झारखंड: मां ने मोबाइल खरीदने नहीं दिया पैसा, तो बेटे ने लगा ली फांसी, 15 साल के स्कूली बच्चे की जान देने की ये खबर हर माता-पिता के लिए है खतरे की घंटी
झारखंड के मनोहरपुर में 15 वर्षीय हर्ष टोपनो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। परिजनों के अनुसार उसने मोबाइल खरीदने के लिए मां से पैसे मांगे थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

मनोहरपुर (झारखंड)। मोबाइल का नशा आज के बच्चों के सर चढ़कर बोल रहा है। लिहाजा झारखंड से आयी एक खबर माता-पिता को सचेत भी करता है और आने वाले खतरे का अहसास भी कराता है। झारखंड के मनोहरपुर से सामने आई 15 वर्षीय हर्ष टोपनो की मौत की घटना ने बच्चों में मोबाइल को लेकर बढ़ती चाह और अभिभावकों की जिम्मेदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चिड़िया ओपी क्षेत्र के हिरजी हाटिंग निवासी हर्ष टोपनो की देर रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हर्ष मोबाइल खरीदने के लिए अपनी मां से पैसे मांग रहा था। घटना के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले की जांच जारी है।
मोबाइल खरीदने के लिए मां से मांगे थे पैसे
बताया जा रहा है कि हर्ष की मां विनीता टोपनो राजस्थान में मजदूरी करती हैं। हर्ष पिछले कुछ दिनों से मोबाइल खरीदने के लिए अपनी मां से पैसे मांग रहा था। गुरुवार रात करीब 9 बजे भी उसने अपनी मां को फोन किया और मोबाइल खरीदने के लिए पैसे मांगे।परिजनों के अनुसार बातचीत के दौरान पैसे देने को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद हर्ष अपने घर के एक कमरे में चला गया।
कुछ देर बाद उसने कथित तौर पर आत्मघाती कदम उठा लिया।हालांकि, मोबाइल खरीदने की मांग और मौत के बीच सीधा संबंध पुलिस जांच पूरी होने से पहले स्थापित नहीं किया जा सकता। घटना की वास्तविक परिस्थितियां जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगी।
सुबह बहन ने देखा तो परिवार में मचा कोहराम
शुक्रवार सुबह हर्ष की बहन लकड़ी लेने के लिए उसके कमरे में गई। वहां हर्ष को देखकर उसने परिवार के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मामले की सूचना चिड़िया पुलिस को दी गई।पुलिस मौके पर पहुंची और पंचायत सेवक बसंत कुमार पान की निगरानी में शव को नीचे उतारा गया।
इसके बाद हर्ष को चिड़िया अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल भेज दिया है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मोबाइल की बढ़ती लत ने अभिभावकों की चिंता बढ़ाई
हर्ष की मौत ने एक बड़े सामाजिक सवाल को सामने ला दिया है। आज बच्चों के हाथ में मोबाइल बेहद कम उम्र में पहुंच रहा है। ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया, वीडियो और दूसरे डिजिटल कंटेंट के कारण कई बच्चे घंटों मोबाइल से जुड़े रहते हैं।
ऐसे में माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि बच्चा मोबाइल का इस्तेमाल किस उद्देश्य से और कितने समय तक कर रहा है। किसी महंगे फोन की मांग, मोबाइल न मिलने पर अत्यधिक गुस्सा या व्यवहार में अचानक बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय बच्चे से बातचीत करना जरूरी है।
बच्चों को डांटने के बजाय समझना जरूरी
बच्चों और किशोरों में भावनात्मक बदलाव कई बार उनके व्यवहार में दिखाई देते हैं। ऐसे में केवल मोबाइल छीन लेना या डांट देना समाधान नहीं माना जा सकता। माता-पिता को बच्चे की बात सुनने, उसकी जरूरत और परेशानी समझने तथा सीमित और सुरक्षित डिजिटल इस्तेमाल के लिए स्पष्ट नियम बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
अगर बच्चा खुद को नुकसान पहुंचाने या जिंदगी खत्म करने जैसी बात करता है, तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसी स्थिति में परिवार के भरोसेमंद व्यक्ति और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।
हर्ष की मौत के पीछे की पूरी वजह क्या थी, इसका पता पुलिस जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल इस घटना ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और साथ ही अभिभावकों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि बच्चों के साथ मोबाइल से ज्यादा जरूरी संवाद और भावनात्मक जुड़ाव है।












