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शिबू सोरेन को पद्म भूषण दिये जाने पर पुत्र बसंत सोरेन ने क्या कहा ? रघुवर दास से लेकर सुदेश महतो तक की प्रतिक्रिया पढ़िये, झामुमो ने कहा, पद्म सम्मान के लिए धन्यवाद, लेकिन भारत रत्न भी मिले…

What did Shibu Soren's son, Basant Soren, say about being awarded the Padma Bhushan? Read the reactions from Raghubar Das to Sudesh Mahto. The JMM said, "Thank you for the Padma award, but you should also receive the Bharat Ratna..."

Shibu Soren : झारखंड आंदोलन के प्रणेता, पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक नेता दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन को भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा की है। इस सम्मान पर राज्य की राजनीति और समाज में व्यापक स्वागत देखने को मिला है। भाजपा, आजसू, झामुमो समेत विभिन्न दलों के नेताओं और झारखंड आंदोलनकारियों ने इसे झारखंड की मिट्टी, संघर्ष और आदिवासी समाज के सम्मान से जोड़ा है।

केंद्र सरकार ने रविवार को पद्म पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें लोक कल्याण, सामाजिक न्याय और जनआंदोलन के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए गुरुजी का नाम शामिल किया गया है। इस घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी और गर्व का माहौल है।भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि झारखंड की मिट्टी और उसकी संघर्षशील परंपरा का सम्मान है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धेय गुरुजी का संपूर्ण जीवन जनकल्याण के लिए समर्पित रहा। गुरुजी ने झारखंड में व्याप्त अशिक्षा, नशाखोरी और सूदखोरी के खिलाफ लंबा और निर्णायक संघर्ष किया। आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार लगातार झारखंड के अमर शहीदों, कलाकारों और समाजसेवियों को पद्म अलंकरण से सम्मानित कर राज्य के गौरव को बढ़ा रही है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी प्रमुख सुदेश महतो ने भी इस घोषणा पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान गुरुजी के लंबे राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष की पहचान है, साथ ही यह झारखंडी जनता के स्वाभिमान और गौरव को भी नई ऊंचाई देता है। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन में गुरुजी की भूमिका ऐतिहासिक रही है और इस सम्मान की घोषणा से पूरे राज्य में खुशी की लहर है।

गुरुजी के पुत्र और झामुमो विधायक बसंत सोरेन ने केंद्र सरकार को इस निर्णय के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि सरकार को उनके योगदान को देखते हुए भारत रत्न देने पर भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान गुरुजी के उस जीवन का सम्मान है, जो जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित रहा।

आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि गुरुजी से झारखंड आंदोलन के सभी कार्यकर्ताओं ने संघर्ष की प्रेरणा ली है। उनके सम्मान से हर झारखंड आंदोलनकारी खुद को सम्मानित महसूस कर रहा है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने इसे पूरे आदिवासी समाज का सम्मान बताया और एनडीए सरकार के प्रति आभार प्रकट किया।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। किशोरावस्था में ही पिता की हत्या के बाद उनका जीवन संघर्षों से भर गया। उन्होंने महाजनी शोषण, जमीन की लूट और सामाजिक अन्याय के खिलाफ आंदोलन खड़ा किया। जल, जंगल और जमीन की रक्षा उनके जीवन का केंद्रीय उद्देश्य रहा। नशामुक्ति, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता के लिए उनके प्रयासों ने आदिवासी और मूलवासी समाज को नई दिशा दी।

चार दशकों तक वे झारखंड आंदोलन का चेहरा रहे। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने, आठ बार दुमका से सांसद चुने गए और राज्यसभा सदस्य व केंद्रीय मंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में उनके निधन के बाद भी उनका विचार और संघर्ष आज जन-जन को प्रेरित कर रहा है।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने भी पद्म भूषण सम्मान दिए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुजी ने हाशिये पर खड़े आदिवासी समाज को देश की मुख्यधारा में आवाज दी। उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा पहले ही सर्वसम्मति से गुरुजी को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुकी है। गुरुजी की विरासत झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के सामाजिक न्याय के संघर्षों में एक अमिट अध्याय बनकर सदैव जीवित रहेगी।

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