Sharad Purnima 2026: 30 साल बाद शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग! जानें पूजा का समय, शुभ योग और क्या करें
शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर 2026, रविवार की रात मनाई जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पूर्णिमा तिथि सुबह 10:40 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 9:40 बजे तक रहेगी। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रमा को अर्घ्य, खीर का भोग और दान-पुण्य करने की परंपरा है। पूजा के सटीक समय और शुभ योगों में ध्यान दें।

शरद पूर्णिमा 2026: शरद ऋतु की साफ-सुथरी चांदनी, पूर्ण चंद्रमा की शीतल आभा और मां लक्ष्मी की आराधना—शरद पूर्णिमा का पर्व धार्मिक आस्था में विशेष स्थान रखता है। मान्यता है कि आश्विन मास की इस पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी की पूजा, दीपदान और जागरण करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। इस बार शरद पूर्णिमा की तिथि, पूजा के समय और शुभ योगों को लेकर श्रद्धालुओं के बीच उत्सुकता है।
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर 2026, रविवार को सुबह 10:40 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:40 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार 25 अक्टूबर की रात शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। हालांकि, पूजा का सही समय और तिथि से जुड़े नियम स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
शरद पूर्णिमा पर क्यों खास मानी जाती है चांदनी रात?
शरद पूर्णिमा को कई स्थानों पर कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर देवी की कृपा होती है। इसी विश्वास के कारण कई परिवारों में रात के समय पूजा, भजन, मंत्र-जप और जागरण किया जाता है।
इस पर्व का संबंध चंद्रमा की पूजा और प्रकृति के बदलते मौसम से भी है। वर्षा ऋतु के बाद आसमान साफ होने लगता है और चांदनी रात का सौंदर्य देखते ही बनता है। यही वजह है कि शरद पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का अवसर नहीं, बल्कि परिवार के साथ धार्मिक परंपराएं निभाने और मन को शांत रखने का भी पर्व है।
शरद पूर्णिमा 2026: तिथि और पूजा का समय
- पर्व: शरद पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा
- दिन: रविवार, 25 अक्टूबर 2026
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 25 अक्टूबर, सुबह 10:40 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 26 अक्टूबर, सुबह 9:40 बजे
- पूजा का समय: स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा के अनुसार
ये समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर दिए गए हैं। पूजा का समय तय करने से पहले अपने शहर के पंचांग से पुष्टि कर लें।
शुभ योगों को लेकर क्या है मान्यता?
शरद पूर्णिमा पर हर्षण योग, वज्र योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और महालक्ष्मी योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ योगों को पूजा-पाठ, दान और नए कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, इन योगों के नाम और उनके सटीक समय की पुष्टि के लिए स्थानीय पंचांग देखना जरूरी है, क्योंकि योगों की गणना तिथि, नक्षत्र और स्थान के अनुसार की जाती है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ लोग खरीदारी, संपत्ति से जुड़े काम या नए कार्य की शुरुआत करना शुभ मानते हैं। फिर भी निवेश, संपत्ति की खरीद या किसी बड़े वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित तथ्यों, बजट और जोखिमों का आकलन करना चाहिए।
शरद पूर्णिमा पर ऐसे करें मां लक्ष्मी की पूजा
1. सुबह स्नान और संकल्प लें
सुबह स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत या पूजा का संकल्प ले सकते हैं।
2. मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की आराधना करें
पूजा स्थल को साफ करके मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। पुष्प, फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें।
3. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें
रात में चंद्रमा के दर्शन होने पर अपनी परंपरा के अनुसार जल अर्पित कर सकते हैं। अर्घ्य देते समय सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।
4. खीर का भोग लगाएं
शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा कई परिवारों में प्रचलित है। पूजा के बाद खीर को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। दूध से बनी खीर को पूरी रात खुले में रखने के बजाय ढककर सुरक्षित तापमान पर रखना चाहिए।
5. भजन, मंत्र-जप और जागरण करें
श्रद्धालु रात में मां लक्ष्मी के भजन, मंत्र-जप और पूजा-अर्चना कर सकते हैं। जागरण का तरीका और अवधि अपनी आस्था, स्वास्थ्य और सुविधा के अनुसार रखें।
शरद पूर्णिमा पर क्या करना माना जाता है शुभ?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इस दिन कुछ कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है:
- मां लक्ष्मी की पूजा और दीपदान करना।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना।
- परिवार के साथ पूजा और भजन में शामिल होना।
- चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देना।
- खीर बनाकर भगवान को भोग लगाना और प्रसाद बांटना।
- घर की साफ-सफाई और पूजा स्थल की व्यवस्था पर ध्यान देना।
इन कार्यों को आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाता है। पूजा का उद्देश्य श्रद्धा, सद्भाव और जरूरतमंदों की सहायता जैसे मूल्यों को अपनाना भी है।
चांदनी में खीर रखने की परंपरा का क्या है रहस्य?
शरद पूर्णिमा की बात हो और खीर का जिक्र न आए, ऐसा कम ही होता है। कई घरों में इस रात दूध, चावल, चीनी और मेवों से खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा है। लोकमान्यता में इसे अमृत के समान माना जाता है और अगले दिन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
हालांकि, चांदनी में रखने से खीर में विशेष औषधीय गुण आ जाने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दूध से बनी खीर को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखने से भोजन खराब होने का जोखिम रहता है। इसलिए खीर को ढककर रखें और सुरक्षित रखने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल करें।
ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को लेकर क्या कहा गया है?
ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे के अनुसार, इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा मीन एवं मेष राशि तथा मंगल कर्क राशि में रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहों की स्थिति को व्यक्ति के जीवन और शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, ग्रहों की सटीक स्थिति और राशि परिवर्तन की पुष्टि के लिए विश्वसनीय पंचांग या खगोलीय गणना देखना उचित है।
शरद पूर्णिमा का संदेश: आस्था के साथ बांटें खुशियां
शरद पूर्णिमा का पर्व मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रमा के प्रति श्रद्धा और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर है। इस रात श्रद्धालु सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। पूजा, दान और प्रसाद बांटने की परंपरा के साथ यह पर्व लोगों को कृतज्ञता और आपसी सद्भाव का संदेश भी देता है।












