High Court: अनुकंपा पर नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत, नियमित वेतनमान और सभी लाभ देने का आदेश
हाईकोर्ट ने अनुकंपा पर नियुक्त शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए नियमित वेतनमान और सभी सेवा लाभ देने का आदेश दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार के 2019 के आदेश को रद्द कर दिया।

Highcourt News। हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्त शिक्षकों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि समान परिस्थितियों में नियुक्त कर्मचारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन है। पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के एक आदेश को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताते हुए निरस्त कर दिया तथा प्रभावित शिक्षकों को नियमित वेतनमान और अन्य सभी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया।
2006 से पहले किया था अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन
जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने तीन रिट याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए 29 पन्नों का फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने वर्ष 2006 में लागू नई नियमावली से पहले ही अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर दिया था। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2003 और 2005 में लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उनके मामलों पर समय पर विचार नहीं किया गया।
बाद में 1 जुलाई 2006 के बाद जिला अनुकंपा समिति ने उनके नाम तृतीय वर्ग पदों के लिए अनुशंसित किए, लेकिन उन्हें नियमित पद के बजाय प्रखंड एवं नगर शिक्षक के रूप में नियत वेतन पर नियुक्त कर दिया गया।
कोर्ट ने देरी का ठीकरा आश्रितों पर फोड़ने से किया इनकार
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उनके पिता की मृत्यु 1 जुलाई 2006 से पहले हुई थी। इसलिए उनके मामलों का निपटारा उसी समय लागू नियमों के आधार पर होना चाहिए था, न कि बाद में लागू नई व्यवस्था के अनुसार।
अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि जिला अनुकंपा समिति की अनुशंसा एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। यदि इस प्रक्रिया में देरी होती है तो इसका खामियाजा मृत कर्मचारी के आश्रितों को नहीं भुगतना चाहिए।
सरकार का 2019 का आदेश रद्द
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के 7 मार्च 2019 के पत्र संख्या-336 को मनमाना, अवैध और भेदभावपूर्ण करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने अपने पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को अलग-अलग लाभ देना संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत है।
तीन महीने में नियमित वेतनमान देने का निर्देश
कोर्ट ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और प्राथमिक शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षकों को नियमित वेतनमान के साथ सभी सेवा संबंधी लाभ उपलब्ध कराए जाएं। इस पूरी प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा करने का आदेश भी दिया गया है।
इस फैसले को बिहार में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे ऐसे कई शिक्षकों को नियमित वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो सकता है, जिनकी नियुक्ति प्रशासनिक देरी के कारण पुराने नियमों के बजाय नई व्यवस्था के तहत की गई थी।




