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गजब हो गया ! इस बार फर्जी UPSC टॉपर में बिहार बना नंबर टू, जानिये नंबर वन पर किस राज्य के फर्जी टॉपरों ने IAS-IPS बनने का किया दावा…

It's amazing! This time, Bihar has become the number two state in fake UPSC toppers. Find out which state's fake toppers claimed to be IAS or IPS officers...

UPSC 2025 के रिजल्ट के बाद देशभर में फर्जी टॉपर के कई मामले सामने आए, जहां नाम मिलते-जुलते होने के कारण या जानबूझकर लोगों ने चयन का दावा किया। इससे सिस्टम और जागरूकता दोनों पर सवाल खड़े हुए हैं। देश में सबसे ज्यादा IAS-IPS देने वाले बिहार ने इस बार फर्जी टॉपर देने में भी रिकॉर्ड बना दिया।
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UPSC Fake Topper: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। वर्ष 2025 के परिणाम में जहां 958 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की, लेकिन इस बार फर्जी टॉपर बनने के भी एक से बढ़कर एक मामले आये।UPSC रिजल्ट जारी होते ही देश के कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए, जहां अभ्यर्थियों या उनके परिजनों ने मिलते-जुलते नाम के आधार पर चयन का दावा कर दिया। कुछ मामलों में यह भ्रम था, तो कुछ में जानबूझकर वाहवाही लूटने की कोशिश भी देखी गई।

बिहार में दो मामले

बिहार से दो चर्चित मामले सामने आए। पहला मामला आरा की रहने वाली आकांक्षा सिंह का है, जिन्होंने UPSC  के AIR 301 का दावा किया। सोशल मीडिया पर उनके इंटरव्यू और जश्न के वीडियो भी वायरल हो गए। मामला बढ़ने पर UPSC को स्पष्ट करना पड़ा कि इस रैंक पर चयन गाजीपुर (यूपी) की आकांक्षा सिंह का हुआ है।दूसरा मामला शेखपुरा के रंजीत कुमार का है, जिन्होंने AIR 440 का दावा कर खुद को मोटिवेशनल स्पीकर तक घोषित कर लिया। सम्मान समारोह भी हुए, लेकिन सच्चाई सामने आने के बाद वे फरार हो गए और बाद में गिरफ्तार कर लिए गए।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मामले

उत्तर प्रदेश में इस तरह के तीन मामले सामने आए। बुलंदशहर की शिखा ने रैंक 113 का दावा किया, जबकि असल में चयन हरियाणा की शिखा सहरावत का हुआ था।इसी तरह रैंक 79 पर प्रियंका चौधरी नाम को लेकर बड़ा कन्फ्यूजन हुआ। गाजीपुर की प्रियंका के परिवार ने जश्न मना लिया, जबकि UPSC  के रिजल्ट अनुसार असल चयन बीकानेर की प्रियंका चौधरी का हुआ था।

रैंक 182 पर भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां बागपत की दिव्या तंवर को चयनित मान लिया गया, लेकिन असल में चयन रोहतक की दिव्या का हुआ था।
मध्य प्रदेश और उत्तराखंड भी अछूते नहीं
मध्य प्रदेश के सतना में यशवर्धन सिंह को लेकर भ्रम फैला, जबकि असल चयन हमीरपुर के उम्मीदवार का हुआ था।वहीं उत्तराखंड के रुड़की में फैरूज फातिमा को लेकर भावनात्मक कहानियां वायरल हुईं, लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि चयन केरल की अभ्यर्थी का हुआ है।

सोशल मीडिया ने बढ़ाई समस्या

इन मामलों में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही। बिना पुष्टि के खबरें वायरल हुईं, जिससे भ्रम और तेजी से फैला। कई जगह परिवारों ने जश्न मनाया, मिठाइयां बांटी गईं, लेकिन सच्चाई सामने आने पर निराशा छा गई।UPSC ने स्पष्ट किया कि आयोग की ओर से जारी मेरिट लिस्ट पूरी तरह सटीक है और किसी प्रकार की गलती नहीं हुई है। आयोग ने विशेष रूप से आकांक्षा सिंह मामले में रोल नंबर, फोटो और अन्य विवरण साझा कर स्थिति स्पष्ट की।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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