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“नाड़ा खींचना, ब्रेस्ट पकड़ना रेप नहीं” सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा, जानिये सर्वोच्च न्यायालय ने किस मामले में की कड़ी टिप्पणी

"Pulling the string, grabbing the breast is not rape." The Supreme Court overturned the High Court's decision. Find out in which case the Supreme Court made its strong remarks.

Court News/19.2.26। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि किसी बच्ची के स्तन पकड़ना, उसके पाजामा का नाड़ा तोड़ना और उसे नाले के नीचे घसीटने की कोशिश करना बलात्कार या बलात्कार की कोशिश नहीं है।अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल तकनीकी कानूनी व्याख्या पर्याप्त नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और सहानुभूति भी उतनी ही आवश्यक है।

यह फैसला चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया के साथ सुनाया। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट की उस व्याख्या को गलत ठहराया, जिसमें कहा गया था कि उक्त कृत्य “रेप की कोशिश” नहीं, बल्कि “रेप करने की तैयारी” मात्र है।

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए यह निष्कर्ष निकालना कि आरोप केवल तैयारी तक सीमित हैं, क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के तय सिद्धांतों का स्पष्ट गलत इस्तेमाल है।” अदालत ने दो आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 376 (रेप) के तहत “रेप की कोशिश” के कड़े आरोपों को बहाल कर दिया।

जानिये क्या था विवादित आदेश?

हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 के अपने आदेश में कहा था कि सिर्फ ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा/नाड़ा खींचना रेप या रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता। हालांकि, इसे महिला के कपड़े उतारने या उसे अपमानित करने के इरादे से हमला या क्रिमिनल फोर्स के उपयोग के दायरे में रखा गया था। यह आदेश जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा द्वारा दो आरोपियों की रिवीजन याचिका पर दिया गया था।

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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

शीर्ष अदालत ने कहा कि “यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण अत्यंत सावधानीपूर्ण और संवेदनशील होना चाहिए।” कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ब्रेस्ट पकड़ना और नाड़ा खींचना जैसे कृत्य किसी भी दृष्टि से “रेप की कोशिश” के इरादे को दर्शाते हैं। अदालत ने यह भी जोड़ा कि उसके द्वारा व्यक्त टिप्पणियां प्रथम दृष्टया (prima facie) हैं और इन्हें आरोपियों के दोष या निर्दोषता पर अंतिम राय नहीं माना जाएगा।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रकरण उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से जुड़ा है। आरोप के अनुसार 10 नवंबर 2021 को एक महिला अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ घर लौट रही थी। रास्ते में गांव के तीन युवकों – पवन, आकाश और अशोक – ने उन्हें लिफ्ट देने की पेशकश की। आरोप है कि सुनसान स्थान पर बाइक रोककर नाबालिग से छेड़छाड़ की गई। आकाश पर आरोप है कि उसने लड़की को पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की और उसके पायजामे का नाड़ा खींचा।

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शोर सुनकर दो लोगों के पहुंचने पर आरोपी मौके से फरार हो गए।इस मामले में विशेष न्यायाधीश, POCSO कोर्ट ने 23 जून 2023 को IPC की धारा 376 सहित अन्य धाराओं में समन जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब उस मूल समन आदेश को पुनः लागू कर दिया है।

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