close
LIVE UPDATE

Jharkhand High Court: पेंशन को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, दैनिक वेतनभोगियों की सेवा अवधि को नियमित सेवा में जोड़कर देना होगा पेंशन, लगाई फटकार; 6% ब्याज के साथ भुगतान का आदेश

झारखंड हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग को दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की लंबित पेंशन 6% ब्याज के साथ 10 जुलाई तक देने का आदेश दिया। लोक अदालत के अवार्ड के पालन में देरी पर कोर्ट ने नाराजगी जताई।

रांची। वर्षों तक दैनिक वेतन पर काम करने के बाद नियमित हुए कर्मचारियों की पेंशन को लेकर झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि लोक अदालत के अवॉर्ड के बावजूद कर्मचारियों को पेंशनरी लाभ से वंचित नहीं रखा जा सकता। हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिया कि दैनिक वेतनभोगी सेवा अवधि को लेकर हुए समझौते के अनुसार कर्मचारियों को पूर्ण पेंशन, एरियर और 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान 10 जुलाई तक सुनिश्चित किया जाए।

झारखंड हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों द्वारा सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में देरी को गंभीर मानते हुए साफ कर दिया है कि किसी कर्मचारी को उसका वैधानिक अधिकार समय पर मिलना चाहिए। अदालत ने जल संसाधन विभाग के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की लंबित पेंशन का मामला सुनते हुए विभागीय सचिव को कड़ी फटकार लगाई और आदेश दिया कि 10 जुलाई तक हर हाल में पूरी पेंशन 6 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा की जाए।

जानिये क्या है पूरा मामला

दरअसल याचिका वर्षों तक दैनिक वेतन पर काम करते रहे। इसके बाद साल 2011 तक उन्हें चरणबद्ध तरीके से नियमित किया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि नियमितीकरण के बाद उनकी दैनिक वेतन भोगी की सेवा अवधि को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा गया। इसके कारण आवश्यक न्यूनतम सेवा अवधि पूरी नहीं होने के आधार पर कई कर्मचारियों को पेंशन से वंचित कर दिया गया। जिसके बाद कर्मचारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका आग्रह था कि डेली वेजेस के रूप में की गई सेवा को कम से कम पेंशनरी लाभ के लिए मान्य किया जाए।

हालांकि, बाद में मामला लोक अदालत में गया, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ। लोक अदालत ने अपने अवॉर्ड में कर्मचारियों को पूर्ण पेंशनरी लाभ देने तथा अंतर राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान विभाग के कार्यपालक अभियंता ने भी इस संबंध में अंडरटेकिंग दी थी। इसके बाद विभाग ने अवार्ड का पालन नहीं किया। इस पर कर्मचारियों ने अवमानना याचिका दायर की, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए उसे सुनने से इनकार कर दिया कि लोक अदालत के अवॉर्ड के उल्लंघन पर अवमानना की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने पूछा- लोक अदालत का फैसला मानने में देरी क्यों?

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विभाग से तीखा सवाल किया कि जब लोक अदालत का अवार्ड पहले ही कर्मचारियों के पक्ष में पारित हो चुका है, तो फिर उसका पालन अब तक क्यों नहीं किया गया?विभाग की ओर से भुगतान के लिए 10 से 20 दिन का अतिरिक्त समय मांगा गया, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों को और इंतजार नहीं कराया जा सकता तथा 10 जुलाई अंतिम समय सीमा होगी।

पेंशन कोई सरकारी कृपा नहीं, कर्मचारी का अधिकार

इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अदालत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया कि पेंशन कोई सरकारी अनुग्रह (Charity) नहीं, बल्कि कर्मचारी का अर्जित अधिकार (Earned Right) है।यदि विभाग अपनी लापरवाही या प्रशासनिक देरी के कारण भुगतान रोकता है, तो कर्मचारियों को केवल मूल राशि ही नहीं बल्कि ब्याज का भी अधिकार बनता है।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?

झारखंड में जल संसाधन, ग्रामीण विकास, सिंचाई, पीएचईडी और अन्य विभागों में हजारों कर्मचारी वर्षों तक दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य कर चुके हैं। ऐसे कई मामलों में पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान वर्षों तक लंबित रहता है।हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे सभी मामलों में एक मजबूत कानूनी आधार बन सकता है, जहां कर्मचारी न्यायालय या लोक अदालत से राहत मिलने के बावजूद भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

क्या संदेश देता है यह फैसला?

• विभाग न्यायिक आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते।
• लोक अदालत के अवार्ड का पालन अनिवार्य है।
• भुगतान में देरी होने पर ब्याज भी देना पड़ सकता है।
• कर्मचारियों के सेवा लाभों को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
यह फैसला सरकारी विभागों के लिए चेतावनी और कर्मचारियों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *