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होली कब है : 2 मार्च को होलिका दहन, तो फिर तीन मार्च को क्यों नहीं मनायी जायेगी होली, जानिये इस बार होली की तारीख पर असमंजस क्यों…

When is Holi: Holika Dahan is on March 2, then why will Holi not be celebrated on March 3, know why there is confusion on the date of Holi this time...

Holi kab hai/19.2.26। इस साल होली की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, हालांकि अब तारीख को लेकर स्पष्टता आने लगी है। पंचांग के विशेष संयोगों और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के चलते लोग 3 मार्च और 4 मार्च के बीच उलझन में थे। हालांकि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 2 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के अवसर पर होलिका दहन किया जाएगा, जबकि रंगों की होली 4 मार्च को मनाने की सलाह दी गई है।

2 मार्च: होलिका दहन, भद्रा का प्रभाव

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 2 मार्च की शाम 05:32 बजे पूर्णिमा तिथि का आरंभ होगा। हालांकि इस दिन भद्रा काल का साया भी रहेगा, जो शाम 05:18 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की सुबह 04:56 बजे तक प्रभावी रहेगा। शास्त्रीय मान्यताओं में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

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फिर भी धार्मिक परंपराओं के अनुसार भद्रा के ‘पुच्छ’ भाग में कुछ शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसी आधार पर इस वर्ष होलिका दहन का श्रेष्ठ मुहूर्त रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक निर्धारित किया गया है। कुल 1 घंटा 12 मिनट का यह समय धार्मिक दृष्टि से अनुकूल माना जा रहा है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर होलिका दहन किया जाएगा।

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3 मार्च: खग्रास चंद्र ग्रहण और सूतक काल

3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण का योग बन रहा है, जिसने पर्व की तिथि पर विशेष प्रभाव डाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण से लगभग 9 घंटे पूर्व सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। अनुमानित रूप से सुबह करीब 06:30 बजे से सूतक प्रभावी रहेगा।
सूतक काल के दौरान शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ, और कई घरों में खान-पान तक सीमित रखने की परंपरा है। यही कारण है कि 3 मार्च को रंग खेलने से बचने की सलाह दी गई है, ताकि पर्व की पवित्रता और धार्मिक अनुशासन बना रहे।

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4 मार्च: रंगों की होली, शुभ संयोग

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 4 मार्च को पूर्वा फाल्गुनी और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र का शुभ संयोग रहेगा। सुबह 07:27 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, जिसके पश्चात पूरे दिन उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र प्रभावी होगा। इसके साथ ही धृति योग का निर्माण भी इस दिन को और अधिक मंगलकारी बना रहा है।इन शुभ योगों के कारण 4 मार्च को रंगों की होली मनाना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन लोग अबीर-गुलाल के साथ प्रेम, सौहार्द और उल्लास का संदेश साझा करेंगे।

होलिका पूजा का धार्मिक महत्व

होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रतीक भी है। इस दिन अक्षत, गंगाजल, रोली-चंदन से पूजा की जाती है। आटा, गुड़, तिल, जौ और घी अर्पित कर सात परिक्रमा की जाती है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। होलिका की अग्नि में गेहूं या चना सेंककर प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा भी शुभ मानी जाती है।

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रंगों का सांकेतिक और ज्योतिषीय महत्व

होली के रंग केवल उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक अर्थ भी रखते हैं।
लाल रंग ऊर्जा और साहस का प्रतीक है, पीला आध्यात्मिक तेज और गुरु कृपा से जुड़ा है। हरा रंग समृद्धि और सकारात्मकता दर्शाता है, जबकि नीला रंग शांति और स्थिरता का संकेत देता है। गुलाबी रंग प्रेम और अपनत्व का संदेश देता है।

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