एक्सीडेंट के 12 साल बाद ट्रक चालक की पत्नी को मिला न्याय, हाईकोर्ट ने ब्याज, जुर्माना और अंतिम संस्कार खर्च देने का दिया आदेश, पुराने आदेश को बदला
रांची हाईकोर्ट ने गिरिडीह सड़क हादसे में मृत ट्रक चालक की पत्नी को मुआवजे के साथ ब्याज, 50% जुर्माना और अंतिम संस्कार खर्च देने का आदेश दिया। जानिए सड़क हादसे में मुआवजे के कानूनी प्रावधान।

रांची। झारखंड के गिरिडीह में हुए सड़क हादसे में ट्रक चालक लक्ष्मण मंडल की मौत के करीब 12 वर्ष बाद उनकी पत्नी सुदामा देवी को कोर्ट से न्याय मिला है। हाईकोर्ट ने मृतक की पत्नी को बड़ी कानूनी राहत देते हुए राशि भुगतान का आदेश दिया है। रांची हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मुआवजे के साथ दुर्घटना की तारीख से ब्याज, 50 प्रतिशत जुर्माना और अंतिम संस्कार का खर्च भी देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम के तहत समय पर मुआवजा नहीं देने पर ब्याज और जुर्माना देना कानूनन आवश्यक है।यह फैसला हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की एकलपीठ ने सुनाया। अदालत ने वर्ष 2014 में देवघर श्रम न्यायालय द्वारा पारित आदेश में संशोधन करते हुए कहा कि मृतक की पत्नी को समय पर पूरा कानूनी लाभ नहीं मिला था।
समय पर मुआवजा नहीं मिला, इसलिए मिला अतिरिक्त लाभ
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 एक कल्याणकारी कानून है, जिसका उद्देश्य कार्य के दौरान दुर्घटना का शिकार हुए कर्मचारियों और उनके आश्रितों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।
कोर्ट ने कहा कि यदि दुर्घटना के एक माह के भीतर मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो कानून के अनुसार ब्याज देना अनिवार्य है। वहीं, उचित परिस्थितियों में संबंधित पक्ष पर 50 प्रतिशत तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
श्रम न्यायालय के आदेश में किया संशोधन
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह माना कि श्रम न्यायालय ने अपने आदेश में ब्याज, जुर्माना और अंतिम संस्कार खर्च जैसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधानों पर विचार नहीं किया था। इसी वजह से आदेश में संशोधन करते हुए बीमा कंपनी को सभी वैधानिक लाभों का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।इस फैसले को कर्मचारी हितों की सुरक्षा और समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जानिए: सड़क हादसे में मुआवजे का क्या है कानूनी प्रावधान?
सड़क दुर्घटना में मौत या गंभीर चोट की स्थिति में मुआवजा मिलने का प्रावधान दुर्घटना की परिस्थितियों और लागू कानून पर निर्भर करता है।
यदि मृतक वाहन चालक या कर्मचारी हो
अगर चालक किसी वाहन मालिक के यहां कार्यरत था और ड्यूटी के दौरान हादसे में उसकी मौत हो जाती है, तो उसके आश्रित कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम, 1923 (Employees’ Compensation Act) के तहत मुआवजे के हकदार होते हैं। यदि वाहन का वैध बीमा है, तो बीमा कंपनी भी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार भुगतान करती है।
अगर किसी दूसरे वाहन की लापरवाही से हादसा हुआ हो
ऐसी स्थिति में मृतक के परिजन मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में दावा प्रस्तुत कर सकते हैं। वहां मुआवजे की राशि मृतक की आय, उम्र, आश्रितों की संख्या और अन्य तथ्यों के आधार पर तय की जाती है।
वाहन मालिक की क्या जिम्मेदारी होती है?
यदि दुर्घटना ड्यूटी के दौरान हुई है, तो कानून के अनुसार मुआवजा दिलाने की प्राथमिक जिम्मेदारी वाहन मालिक की होती है। बीमा होने की स्थिति में बीमा कंपनी भुगतान करती है, लेकिन बीमा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में वाहन मालिक पर भी आर्थिक दायित्व आ सकता है।
समय पर मुआवजा नहीं मिला तो क्या होगा?
यदि निर्धारित समय के भीतर मुआवजा नहीं दिया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय परिस्थितियों के अनुसार ब्याज, जुर्माना और कुछ मामलों में अंतिम संस्कार खर्च देने का भी आदेश दे सकता है।
नोट: मुआवजे की राशि और भुगतान की जिम्मेदारी प्रत्येक मामले के तथ्यों, बीमा पॉलिसी और लागू कानून के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।






