Bhuihar Tribe ST Certificate : भुइहर समुदाय की याचिका हाईकोर्ट पहुंची, नाम की एक ‘गलती’ पर अटक सकते हैं हजारों लोगों के ST अधिकार! जानिये क्या है पूरा मामला
झारखंड हाईकोर्ट में भुइहर समुदाय की ओर से PIL दायर। अनुसंधान रिपोर्ट में नाम की कथित त्रुटि सुधारने की मांग, कहा- नहीं सुधरी गलती तो हजारों लोगों को ST प्रमाण-पत्र और आरक्षण लाभ में परेशानी हो सकती है।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट में भुइहर समुदाय से जुड़ा एक अहम मामला पहुंचा है। ‘भुइहर ट्राइब राइट्स होल्डर्स कमेटी’ ने जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर दावा किया है कि अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किए जाने की प्रक्रिया के दौरान तैयार अनुसंधान रिपोर्ट में समुदाय के नाम को गलत तरीके से दर्ज किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यदि इस तकनीकी त्रुटि को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो भविष्य में हजारों लोगों को ST प्रमाण-पत्र बनवाने और आरक्षण सहित अन्य संवैधानिक अधिकारों का लाभ लेने में गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
नई जनजाति जोड़ने की नहीं, सिर्फ नाम सुधारने की मांग
याचिका अधिवक्ता अच्युत स्वरूप मिश्र के माध्यम से दाखिल की गई है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि अदालत से किसी नई जनजाति को ST सूची में शामिल करने का निर्देश नहीं मांगा गया है। मांग सिर्फ इतनी है कि अनुसंधान रिपोर्ट और उससे जुड़े सरकारी दस्तावेजों में समुदाय का नाम वही दर्ज किया जाए, जो आधिकारिक भूमि अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है।
2020 से चल रही है अनुसंधान प्रक्रिया
याचिका के मुताबिक, वर्ष 2020 में झारखंड सरकार ने भुइहर समुदाय को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए डॉ. रामदयाल मुंडा ट्राइबल वेलफेयर रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI) को सामाजिक, सांस्कृतिक और नृवंशीय अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गई। विस्तृत अध्ययन के बाद संस्थान ने समुदाय को ST सूची में शामिल किए जाने की अनुशंसा की।
2024 की अंतिम रिपोर्ट में सामने आई विवाद की वजह
बताया गया कि वर्ष 2021 में राज्य सरकार ने अपनी अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजी। वर्ष 2023 में भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) ने अतिरिक्त जानकारी मांगी, जिसके बाद TRI ने दोबारा अध्ययन कर 11 दिसंबर 2024 को अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इसी अंतिम रिपोर्ट के शीर्षक में समुदाय का नाम “भूईंहर मुंडा/भुईंहर” लिखा गया है, जबकि छोटानागपुर काश्तकारी (CNT) अधिनियम, 1908 के तहत तैयार खतियानों और राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक नाम सिर्फ “भुइहर” दर्ज है।
हजारों लोगों के ST प्रमाण-पत्र पर पड़ सकता है असर
याचिका में कहा गया है कि यदि भविष्य में केंद्र सरकार इसी त्रुटिपूर्ण नाम के आधार पर अधिसूचना जारी करती है, तो सरकारी रिकॉर्ड और भूमि अभिलेखों में नाम अलग-अलग हो जाएंगे। इससे ST प्रमाण-पत्र जारी करने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और आरक्षण से जुड़े अधिकारों के उपयोग में गंभीर कानूनी एवं प्रशासनिक बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि स्पष्ट त्रुटि होने के बावजूद उसे ठीक नहीं किया गया। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15(4), 16(4), 21 और 46 के तहत प्राप्त समानता, सामाजिक न्याय और संरक्षण के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
याचिका में अदालत से अनुरोध किया गया है कि राज्य सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह TRI की अंतिम रिपोर्ट, उसके शीर्षक और संबंधित सभी सरकारी दस्तावेजों में समुदाय का नाम संशोधित कर “भुइहर” दर्ज करे और संशोधित अनुशंसा भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय तथा रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को भेजे।
हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें
मामला फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अब अदालत के फैसले पर समुदाय के लोगों के साथ-साथ प्रशासन की भी नजरें टिकी हैं। यदि अदालत याचिकाकर्ताओं की मांग स्वीकार करती है, तो यह भविष्य में ST प्रमाण-पत्र और अन्य संवैधानिक अधिकारों से जुड़े संभावित विवादों को टालने में अहम साबित हो सकता है।








