किडनी स्टोन निकलने के बाद भी खतरा खत्म नहीं! ये 6 गलतियां दोबारा बना सकती हैं पथरी, जानिए बचाव का सही तरीका
किडनी स्टोन निकलने के बाद भी दोबारा पथरी बन सकती है। जानिए कम पानी, ज्यादा नमक, पशु प्रोटीन और डाइट से जुड़ी कौन-सी गलतियां खतरा बढ़ा सकती हैं।

Kidney Stone: आजकल पथरी की समस्या आम है। हालांकि कभी आपरेशन तो कभी सामान्य तरीके से भी पथरी निकल जाती है, लेकिन किडनी में बनी पथरी जब निकल जाती है तो अक्सर लोगों को लगता है कि अब समस्या पूरी तरह खत्म हो गई। लेकिन ऐसा हर बार नहीं होता। अगर पथरी बनने की असली वजह पर ध्यान नहीं दिया जाए तो कुछ समय बाद दोबारा स्टोन बनने का खतरा बना रह सकता है।
खासतौर पर कम पानी पीना, ज्यादा नमक खाना, जरूरत से ज्यादा पशु प्रोटीन लेना और अपनी डाइट में बिना सोचे बड़े बदलाव करना समस्या को बढ़ा सकता है।किडनी स्टोन एक जैसी नहीं होती। अलग-अलग लोगों में कैल्शियम ऑक्सालेट, यूरिक एसिड या दूसरे प्रकार की पथरी बन सकती है। इसलिए किसी एक व्यक्ति के लिए सही डाइट दूसरे व्यक्ति के लिए भी सही हो, यह जरूरी नहीं है। पथरी बार-बार बनने पर उसके प्रकार और संभावित कारण की जानकारी लेकर बचाव की रणनीति तय करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
पहली गलती- पथरी निकलते ही पानी पीना कम कर देना
कई लोग दर्द या पथरी निकलने के बाद कुछ दिनों तक खूब पानी पीते हैं, लेकिन परेशानी खत्म होते ही फिर पहले जैसी आदत में लौट जाते हैं।
शरीर में पर्याप्त तरल न पहुंचने पर पेशाब अधिक गाढ़ा हो सकता है। ऐसे में पेशाब में मौजूद कुछ खनिजों की सांद्रता बढ़ सकती है और क्रिस्टल बनने की संभावना बढ़ सकती है। यही क्रिस्टल आगे चलकर स्टोन का रूप ले सकते हैं।
इसलिए जिन लोगों को पहले किडनी स्टोन हो चुका है, उनके लिए पूरे दिन पर्याप्त तरल लेते रहना महत्वपूर्ण है। हालांकि, कितनी मात्रा में पानी या तरल लेना चाहिए, यह व्यक्ति की किडनी की स्थिति, मौसम, गतिविधि और चिकित्सकीय सलाह पर निर्भर करता है।
दूसरी गलती- खाने में छिपे नमक को नजरअंदाज करना
सिर्फ ऊपर से नमक कम कर देने से ही सोडियम का सेवन कम नहीं होता। पैकेज्ड स्नैक्स, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, अचार, प्रोसेस्ड फूड और कई तैयार खाद्य पदार्थों में भी सोडियम की मात्रा काफी हो सकती है।
ज्यादा सोडियम का सेवन कुछ लोगों में पेशाब के जरिए कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा सकता है। इससे कैल्शियम आधारित किडनी स्टोन बनने का जोखिम प्रभावित हो सकता है।
इसलिए पथरी के मरीजों के लिए सिर्फ नमकदानी से दूरी बनाना ही नहीं, बल्कि पैकेज्ड और अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थों की आदत पर भी नजर रखना जरूरी है।
तीसरी गलती- हर दिन जरूरत से ज्यादा मांस और पशु प्रोटीन लेना
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पशु-आधारित प्रोटीन का सेवन कुछ लोगों में किडनी स्टोन के जोखिम को प्रभावित कर सकता है।
मांस, मछली और अंडे जैसे खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है जिन्हें यूरिक एसिड स्टोन बनने की समस्या है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को मांस या अंडा पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। डाइट में बदलाव स्टोन के प्रकार और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से होना चाहिए।
चौथी गलती- ऑक्सालेट वाली चीजों को लेकर दो चरम रवैया
कैल्शियम ऑक्सालेट किडनी स्टोन वाले कुछ लोगों को पालक, मूंगफली, नट्स और अन्य ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थों की मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी जा सकती है।
लेकिन यहां भी एक आम गलती होती है—लोग इंटरनेट पर पढ़कर ऑक्सालेट वाली हर चीज को पूरी तरह बंद कर देते हैं।
ऐसा जरूरी नहीं है। हर व्यक्ति को समान खाद्य पदार्थों से समान समस्या नहीं होती। इसलिए स्टोन के प्रकार और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर ही डाइट में बदलाव करना बेहतर होता है।
पांचवीं गलती- पथरी के डर से कैल्शियम पूरी तरह बंद कर देना
यह भी एक आम भ्रम है कि किडनी स्टोन होने पर कैल्शियम से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।
वास्तव में पर्याप्त डाइटरी कैल्शियम कुछ लोगों में भोजन से मिलने वाले ऑक्सालेट के अवशोषण को कम करने में मदद कर सकता है। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के दूध, दही या अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को पूरी तरह बंद करना सही रणनीति नहीं मानी जाती।
कैल्शियम की मात्रा कम करनी है या नहीं, यह स्टोन के प्रकार और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
छठी गलती- वजन और रोजमर्रा की आदतों को नजरअंदाज करना
किडनी स्टोन का मामला सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है। अधिक वजन भी किडनी स्टोन के जोखिम से जुड़ा पाया गया है।
नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त तरल और स्वस्थ वजन बनाए रखना समग्र रूप से फायदेमंद हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पथरी हो रही है तो केवल पानी की मात्रा बढ़ा देना पर्याप्त नहीं हो सकता। यह पता लगाना जरूरी है कि स्टोन किस प्रकार की है और उसके पीछे कौन-से जोखिम कारक काम कर रहे हैं।
बार-बार पथरी हो रही है तो सिर्फ दर्द दबाना समाधान नहीं
किडनी स्टोन दोबारा बनने की स्थिति में हर बार केवल दर्द की दवा लेकर समस्या को टालना उचित नहीं है। बार-बार स्टोन बनने वाले व्यक्ति को चिकित्सकीय जांच की जरूरत पड़ सकती है।
स्टोन का प्रकार, पेशाब की जांच, मेडिकल हिस्ट्री और अन्य जोखिम कारकों के आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि डाइट या जीवनशैली में किस तरह का बदलाव जरूरी है।
पथरी निकल जाना इलाज का अंत नहीं, कई लोगों के लिए दोबारा पथरी रोकने की शुरुआत है। पानी, नमक, डाइट, वजन और स्टोन के प्रकार—इन सभी पर ध्यान देना जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इंटरनेट देखकर किसी एक खाद्य पदार्थ को अचानक पूरी तरह बंद करने के बजाय अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह ली जाए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किडनी स्टोन की समस्या, बार-बार स्टोन बनने, तेज दर्द, पेशाब में खून या अन्य लक्षण होने पर डॉक्टर से परामर्श लें। व्यक्तिगत डाइट या उपचार डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करें।












