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JSSC CGL: खरमास में बंटे थे JSSC CGL के ज्वाइनिंग लेटर, खरमास में सरकारी नौकरी मिलना शुभ या अशुभ? जानिए नियुक्ति पत्र और मुहूर्त को लेकर क्या कहते हैं ज्योतिषीय नियम

JSSC CGL को लेकर चर्चा के बीच जानें खरमास में सरकारी नौकरी मिलना शुभ या अशुभ है, नियुक्ति पत्र के लिए मुहूर्त जरूरी है या नहीं और परीक्षा रद्द होने के बाद आगे क्या होगा।

रांची। झारखंड में JSSC CGL परीक्षा रद्द किए जाने के बाद नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच चयनित अभ्यर्थियों को खरमास के दौरान नियुक्ति पत्र दिए जाने का मुद्दा भी चर्चा में है। कई लोगों के मन में सवाल है कि खरमास में सरकारी नौकरी मिलना शुभ माना जाता है या अशुभ? क्या नियुक्ति पत्र लेने के लिए शुभ मुहूर्त जरूरी होता है?

दरअसल, धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में खरमास के दौरान कुछ मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। हालांकि, नौकरी मिलना, प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करना या सरकारी नियुक्ति पत्र प्राप्त करना अशुभ नहीं माना जाता। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली साल खरमास में ही जेएसएससी सीजीएल का ज्वाइनिंग लेटर बंटा था।

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30 दिसंबर 2025 को बांटे गए थे नियुक्ति पत्र

JSSC CGL से जुड़ी चर्चाओं में यह तथ्य भी सामने आया है कि चयनित अभ्यर्थियों को 30 दिसंबर 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में नियुक्ति पत्र दिए गए थे। यह तारीख वर्ष 2025 के खरमास की अवधि में आती थी। वर्ष 2025 में खरमास 16 दिसंबर 2025 से 14 जनवरी 2026 तक माना गया था। ऐसे में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने की तारीख को लेकर कुछ लोगों के मन में शुभ-अशुभ का सवाल उठ रहा है।

क्या खरमास में सरकारी नौकरी मिलना अशुभ है?

ज्योतिषाचार्य नागेंद्र आचार्य के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं में सूर्य के धनु या मीन राशि में रहने की अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे कुछ मांगलिक संस्कारों को टालने की परंपरा है। लेकिन नौकरी मिलना, सरकारी सेवा में चयन होना या नियुक्ति पत्र प्राप्त करना अशुभ नहीं माना जाता। इसलिए खरमास के दौरान सरकारी नौकरी मिलने को लेकर किसी तरह की नकारात्मक धारणा बनाने की जरूरत नहीं है।

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सरकारी नौकरी के लिए मुहूर्त जरूरी है?

सरकारी नौकरी की पूरी प्रक्रिया संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार होती है। परीक्षा की तारीख, परिणाम, नियुक्ति पत्र जारी करने और योगदान की तारीख विभाग द्वारा निर्धारित की जाती है।ऐसे में अभ्यर्थी अपनी इच्छा के अनुसार नियुक्ति पत्र की तारीख तय नहीं कर सकता। यदि विभाग ने खरमास के दौरान नियुक्ति पत्र जारी किया है, तो इसे धार्मिक दृष्टि से अशुभ मानने का कोई आधार नहीं है।नौकरी की वैधता और नियुक्ति का अधिकार प्रशासनिक एवं कानूनी नियमों से तय होता है, न कि शुभ मुहूर्त से।

खरमास में किन कार्यों को शुभ माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास का समय पूजा-पाठ, भगवान विष्णु और सूर्य की उपासना, दान-पुण्य, जप और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए अच्छा माना जाता है।वहीं विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और कुछ अन्य मांगलिक संस्कारों के लिए शुभ मुहूर्त देखने की परंपरा है। इसलिए इन दोनों बातों को एक जैसा समझना उचित नहीं होगा।

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खरमास का क्या है धार्मिक महत्व?

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य देव के धनु या मीन राशि में रहने की स्थिति मानी जाती है। सूर्य को ज्योतिष में ऊर्जा, आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा का कारक माना गया है।इसी अवधि में कुछ मांगलिक कार्यों को स्थगित करने की परंपरा रही है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि इस दौरान मिलने वाली नौकरी, परीक्षा में सफलता या सरकारी नियुक्ति को अशुभ माना जाए।

JSSC CGL रद्द होने के बाद क्या होगा आगे?

JSSC CGL मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल खरमास नहीं, बल्कि परीक्षा रद्द होने के बाद भर्ती प्रक्रिया का भविष्य है।झारखंड सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद चयनित होकर नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दूसरी ओर परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों और आंदोलन कर रहे छात्रों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर है।ऐसे में JSSC CGL से जुड़ा आगे का रास्ता सरकार के आधिकारिक निर्णय, भर्ती नियमों और जांच की प्रक्रिया से स्पष्ट होगा। केवल खरमास में नियुक्ति पत्र मिलने को परीक्षा या नौकरी के भविष्य से जोड़ना उचित नहीं होगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में कुछ मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त देखने की परंपरा है, लेकिन सरकारी नौकरी मिलना या नियुक्ति पत्र प्राप्त करना अशुभ नहीं माना जाता। इसलिए 30 दिसंबर 2025 को खरमास के दौरान JSSC CGL चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने को अपने आप में अशुभ नहीं कहा जा सकता। वहीं JSSC CGL की मौजूदा स्थिति का फैसला आगे की सरकारी और कानूनी प्रक्रिया से होगा। हालांकि इसे लेकर चर्चाएं जरूर अलग-अलग स्तर पर हो रही है। ज्योतिष पर यकीन करने वाले कई लोग इसे खरमास का प्रभाव भी मानते हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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