Jharkhand Finance News: सरकार ने 18,901 करोड़ रुपये वापस मंगाने का लिया फैसला, जानिए क्या हैं PL खाते और क्यों हुआ यह बड़ा निर्णय
Jharkhand News: 18,901 करोड़ रुपये वापस मंगाएगी सरकार, जानिए क्या हैं PL खाते और क्यों लिया गया फैसलाJharkhand PL Account, PL Account News, Radhakrishna Kishore, Jharkhand Finance News, FRBM Act, Jharkhand Government Funds, Treasury News, Financial Discipline, Jharkhand Budget News, Government Finance

रांची। झारखंड में वित्तीय अनुशासन मजबूत करने और सरकारी धन के बेहतर उपयोग के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों के पर्सनल लेजर (PL) खातों में जमा 18,901.74 करोड़ रुपये की राशि को वापस सरकारी खजाने (राजकोष) में जमा कराने का निर्देश दिया है। इस संबंध में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने वित्त विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। सरकार का मानना है कि बड़ी मात्रा में सरकारी धन वर्षों से विभिन्न विभागों के पीएल खातों में पड़ा हुआ है, जबकि उसका उपयोग विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।
आखिर क्या होते हैं PL खाते?
अगर आसान भाषा में समझें तो पर्सनल लेजर (PL) खाते ऐसे विशेष बैंक खातों की तरह होते हैं, जिनमें सरकारी विभाग किसी विशेष उद्देश्य या योजना के लिए राशि रख सकते हैं।इन खातों का मकसद जरूरत पड़ने पर विभागों को जल्दी भुगतान करने की सुविधा देना होता है। लेकिन कई बार विभाग बड़ी रकम इन खातों में जमा कर देते हैं और वर्षों तक उसका उपयोग नहीं हो पाता। इससे सरकारी धन निष्क्रिय पड़ा रहता है।
सरकार को क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
दरअसल वित्त विभाग की समीक्षा में पाया गया कि कई विभागों के पीएल खातों में हजारों करोड़ रुपये जमा हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से बड़ी राशि किस उद्देश्य से रखी गई है या उसका उपयोग कब किया जाएगा।वित्त मंत्री ने इसे वित्तीय अनुशासन के खिलाफ बताते हुए कहा कि जब सरकार को विकास कार्यों और जनहित योजनाओं के लिए धन की आवश्यकता होती है, तब इतनी बड़ी राशि का खातों में निष्क्रिय पड़े रहना उचित नहीं है।
FRBM कानून से भी जुड़ा है मामला
हेमंत सरकार ने इस फैसले के पीछे एक महत्वपूर्ण वित्तीय कारण भी बताया है। FRBM (Fiscal Responsibility and Budget Management) Act के तहत राज्यों के लिए कर्ज लेने और वित्तीय घाटे की सीमाएं निर्धारित होती हैं। यदि बड़ी मात्रा में धन विभिन्न खातों में निष्क्रिय पड़ा रहता है, तो राज्य की वास्तविक वित्तीय स्थिति प्रभावित होती है और वित्तीय प्रबंधन पर दबाव बढ़ता है।सरकार का मानना है कि इन खातों में जमा राशि को वापस राजकोष में लाने से वित्तीय स्थिति अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी।
किन विभागों के खातों में सबसे ज्यादा राशि?
वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि कई प्रमुख विभागों के पीएल खातों में भारी धनराशि जमा है।| ऊर्जा विभाग में ₹3,943 करोड़, नगर विकास विभाग में ₹2,876 करोड़, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में ₹1,957 करोड़, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग में ₹1,922 करोड़ और भवन निर्माण विभाग में ₹1,776 करोड़। इन पांच विभागों के खातों में ही हजारों करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं।
पिछले चार वर्षों का भी होगा ऑडिट
सरकार ने केवल वर्तमान राशि वापस मंगाने का फैसला नहीं किया है, बल्कि पिछले चार वर्षों के दौरान पीएल खातों में जमा की गई रकम की भी समीक्षा करने का निर्णय लिया है।जहां आवश्यकता नहीं पाई जाएगी, वहां राशि वापस राजकोष में जमा कराई जाएगी।
भविष्य में नहीं चलेगी मनमानी
सरकार ने भविष्य के लिए भी सख्त नियम बनाने का निर्णय लिया है।अब कोई भी विभाग अपनी मर्जी से पीएल खातों में बड़ी राशि जमा नहीं कर सकेगा। किसी खाते में धनराशि रखने से पहले उसका स्पष्ट उद्देश्य, उपयोग और वित्त विभाग की अनुमति जरूरी होगी।सरकार का मानना है कि इससे सरकारी धन का बेहतर उपयोग होगा और विकास योजनाओं के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह राशि वापस सरकारी खजाने में आती है तो इसका उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा सकता है।सरल शब्दों में कहें तो सरकार अब उस पैसे को वापस उपयोग में लाना चाहती है जो वर्षों से विभिन्न खातों में निष्क्रिय पड़ा हुआ था। इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है।








