JPSC 14वीं प्रारंभिक परीक्षा: जानिये क्या हैं वो 6 बिंदु, जिसे सुप्रीम कोर्ट में दिया गया है चैलेंज? OMR स्कैनिंग से रिजल्ट प्रक्रिया तक उठे सवाल
JPSC 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों को चुनौती दी गई है? OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट प्रक्रिया के ऑडिट समेत जानें पूरी मांग।

JPSC 14th Exam Supreme Court Case: झारखंड में JPSC का मुद्दा अब दिल्ली पहुंच गया है। 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को लेकर विवाद अब केवल परीक्षा रद्द कराने की मांग तक सीमित नहीं है। इस मामले सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं को चुनौती दी गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि परीक्षा के आयोजन से लेकर OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही।याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की मांग के साथ पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में किन मुद्दों को किया गया चैलेंज?
इस मामले में याचिका के जरिए मुख्य रूप से परीक्षा प्रक्रिया के कई चरणों को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। इनमें सबसे अहम मुद्दे ये हैं—
1. परीक्षा की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
याचिका में परीक्षा के आयोजन और उससे जुड़ी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। मांग की गई है कि किसी स्वतंत्र समिति के माध्यम से यह जांच हो कि परीक्षा निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कराई गई थी या नहीं।
यानी विवाद केवल परीक्षा केंद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
2. OMR स्कैनिंग प्रक्रिया पर स्वतंत्र ऑडिट की मांग
सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए प्रमुख मुद्दों में OMR स्कैनिंग भी शामिल है। याचिका में OMR शीट की स्कैनिंग और उससे जुड़े तकनीकी सिस्टम का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की गई है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि OMR शीट के स्कैन और उसके बाद डेटा प्रोसेसिंग में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
3. OMR कोडिंग को भी जांच के दायरे में लाने की मांग
याचिका में OMR की कोडिंग प्रक्रिया को लेकर भी स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
परीक्षा की पारदर्शिता के लिहाज से यह महत्वपूर्ण चरण है। इसलिए याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इसकी तकनीकी प्रक्रिया का भी स्वतंत्र परीक्षण कराया जाए।
4. मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल
याचिका में केवल OMR स्कैनिंग तक जांच सीमित रखने की मांग नहीं है। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
याचिका में इस पूरे चरण का स्वतंत्र ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
5. रिजल्ट तैयार करने वाली प्रणाली की जांच
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में रिजल्ट तैयार करने वाली तकनीकी प्रणाली के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी की गई है।
यानी परीक्षा के बाद प्राप्त डेटा से लेकर अंतिम परिणाम तैयार होने तक की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की गई है।
6. प्रश्नपत्र से लेकर परिणाम तक जांच
याचिका में परीक्षा प्रक्रिया को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय प्रश्नपत्र से लेकर रिजल्ट तक पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
इसमें परीक्षा संचालन, उत्तर पुस्तिकाओं का प्रसंस्करण, OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने जैसे चरण शामिल हैं।
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच समिति क्यों?
याचिका में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।याचिकाकर्ता का तर्क है कि परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के बीच उठे सवालों का समाधान स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच से ही हो सकता है। समिति को परीक्षा प्रक्रिया के सभी महत्वपूर्ण चरणों की जांच करने की मांग की गई है।
क्या सिर्फ जांच की मांग है या परीक्षा भी रद्द कराने को कहा गया है?
याचिका में दोनों मांगें की गई हैं।
पहली मांग पूरी परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और तकनीकी ऑडिट से जुड़ी है। दूसरी महत्वपूर्ण मांग 19 अप्रैल 2026 की प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परीक्षा रद्द करने का फैसला अभी नहीं हुआ है। यह याचिका में की गई मांग है। इस पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही होगा।
JPSC अभ्यर्थियों के लिए क्यों अहम है मामला?
14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े इस मामले में अदालत का रुख आगे की भर्ती प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि अदालत स्वतंत्र जांच या तकनीकी ऑडिट का आदेश देती है, तो परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई चरणों की दोबारा जांच हो सकती है।वहीं परीक्षा रद्द करने और दोबारा कराने की मांग पर अदालत क्या रुख अपनाती है, इसका सीधा असर परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने परीक्षा प्रक्रिया की कथित अनियमितताओं, तकनीकी ऑडिट, स्वतंत्र जांच और परीक्षा दोबारा कराने से जुड़ी मांगें रखी गई हैं।इन आरोपों को अभी अदालत में चुनौती के तौर पर देखा जाना चाहिए। परीक्षा में वास्तव में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, यह अदालत की सुनवाई, संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगा।










