कोर्ट का बड़ा फैसला: DC आफिस की संपत्ति कुर्क करने का आदेश, कोर्ट ने कहा—‘डीसी साहब कोर्ट से हाइड एंड सीक खेल रहे हैं’
Major court decision: Order to confiscate DC office property, court says, "DC sahab is playing hide and seek with the court."

Court News /18.1.25: कोर्ट के आदेश की नाफरमानी डीसी को महंगा पड़ गया। कोर्ट ने उपायुक्त की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। यह मामला वर्षों पुराने वाहन दुर्घटना क्लेम से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं किया गया। जिला जज-4 अनिल कुमार की अदालत ने जिलाधिकारी कार्यालय की संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी कर दिया है। पूरा मामला बिहार के रोहतास जिले का है।
आदेश की अवहेलना पर कोर्ट सख्त
अदालत ने अपने आदेश में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जिलाधिकारी द्वारा न्यायालय के निर्देशों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया के साथ “लुका-छिपी (हाइड एंड सीक)” खेलने जैसा है।इस मामले में पहले ही 23 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी पर आदेश की अवहेलना के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका था।
इसके बावजूद न तो उक्त राशि जमा की गई और न ही निष्पादन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि पर्याप्त समय दिए जाने के बाद भी आदेश का पालन नहीं होना, न्यायिक व्यवस्था की अवमानना के समान है। इसी कारण अदालत को यह कठोर कदम उठाना पड़ा।अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि कुर्की की कार्रवाई तब तक जारी रहेगी, जब तक जुर्माने की राशि के साथ-साथ निर्गत (निर्णीत) रकम की पूरी वसूली नहीं हो जाती।
जानिये क्या है पूरा मामला?
यह मामला दावा वाद संख्या 113/2003 से जुड़ा हुआ है, जो वर्ष 2003 में दाखिल किया गया था। इस मामले में न्यायालय ने आवेदक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, सासाराम को 3 लाख 43 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि बीमा कंपनी पहले पीड़ित को राशि का भुगतान करे और बाद में चाहे तो वाहन स्वामी से वसूली कर सकती है।
इसके बाद ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने वर्ष 2014 में वाहन स्वामी के खिलाफ इजराय वाद संख्या 01/2014 दाखिल किया। हालांकि, बीते लगभग 11 वर्षों में भी वाहन स्वामी द्वारा निर्णीत राशि का भुगतान नहीं किया गया।
DM से मांगी गई थी रिपोर्ट
इस मामले में कोर्ट ने बीमा कंपनी के माध्यम से राशि की वसूली को लेकर जिलाधिकारी, रोहतास से रिपोर्ट तलब की थी। लेकिन अदालत के अनुसार, इस दिशा में प्रशासन की ओर से कानूनी कार्रवाई में गंभीर शिथिलता बरती गई। इससे नाराज होकर कोर्ट ने पहले जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपये का स्थगन शुल्क कोर्ट नजारत में तत्काल जमा करने का आदेश दिया था, जिसे भी नजरअंदाज किया गया।
पुलिस बल उपलब्ध कराने का निर्देश
अब अदालत ने नगर थाना अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि कुर्की की कार्रवाई के लिए नाजिर को आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। साथ ही यह भी कहा गया है कि पूरी प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर अदालत को इसकी सूचना दी जाए।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप
अदालत के इस आदेश के बाद जिला प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। DM कार्यालय की संपत्ति कुर्क किए जाने के आदेश को लेकर जिलेभर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है कि न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।








