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फर्जी शिक्षिका…फर्जी ज्वाइनिंग…और शिक्षा विभाग में हो गया 52 लाख का खेला! फर्जी शिक्षिका के नाम पर वेतन निकासी, 6 लोगों पर FIR

शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षिका के नाम पर PRAN और बैंक खाता बनाकर 52 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया है। जोगसर थाने में छह लोगों पर FIR दर्ज, कंप्यूटर ऑपरेटर हिरासत में।

Teacher News। शिक्षा विभाग से वित्तीय गड़बड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग में ‘तनुश्री’ नाम की एक फर्जी शिक्षिका का रिकॉर्ड तैयार कर उसके नाम पर परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) और बैंक खाता खुलवाया गया। मामला बिहार के भागलपुर जिले का है, जहां कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और पोर्टल पर हेरफेर के जरिए सरकारी राशि की निकासी की गई। शुरुआती जांच में मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आया है। मामले में जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

फर्जी शिक्षिका के नाम पर तैयार किया गया रिकॉर्ड

अभी तक की जांच के अनुसार, शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा में वेतन, एरियर और भुगतान संबंधी एडवाइस तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते थे। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर ऐसी शिक्षिका का रिकॉर्ड बनाया गया, जिसका संबंधित स्कूल में कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था।

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बताया गया है कि काल्पनिक शिक्षिका के नाम पर पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके बाद किसी अन्य व्यक्ति के पैन नंबर का कथित तौर पर इस्तेमाल कर PRAN नंबर बनवाया गया। फिर एचआरएमएस (HRMS) पोर्टल पर उसकी आईडी तैयार कर नियमित शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया में कथित हेरफेर किया गया।

मई 2025 से जुलाई 2026 तक 52 लाख रुपये की निकासी

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मई 2025 से जुलाई 2026 के बीच करीब 52 लाख रुपये कथित तौर पर फर्जी शिक्षिका के नाम से जुड़े बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि इस रकम की निकासी भी कर ली गई।

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बैंक खाते की जांच में एक महिला के जनधन खाते में राशि ट्रांसफर होने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। हालांकि, इस मामले में सभी आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।

46 लाख और 73 लाख रुपये भेजने की कोशिश भी हुई

मामले में यह भी बताया गया है कि अगस्त 2026 में करीब 46 लाख रुपये ट्रांसफर करने का एक और प्रयास किया गया था। बैंक ने कथित तौर पर खाते पर होल्ड लगाकर इस लेनदेन को रोक दिया। इसके बाद 73 लाख रुपये भेजने की एक अन्य कोशिश भी की गई, जिसे बैंक ने रिजेक्ट कर दिया।

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इन दोनों प्रयासों के संबंध में सामने आई जानकारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध भुगतान की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और विभागीय स्तर पर किस तरह की चूक हुई।

शिकायतों के बाद खुला मामला

बताया गया है कि शिक्षकों की लगातार शिकायतों और नए जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) चंदन कुमार के कार्यभार संभालने के बाद मामले की जांच तेज हुई। रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी अनियमितताओं की पड़ताल के दौरान कथित फर्जीवाड़ा सामने आया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर की सेवा समाप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। अब विभागीय दस्तावेजों, वेतन भुगतान के रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की जांच के जरिए पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

छह लोगों के खिलाफ FIR, कंप्यूटर ऑपरेटर हिरासत में

इस मामले में भागलपुर के जोगसर थाने में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश राज को पुलिस ने हिरासत में लिया है। वहीं, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) शशि चंद चौधरी से भी पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।

प्रमंडलीय शिक्षा उपनिदेशक सुभाष गुप्ता ने मामले में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी शिक्षिका का रिकॉर्ड किसने तैयार किया, PRAN और बैंक खाता खुलवाने में किन लोगों ने मदद की और सरकारी राशि की निकासी में किसकी क्या भूमिका रही।

सरकारी वेतन भुगतान प्रणाली पर उठे सवाल

भागलपुर का यह मामला सरकारी विभागों में वेतन भुगतान, कर्मचारी सत्यापन और ऑनलाइन पोर्टल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विभागीय नियंत्रण और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा होगा।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही कथित घोटाले में शामिल लोगों की भूमिका और सरकारी राशि के वास्तविक नुकसान की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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