Anant Chaturdashi 2026: 24 या 25 जानिये कब है अनंत चतुर्दशी, भगवान विष्णु की पूजा से लेकर गणपति विसर्जन तक, जानिए क्या है मान्यता और क्या कहते हैं अलग धार्मिक मत
Anant Chaturdashi 2026: जानें अनंत चतुर्दशी क्यों मनाई जाती है, अनंत सूत्र का महत्व क्या है और इस दिन गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है।

Anant Chaturdashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी या अनंत चौदस का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं में इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। वहीं देश के कई हिस्सों में इसी दिन 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन भी होता है और गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस बार अनंत चतुर्थी 25 सितंबर को मनाया जायेगा।
अनंत चतुर्दशी को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं में मान्यताएं और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं। इसलिए इस पर्व का महत्व समझने के लिए इसकी परंपरागत मान्यता के साथ इससे जुड़े विभिन्न धार्मिक मतों को भी जानना जरूरी है।
अनंत चतुर्दशी क्या है?
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप को समर्पित पर्व माना जाता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रद्धालु भगवान अनंत की पूजा करते हैं और सुख, समृद्धि, सुरक्षा तथा परिवार के कल्याण की कामना करते हैं।‘अनंत’ शब्द का अर्थ असीम या जिसका कोई अंत न हो, माना जाता है। इसी भाव के साथ भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना की जाती है।
अनंत सूत्र क्यों बांधा जाता है?
अनंत चतुर्दशी की प्रमुख परंपराओं में अनंत सूत्र धारण करना शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पवित्र धागा श्रद्धा और भगवान अनंत के प्रति आस्था का प्रतीक माना जाता है।
कई परंपराओं में अनंत सूत्र में 14 गांठें लगाई जाती हैं। पुरुष इसे दाहिनी कलाई और महिलाएं बाईं कलाई पर धारण करती हैं। हालांकि, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नियम और परंपराएं भिन्न हो सकती हैं।
अनंत चतुर्दशी से जुड़ी कथा
अनंत चतुर्दशी से जुड़ी धार्मिक कथा में सुशीला और कौंडिन्य का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, भगवान अनंत के प्रति श्रद्धा और व्रत के कारण परिवार को समृद्धि प्राप्त हुई।इस कथा के माध्यम से धार्मिक परंपरा में आस्था, संकल्प और व्रत के पालन का महत्व बताया जाता है।
गणेश उत्सव का भी होता है समापन
अनंत चतुर्दशी का एक और बड़ा महत्व गणेश उत्सव के समापन से जुड़ा है। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में गणेश चतुर्थी से शुरू होने वाले 10 दिवसीय उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है।
इस दिन श्रद्धालु गणपति बप्पा की पूजा और आरती के बाद उनकी प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जाते हैं। ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।हालांकि, गणेश प्रतिमा को कितने दिनों तक स्थापित रखा जाए और किस दिन विसर्जन किया जाए, इसकी परंपरा परिवार, क्षेत्र और स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
क्या अनंत चतुर्दशी को लेकर अलग धार्मिक मत भी हैं?
अनंत चतुर्दशी की पारंपरिक मान्यताओं के अलावा कुछ धार्मिक विचारधाराएं इस पर्व की प्रचलित पूजा-पद्धति को शास्त्रसम्मत नहीं मानतीं। ऐसे मतों में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16, श्लोक 23 का उल्लेख करते हुए कहा जाता है कि शास्त्रविधि को छोड़कर मनमाने ढंग से आचरण करने से आध्यात्मिक लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती।
इसी तरह कुछ धार्मिक मतों में अनंत चौदस के व्रत और पूजा को मोक्ष प्राप्ति की शास्त्रसम्मत साधना नहीं माना जाता। इन मतों में गीता के अध्याय 8 के श्लोक 16 और अध्याय 9 के श्लोक 7 का हवाला देते हुए जन्म-मरण और विभिन्न लोकों से जुड़े अलग-अलग आध्यात्मिक विचार प्रस्तुत किए जाते हैं।यह एक विशिष्ट धार्मिक व्याख्या है, जबकि अनंत चतुर्दशी की पूजा और व्रत को लेकर हिंदू समाज में लंबे समय से अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं।
गणेश विसर्जन को लेकर भी अलग-अलग परंपराएं
गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना और विसर्जन को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराएं देखने को मिलती हैं। कई परिवार और सार्वजनिक समितियां 10 दिनों तक गणेश प्रतिमा रखकर अनंत चतुर्दशी के दिन विसर्जन करती हैं।वहीं कुछ धार्मिक विचारधाराएं प्रतिमा को लंबे समय तक रखने और उसके बाद विसर्जन करने की परंपरा पर शास्त्रीय आधार को लेकर अलग मत रखती हैं।इसलिए गणेश उत्सव और अनंत चतुर्दशी से जुड़ी पूजा-पद्धति को समझते समय स्थानीय परंपरा और संबंधित धार्मिक मत दोनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
अनंत चतुर्दशी का दोहरा महत्व
अनंत चतुर्दशी को लेकर दो प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक पक्ष सामने आते हैं। पहला, यह भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा और अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा से जुड़ा पर्व है। दूसरा, देश के कई हिस्सों में यह गणेश उत्सव के समापन और गणपति विसर्जन का प्रमुख दिन है।इसी वजह से अनंत चौदस धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।












