रूला देगी ये 10 तस्वीरें: मुख्यमंत्री एंबुलेंस से मां को लेकर निकले आखिरी सफर पर, कभी लिपटकर रोते, कभी खुद को संभालते, मां के शव के सामने बेसुध हुए हेमंत सोरेन
These 10 photos will move you to tears: The Chief Minister set out on his mother's final journey in an ambulance; Hemant Soren was seen clinging to her and weeping, struggling to compose himself, and becoming inconsolable before his mother's mortal remains.

रांची। मां का जाना किसी भी बेटे के जीवन का ऐसा खालीपन है, जिसे शब्दों में भर पाना आसान नहीं। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अपनी मां स्वर्गीय रूपी सोरेन के निधन के बाद इसी असहनीय पीड़ा से गुजरते नजर आए। मोरहाबादी आवास से लेकर पैतृक गांव नेमरा तक हर कदम मां की यादों और अंतिम विदाई के भावुक क्षणों का गवाह बना।

मां की छांव सिर से उठी तो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद को संभाल नहीं सके। मोरहाबादी स्थित आवास पर मां के पार्थिव शरीर को देखते हुए उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। बेटे का यह दर्द देखकर वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया।

मां के पार्थिव शरीर के पास बैठे हेमंत सोरेन बार-बार उन्हें निहारते रहे। चेहरे पर गम और आंखों में आंसू थे। राजनीति और सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं से दूर उस पल वे सिर्फ एक बेटे थे, जिसने अपनी मां को खो दिया था।

रूपी सोरेन को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए मोरहाबादी आवास पर लोगों का तांता लगा रहा। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार समेत मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व मुख्यमंत्री, अधिकारी और बड़ी संख्या में आम लोग पहुंचे और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वर्गीय रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर इस कठिन घड़ी में धैर्य और संबल के लिए प्रार्थना की।

मोरहाबादी आवास से जब रूपी सोरेन की अंतिम यात्रा शुरू हुई, माहौल गमगीन हो गया। फूलों से सजी एंबुलेंस में मां का पार्थिव शरीर रखा गया। आसपास मौजूद लोगों की निगाहें नम थीं और हर चेहरा अंतिम विदाई के दर्द को बयां कर रहा था।
गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे काफिला कोठार ओवरब्रिज के समीप से पैतृक गांव नेमरा के लिए रवाना हुआ। सबसे भावुक दृश्य एंबुलेंस के भीतर था, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी मां के पार्थिव शरीर के समीप बैठे हुए थे।
फूलों से सजी एंबुलेंस आगे बढ़ती रही और मुख्यमंत्री अपनी मां के साथ अंतिम सफर पर निकल पड़े। एक ओर सुरक्षा का काफिला था, दूसरी ओर पीछे चलती भीड़। लेकिन उस पूरे दृश्य के केंद्र में मां-बेटे का यह आखिरी साथ था।
मुख्यमंत्री के काफिले की अगुवाई रामगढ़ उपायुक्त ऋतुराज और पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुनायत कर रहे थे। एंबुलेंस के आगे सुरक्षा व्यवस्था संभालते वाहन चल रहे थे, जबकि पीछे बड़ी संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल थे।
रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर के नेमरा पहुंचने से पहले ही गांव में अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू हो गईं। जिस गांव की मिट्टी और यादों से उनका जीवन जुड़ा था, अब वहीं उन्हें अंतिम विदाई देने की तैयारी थी।
मां की अंतिम यात्रा ने एक बेटे को भीतर तक झकझोर दिया। मोरहाबादी से नेमरा तक हर कदम भावनाओं से भरा रहा। अंतिम विदाई के इस सफर में हेमंत सोरेन के साथ पूरा झारखंड खड़ा नजर आया—आंखों में आंसू और दिल में श्रद्धांजलि लिए।












