साल की कहानी का सबसे बड़ा सबक

विजय कुमार शर्मा की कहानी सिर्फ सरकारी नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है। यह लगातार कोशिश, असफलता के बाद दोबारा खड़े होने और लक्ष्य पर भरोसा बनाए रखने की कहानी है।कई बार परीक्षा पास करने के बावजूद इंटरव्यू में असफल होने के बाद भी उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। उम्र बढ़ने के साथ जब सरकारी नौकरी की उम्मीद मुश्किल लग सकती थी, तब भी उन्होंने प्रयास जारी रखा।आखिरकार 22 सितंबर का दिन आया, जब वर्षों से संभाला हुआ सपना नियुक्ति-पत्र के रूप में उनके हाथ में था।

 

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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