पारा शिक्षकों ने दायर की हाईकोर्ट में याचिका: झारखंड हाइकोर्ट में जेएसएससी सहायक आचार्य नियुक्ति के प्रावधानों को चुनौती, जानिये पारा शिक्षकों ने किन बिंदुओं पर दायर की है याचिका

रांची: झारखंड में एक बार फिर शिक्षक भर्ती अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सहायक आचार्य नियुक्ति (विज्ञापन संख्या 04/2026) को कोर्ट में चुनौती दी गयी है। जानकारी के मुताबिक भर्ती के कुछ प्रमुख प्रावधानों के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका राम प्रकाश यादव एवं अन्य पारा शिक्षकों द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें विज्ञापन की कई शर्तों और नियमों पर कड़ी आपत्ति जताई गई है।
याचिका में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जताई गई आपत्ति:
• आरक्षण और चयन प्रक्रिया: याचिका में आरक्षण के प्रावधानों तथा अनारक्षित पदों पर चयन प्रक्रिया की शर्तों को चुनौती दी गई है।
• न्यूनतम अर्हता अंक: न्यूनतम अर्हता अंकों से जुड़े नियमों पर भी आपत्ति दर्ज कराई गई है।
• टीईटी पात्रता शर्त: विज्ञापन की उस शर्त को भी चुनौती दी गई है जिसके तहत आरक्षित श्रेणी के अंकों के आधार पर जेटेट (JTET) या अन्य टीईटी परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को केवल आरक्षित वर्ग के पदों के लिए ही पात्र माना जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं का आग्रह है कि इन विवादित शर्तों को रद्द किया जाए और पात्र अभ्यर्थियों को मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों पर भी अवसर प्रदान किया जाए।
शून्य रिक्तियों और रोस्टर पर सवाल
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि मेरिट में आने वाले योग्य अभ्यर्थियों को अनारक्षित (जनरल) पदों के चयन से बाहर रखना पूरी तरह अनुचित है, खासकर तब जब संबंधित आरक्षित वर्गों में रिक्तियां शून्य (0) दर्शाई गई हों।
उदाहरण के तौर पर, याचिकाकर्ताओं ने बताया कि:
• कक्षा 1 से 5 के लिए इंटरमीडिएट प्रशिक्षित सहायक आचार्य के 1,909 पदों पर
• स्नातक प्रशिक्षित (सामाजिक विज्ञान) के 660 नियमित पदों पर
अत्यंत पिछड़ा वर्ग-I (EBC-I) और पिछड़ा वर्ग-II (BC-II) के लिए रिक्तियों की संख्या शून्य दर्शाई गई है। याचिका में मांग की गई है कि इन वर्गों के लिए शून्य पद निर्धारित करने के आधार को स्पष्ट किया जाए और इसके लिए मूल आरक्षण रोस्टर तथा पूर्व नियुक्तियों का श्रेणीवार ब्योरा अदालत के समक्ष पेश किया जाए।












