सुनिये मंत्री जी! 5 महीने से वेतन के अभाव में भुखमरी के कगार पर पहुंचे 500 डॉक्टर- स्वास्थ्यकर्मी.. प्रभारी मौन, कर्मियों का फूटा गुस्सा, कभी भी बंद हो सकती हैं स्वास्थ्य सेवा
Listen, Minister! 500 doctors and health workers are on the brink of starvation due to the non-payment of salaries for five months. The official in charge remains silent, the staff's anger has boiled over, and health services could shut down at any moment.

धनबाद/गोविंदपुर: राज्य में हेमंत सरकार एक ओर जहां अस्पताल खोलने के लिए अपनी तिजोरी खोल दी है, वहीं राज्य के स्वास्थ्य कर्मी और चिकित्सक को 5 महीने से वेतन नहीं मिल पाया है। हकीकत तो ये है कि 2 जुलाई को हेमंत कैबिनेट ने RIMS 2 के लिए करीब 41 अरब राशि की स्वीकृति दी वही आवंटन आने के करीब 1 माह होने के बावजूद कर्मियों और डॉक्टर को वेतन नहीं मिल पाया है। शर्मिंदगी तो तब और बढ़ जाती है जब संस्थान के प्रभारी तमाम मुद्दे पर चुप्पी साध लेते है।
ताजा मामला धनबाद जिले के गोविंदपुर प्रखंड का है जहां CHC गोविंदपुर अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले 5 महीनों से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। वेतन भुगतान में लगातार हो रही देरी से कर्मचारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कर्मचारियों का कहना है कि नियमित रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा करीब 1 माह पूर्व ही राशि आवंटित कर दी गई है उसके बावजूद कार्यालय कर्मियों और प्रभारी के तालमेल के अभाव में अब तक वेतन नहीं मिल पाया है।जबकि जिले के अन्य प्रखंड में वेतन भुगतान नहीं हो चुका है।
स्वास्थ्य सेवाएं को राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी जिन कर्मियों के कंधे पर हो उन्हें समय पर वेतन न दे पाने की स्थिति में उनके ईमानदारी पूर्वक दायित्व निर्वहन की उम्मीद लगाना पूर्णतः बेमानी होगी। एक ओर जहां राज्य की अदालते अनुबंध कर्मियों के शोषण पर कड़े निर्णय दे रही हो वहां कर्मी अपने न्यूनतम मानदेय के लिए तरस रहे हों वैसे में योजनाओं को धरातल पर कैसे उतारा जाय ये चिंतन का विषय है।
5 महीने से नहीं दिया वेतन
सूत्र ये बताते है गोबिंदपुर प्रखंड में ही फरवरी 26 का भी वेतन भुगतान नहीं किया गया था जिस वजह से वेतन भुगतान डॉक्टर और कर्मियों का 5 महीने से लंबित हो चुका है जबकि अन्य प्रखंड में वित्तीय वर्ष 2025 -26 में फरवरी 26 तक भुगतान पहले किया जा चुका था और वित्तीय वर्ष 2026-27 में आवंटन आने के साथ बचे हुए माह का भुगतान किया जा चुका है।
मालूम हो कि 5 माह से लंबित कर्मी अनुबंध के आधार पर कार्यरत है और उन्हें न्यूनतम मानदेय के अलाव कुछ भी दे नहीं हैं ऐसे में अपना और अपने परिवार का जीवन यापन करना बमुश्किल साबित हो रहा हैं। आश्चर्य की बात तो ये भी की जहां कर्मी को 5 माह से वेतन नहीं मिला है वहीं संस्थान के प्रभारी को नियमित वेतन मिल रहा है।
विभागीय सूत्रों की माने तो कर्मियों को समय से वेतन देना संस्थान के प्रभारी (MOIC ) का दायित्य है।इसमें आने वाले कठिनाई की दूर करना भी उनका दायित्व है। विभागीय प्रक्रिया के कारण आवंटन जारी होने में देरी की समस्या जा सकता है परंतु आवंटन के बावजूद कर्मियों को वेतन न दे पाना प्रशासनिक विफलता है
गुस्से में स्वास्थ्य कर्मी
स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि वे कई बार संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। वेतन नहीं मिलने के कारण बच्चों की स्कूल फीस, घर का किराया, बैंक की किस्तें और दैनिक खर्चों का प्रबंधन करना मुश्किल हो गया है।
5 महीने से वेतन के अभाव का दंश झेल रहे कर्मियों में डॉक्टर, ANM, स्वास्थ्य कर्मी, सहिया, सहिया साथी, आयुष चिकित्सक सहित अन्य शामिल हैं।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द वेतन का भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रखने में NHM कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
हालांकि, इस मामले में जिला स्वास्थ्य विभाग या NHM प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हाल के दिनों में अन्य राज्यों में भी NHM कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान में देरी को लेकर विरोध दर्ज कराया गया है।









