OBC क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट पर ग्वालियर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सिर्फ सैलरी देखकर नहीं तय होगी पात्रता; 6 हफ्ते में दोबारा जांच के आदेश
OBC क्रीमी लेयर पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सिर्फ सैलरी से नहीं तय होगी पात्रता

Court News:OBC सर्टिफिकेट कि मांग कर रहे अभ्यर्थियों के पक्ष में कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि माता पिता की सैलरी के आधार पर उसकी संतान को क्रीमीलेयर का हवाला देते हुए आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता है।
क्या है मामला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने OBC क्रीमी लेयर को लेकर कहा कि किसी अभ्यर्थी को क्रीमी लेयर में रखने का फैसला सिर्फ माता-पिता की सकल सैलरी या सालाना आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए माता-पिता का पद, सेवा की स्थिति, प्रमोशन की तारीख, आय का स्रोत और लागू सरकारी नियमों को भी देखना होगा।
मामला रागिनी राठौर के OBC प्रमाणपत्र आवेदन से जुड़ा है। उनके पिता न्यायिक सेवा में सिविल जज रहे हैं। अधिकारियों ने पिता की 16,99,282 रुपये सालाना आय को आधार बनाकर रागिनी का OBC प्रमाणपत्र आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
2020 में खारिज हुआ था आवेदन को दी चुनौती
रिपोर्टों के मुताबिक, रागिनी के OBC प्रमाणपत्र आवेदन को 23 अक्टूबर 2020 को एसडीओ, ईसागढ़ ने खारिज किया था। इसके खिलाफ की गई अपील में 29 नवंबर 2022 को अशोकनगर के अपर कलेक्टर ने भी पहले आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
मालूम हो कि ओबीसी आरक्षण का लाभ लेने के लिए सरकार ने क्रीमिलेयर का प्रावधान किया है जो मातापिता की आय से संबंधित होता है।अधिकारियों ने पिता की आय को OBC क्रीमी लेयर के लिए निर्धारित आय सीमा से अधिक बताते हुए आवेदन खारिज किया था। रागिनी की ओर से दलील दी गई कि उनके पिता की नौकरी और सेवा से जुड़े नियमों को देखे बिना केवल वेतन को आधार बनाना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा…
हाईकोर्ट ने पुराने प्रशासनिक आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि मामले पर सभी प्रासंगिक तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर नए सिरे से विचार किया जाए। जांच में पिता की सेवा स्थिति, पद, प्रमोशन कब हुआ, आय का स्रोत और संबंधित सरकारी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को रागिनी को सुनवाई का अवसर देने और प्रमाणित आदेश की प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर कारणयुक्त नया आदेश पारित करने को कहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला
मामले में 11 मार्च 2026 के सुप्रीम कोर्ट के Union of India बनाम Rohit Nathan फैसले का भी संदर्भ आया। हाईकोर्ट ने क्रीमी लेयर के निर्धारण में केवल आय को यांत्रिक तरीके से आधार बनाने के बजाय लागू नियमों और अभिभावक की सेवा संबंधी परिस्थितियों की जांच पर जोर दिया।
क्या रागिनी को OBC प्रमाणपत्र मिल गया?हाईकोर्ट ने दिया आदेश
हाईकोर्ट ने रागिनी को सीधे OBC नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने पहले के खारिजी आदेशों को रद्द कर नए सिरे से नियमों के मुताबिक निर्णय लेने को कहा है। अंतिम फैसला सक्षम अधिकारी को करना है।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि संबंधित मामले में क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल वेतन की एक संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि लागू नियमों और अभिभावक की सेवा संबंधी परिस्थितियों को देखकर किया जाना चाहिए।











