Compassionate Appointment: अनुकंपा नियुक्ति में मनपसंद पद मांगने का अधिकार नहीं, शिक्षिका का पद मांगने वाली को हाईकोर्ट ने चपरासी पद लेने को कहा
High Court: B.Ed, TET पास उम्मीदवार भी अनुकंपा नियुक्ति में नहीं मांग सकते शिक्षक का पद, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में केवल उच्च योग्यता के आधार पर मनचाहा या उच्च पद नहीं मांगा जा सकता। शिक्षक पद खाली नहीं होने पर वर्ग-4 की नियुक्ति वैध मानी गई।

Highcourt News: अनुकंपा नियुक्ति में मनचाहा पद पाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति (Compassionate Appointment) को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने शिक्षिका पद की अनुकंपा नियुक्ति के लिए दायर याचिका को खारिज करते हुए महिला अभ्यर्थी को विभाग की तरफ से दिये गये चपरासी के पद को स्वीकारने का आदेश दिया।
पूरा मामला छत्तीसगढ़ का है, जहां हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ B.Ed. और TET जैसी उच्च शैक्षणिक योग्यता होने से किसी अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति में अपनी पसंद का या उच्च पद पाने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना है, न कि योग्यता के आधार पर नियमित सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना।
जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकल पीठ ने सक्ती जिले की निवासी मीनाक्षी चंद्रा की याचिका खारिज करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा चपरासी (वर्ग-4) पद पर दी गई नियुक्ति को पूरी तरह वैध और नियमों के अनुरूप माना।
पति के निधन के बाद मांगी थी अनुकंपा नियुक्ति
कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार, मीनाक्षी चंद्रा के पति हीरा राम चंद्रा शासकीय प्राथमिक शाला लहंगा (जिला सक्ती) में प्रधान पाठक के पद पर कार्यरत थे। 29 नवंबर 2025 को सेवाकाल के दौरान उनके निधन के बाद मीनाक्षी ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।जिला शिक्षा अधिकारी ने 18 मार्च 2026 को उन्हें चपरासी (वर्ग-4) पद पर नियुक्ति दे दी।
B.Ed. और TET पास होने का दिया हवाला
मीनाक्षी चंद्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह B.Ed. डिग्रीधारी हैं और छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) भी उत्तीर्ण कर चुकी हैं। इसलिए उन्हें शिक्षक (वर्ग-3) के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जानी चाहिए, न कि चपरासी के पद पर।
सरकार ने बताया क्यों नहीं मिली शिक्षक की नौकरी
राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 15 अप्रैल 2024 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के अनुसार वर्ग-3 के केवल 25 प्रतिशत पद ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आरक्षित हैं।
सरकार ने कहा कि संबंधित संभाग में उस समय शिक्षक (वर्ग-3) के अनुकंपा कोटे में कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। इसलिए परिवार को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से उपलब्ध रिक्त पद पर नियमानुसार नियुक्ति दी गई।
हाईकोर्ट ने कहा- योग्यता से नहीं मिलता मनचाहा पद
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि उच्च शैक्षणिक योग्यता किसी भी अभ्यर्थी को अनुकंपा नियुक्ति में उच्च पद पाने का अधिकार नहीं देती।अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकीं कि शिक्षक पद पर अनुकंपा कोटे की कोई रिक्ति उपलब्ध थी या विभाग ने नियुक्ति नीति का उल्लंघन किया।
अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य रोजगार नहीं, आर्थिक राहत
अपने फैसले में कोर्ट ने दोहराया कि अनुकंपा नियुक्ति का मूल उद्देश्य मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। यदि संबंधित पद पर अनुकंपा कोटे की रिक्ति उपलब्ध नहीं है तो विभाग उपलब्ध रिक्त पद पर नियुक्ति देने के लिए स्वतंत्र है।
कोर्ट ने याचिका की खारिज
हाईकोर्ट ने माना कि जिला शिक्षा अधिकारी ने नियमों और सरकारी नीति के अनुसार कार्रवाई की है। इसलिए मीनाक्षी चंद्रा को चपरासी पद पर दी गई अनुकंपा नियुक्ति पूरी तरह वैध है और इसे चुनौती देने का कोई आधार नहीं बनता। इसी के साथ अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
क्या है इस फैसले का महत्व?
यह फैसला उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो अनुकंपा नियुक्ति में अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर उच्च पद की मांग करते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुकंपा नियुक्ति ‘योग्यता आधारित भर्ती’ नहीं बल्कि ‘मानवीय सहायता’ की व्यवस्था है।







